नोएडा के करीब 4,000 करोड़ रुपये के लीजबैक मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन, तत्कालीन PCS अधिकारी हरीश चंद्र बर्खास्त

नोएडा के करीब 4,000 करोड़ रुपये के लीजबैक मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन, तत्कालीन PCS अधिकारी हरीश चंद्र बर्खास्त

Noida Land Leaseback Case: उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण से जुड़े करीब 4,000 करोड़ रुपये के लीजबैक मामले में तत्कालीन PCS अधिकारी हरीश चंद्र के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। सरकार ने उन्हें सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग की ओर से 28 सितंबर 2026 को बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया। हरीश चंद्र वर्तमान में कोलकाता में उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग के स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात बताए गए थे।

यह मामला नोएडा प्राधिकरण में हरीश चंद्र की तत्कालीन तैनाती के दौरान ग्राम शहदरा से जुड़ी जमीन के लीज बैक से संबंधित है। विभागीय जांच में नियमों के विपरीत प्रक्रिया अपनाने, सर्वे रिपोर्ट में महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल नहीं करने और पात्रता से जुड़े सवालों वाली जमीन के लीजबैक का आरोप सामने आया था। सरकार के आदेश में विभागीय जांच में सिद्ध आरोपों, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की सहमति और इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के 3 सितंबर 2026 के आदेश में सामने आए तथ्यों का उल्लेख किया गया है।

नोएडा के करीब 4,000 करोड़ रुपये के लीजबैक मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन, तत्कालीन PCS अधिकारी हरीश चंद्र बर्खास्त

नोएडा प्राधिकरण में सचिव पद पर थे हरीश चंद्र

हरीश चंद्र वर्ष 2011-12 के दौरान नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी नोएडा प्राधिकरण में सचिव के पद पर तैनात थे। इसी अवधि में ग्राम शहदरा की जमीन से जुड़ी लीजबैक प्रक्रिया को लेकर बाद में विभागीय जांच शुरू हुई।

जांच का संबंध सेक्टर 140-ए, 141, 142 और 143 में प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहित और कब्जे में ली गई जमीन से था। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र में कुल 3,81,527 वर्गमीटर भूमि से जुड़ी प्रक्रिया की जांच की गई। विभागीय जांच में लीजबैक के लिए तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट और उसमें शामिल विवरणों को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गईं।

सर्वे रिपोर्ट को लेकर उठे सवाल

विभागीय जांच रिपोर्ट के अनुसार, शहदरा गांव की आबादी के निर्धारण के लिए सेटेलाइट इमेज का इस्तेमाल किया जाना चाहिए था। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि इस प्रक्रिया में सेटेलाइट इमेज का इस्तेमाल नहीं किया गया और सर्वे में ऐसे भू-मालिकों, निजी कंपनियों तथा गांव के बाहर के निवासियों को भी शामिल किया गया, जिनकी पात्रता को लेकर सवाल उठे।

जांच रिपोर्ट में सर्वे के अलग-अलग कॉलम में आवश्यक जानकारियां दर्ज नहीं किए जाने का भी उल्लेख किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, एक कॉलम में मूल काश्तकार का नाम दर्ज नहीं किया गया था, जबकि दूसरे में विनियमितीकरण समिति को संदर्भित क्षेत्रफल का उल्लेख नहीं किया गया। इन तथ्यों को विभागीय जांच में महत्वपूर्ण माना गया।

करीब 4,000 करोड़ रुपये की जमीन का मामला

सरकार के आदेश और विभागीय जांच से संबंधित रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में लगभग 4,00,447 वर्गमीटर भूमि के लीजबैक और आवंटन का मुद्दा सामने आया। इस जमीन का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 4,000 करोड़ रुपये बताया गया है। जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि समिति और प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट में महत्वपूर्ण तथ्यों का सही तरीके से उल्लेख नहीं किया गया, जिसके बाद जमीन के लीजबैक को लेकर सवाल खड़े हुए।

रिपोर्ट में कुछ निजी कंपनियों के नाम और राजस्व अभिलेखों में दर्ज विवरणों का भी उल्लेख किया गया है। विभागीय जांच के अनुसार, इन जानकारियों और सर्वे रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों के बीच अंतर को भी जांच का हिस्सा बनाया गया था।

नोएडा के करीब 4,000 करोड़ रुपये के लीजबैक मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन, तत्कालीन PCS अधिकारी हरीश चंद्र बर्खास्त

2013 में शुरू हुई थी विभागीय कार्रवाई

इस मामले में हरीश चंद्र के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया वर्ष 2013 में शुरू हुई थी। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक 27 सितंबर 2013 को कार्रवाई की संस्तुति करते हुए जांच मेरठ के तत्कालीन मंडलायुक्त को सौंपी गई थी। इसके बाद मामले में लंबी विभागीय जांच चली।

सरकार के बर्खास्तगी आदेश में कहा गया है कि विभागीय जांच में आरोप सिद्ध पाए गए। इसके अलावा उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, प्रयागराज की ओर से 6 जनवरी 2022 को दी गई सहमति और इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के 3 सितंबर 2026 के आदेश में सामने आए तथ्यों को भी कार्रवाई के आधारों में शामिल किया गया।

वर्तमान में कोलकाता में तैनात थे अधिकारी

बर्खास्तगी से पहले हरीश चंद्र पश्चिम बंगाल के कोलकाता में उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग के स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे। सरकार की ओर से जारी आदेश के बाद उनकी सरकारी सेवा समाप्त कर दी गई है।

क्या है लीजबैक मामला?

लीजबैक व्यवस्था के तहत कुछ परिस्थितियों में अधिग्रहित जमीन को निर्धारित नियमों और पात्रता के आधार पर संबंधित पक्षों को वापस पट्टे पर देने की प्रक्रिया होती है। नोएडा के शहदरा मामले में इसी प्रक्रिया के दौरान तैयार किए गए सर्वे, पात्रता और जमीन से संबंधित रिकॉर्ड को लेकर विभागीय जांच हुई।

जांच रिपोर्ट में यह आरोप लगाया गया कि संबंधित समितियों और अधिकारियों के सामने प्रस्तुत रिपोर्ट में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया। इसके कारण लीजबैक के लिए शामिल किए गए लोगों और जमीन के क्षेत्रफल को लेकर सवाल उठे। सरकार ने विभागीय जांच में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर हरीश चंद्र के खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई की है।

लंबे समय बाद हुई कार्रवाई

नोएडा की जमीन से जुड़ा यह मामला करीब एक दशक से अधिक समय से विभागीय कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया में रहा। वर्ष 2013 में शुरू हुई अनुशासनिक कार्रवाई के बाद लोक सेवा आयोग की सहमति और न्यायालय में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब सरकार ने बर्खास्तगी का आदेश जारी किया है।

इस कार्रवाई के साथ नोएडा प्राधिकरण में हरीश चंद्र की तत्कालीन तैनाती से जुड़े लीजबैक मामले में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय सामने आया है। विभागीय आदेश में जांच में सिद्ध आरोपों और संबंधित कानूनी प्रक्रिया का हवाला देते हुए सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।

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