Gonda Flood News: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में घाघरा नदी के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। लगातार बारिश और बैराजों से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। करनैलगंज क्षेत्र में एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर 106.560 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 106.070 मीटर है। यानी नदी खतरे के निशान से करीब 49 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
घाघरा नदी के बढ़ते जलस्तर का सबसे अधिक असर नदी के किनारे बसे निचले इलाकों और गांवों पर पड़ रहा है। कई स्थानों पर बाढ़ का पानी गांवों और खेतों की ओर तेजी से बढ़ने लगा है। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से तटीय क्षेत्रों में अलर्ट जारी करते हुए बाढ़ चौकियों, नावों और राहत-बचाव टीमों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं।

तीन महीने में पांचवीं बार खतरे के निशान से ऊपर पहुंची घाघरा
गोंडा में घाघरा नदी का इस मानसून सीजन में बार-बार बढ़ना ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर के अंत में घाघरा नदी पांचवीं बार खतरे के निशान को पार कर गई है। 28 सितंबर की सुबह एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर 106.560 मीटर दर्ज किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान विभिन्न बैराजों से करीब 4.61 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई।
पिछले कुछ दिनों में जलस्तर में आई इस तेजी ने एक बार फिर तटवर्ती गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इससे पहले सितंबर में भी घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुकी थी और कई गांव बाढ़ से प्रभावित हुए थे। सितंबर के पहले सप्ताह में नदी खतरे के निशान से 29 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी।
करनैलगंज और आसपास के इलाकों में बढ़ी चिंता
घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से गोंडा के करनैलगंज, तरबगंज और नवाबगंज क्षेत्र के तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नदी का पानी निचले इलाकों की ओर बढ़ने से ग्रामीणों को आवागमन और रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे पहले भी गोंडा में नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण कई गांवों में पानी पहुंचने और हजारों लोगों के प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
बाढ़ की स्थिति में सबसे बड़ी परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को लेकर सामने आती है। संपर्क मार्गों पर पानी भरने के बाद गांवों का मुख्य सड़कों और बाजारों से संपर्क प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान की आशंका भी बढ़ जाती है।

भारी बारिश और बैराजों से छोड़े गए पानी का असर
घाघरा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के पीछे लगातार बारिश के साथ-साथ विभिन्न बैराजों से छोड़ा गया पानी भी महत्वपूर्ण कारण बताया गया है। 28 सितंबर को नदी में भारी डिस्चार्ज दर्ज किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के तराई और पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बारिश के बाद बड़ी मात्रा में पानी नदी में आया, जिसके चलते घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ा।
नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और बाढ़ विभाग की ओर से निगरानी बढ़ाई गई है। तटबंधों की पेट्रोलिंग और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी की जा रही है। प्रशासन का प्रयास है कि जलस्तर में अचानक और बढ़ोतरी होने की स्थिति में प्रभावित लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने से जनजीवन प्रभावित
घाघरा नदी के उफान का असर सिर्फ जलस्तर तक सीमित नहीं है। नदी के आसपास बसे गांवों में पानी पहुंचने से लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों को घर से बाहर निकलने, बाजार तक पहुंचने और जरूरी सामान लाने के लिए अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है।
पानी बढ़ने के साथ पशुओं के लिए चारे और पीने के पानी की समस्या भी पैदा हो सकती है। पहले भी गोंडा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों को खाद्य सामग्री, पानी और पशुओं के चारे को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। प्रशासन की ओर से राहत सामग्री और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती रही है।

फसलों पर भी मंडरा रहा नुकसान का खतरा
घाघरा नदी का पानी तटवर्ती इलाकों में फैलने से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। खेतों में पानी भरने से खरीफ की फसलों को नुकसान होने की आशंका रहती है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में फसल क्षति का सर्वे कराने की तैयारी भी सामने आई है।
ग्रामीणों के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती घरों, पशुओं और कृषि भूमि को सुरक्षित रखना है। वहीं प्रशासन के सामने भी संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव व्यवस्था को लगातार सक्रिय बनाए रखने की चुनौती है।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
घाघरा नदी के जलस्तर में तेजी को देखते हुए प्रशासन ने तटीय इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। बाढ़ चौकियों को सक्रिय रखने, नावों की व्यवस्था और राहत-बचाव दलों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। तटबंधों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, अगले कुछ समय में नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी रखी जा रही है।
गोंडा में फिर गहराया बाढ़ का संकट
गोंडा में इस साल मानसून के दौरान घाघरा नदी का बार-बार खतरे के निशान को पार करना तटवर्ती गांवों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सितंबर के अंत में एक बार फिर नदी के उफान पर आने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 28 सितंबर को एल्गिन ब्रिज पर 106.560 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 106.070 मीटर से लगभग आधा मीटर अधिक है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा, आवागमन बनाए रखना और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्य तेज करना है। आने वाले समय में घाघरा नदी का जलस्तर किस दिशा में जाता है, इस पर तटीय गांवों की स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी।






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