लखीमपुर खीरी हिंसा मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई से जुड़े तत्कालीन पीठासीन न्यायिक अधिकारी पर लगाए गए गंभीर आरोपों के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को तेजी से उचित कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इस संबंध में की जाने वाली कार्रवाई की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करने को कहा है।

जज के आचरण को लेकर क्या हैं आरोप?
पीड़ितों की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया था कि संबंधित पीठासीन अधिकारी ने कई आपराधिक मामलों को अपनी अदालत में स्थानांतरित किया और कुछ मामलों में आरोपियों को जमानत दी गई या बरी किया गया। यह आरोप मामले की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इन आरोपों पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है, बल्कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मामले को गंभीरता से देखने और उचित कार्रवाई करने को कहा है।
यूपी सरकार को नया सरकारी वकील नियुक्त करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार को भी एक अहम निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से लखीमपुर खीरी मामले की आगे की सुनवाई के लिए जल्द से जल्द नया सरकारी वकील नियुक्त करने को कहा है, ताकि मामले की सुनवाई में किसी तरह की रुकावट न आए। कोर्ट ने इस मामले को अब दो सप्ताह बाद फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

2021 की हिंसा में हुई थी आठ लोगों की मौत
गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में 3 अक्टूबर 2021 को किसानों के प्रदर्शन के दौरान भीषण हिंसा हुई थी, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा था। इस घटना में कुल आठ लोगों की जान चली गई थी। इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। दिसंबर 2023 में ट्रायल कोर्ट ने इस मुख्य मामले में हत्या, आपराधिक साजिश समेत विभिन्न गंभीर आरोप तय किए थे।
सुप्रीम कोर्ट के रुख से बढ़ी मामले की अहमियत
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे प्रकरण में यह स्पष्ट किया है कि वह फिलहाल जज पर लगाए गए आरोपों और उनके जवाब पर कोई निष्कर्ष नहीं दे रहा है। मामले की वास्तविक स्थिति अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा की जाने वाली जांच और पेश की जाने वाली रिपोर्ट के बाद आगे की सुनवाई में स्पष्ट होगी। कोर्ट का यह रुख यह दिखाता है कि वह इस संवेदनशील मामले की सुनवाई में निष्पक्षता को लेकर बेहद सतर्क है।
निष्कर्ष
लखीमपुर खीरी हिंसा मामला पहले से ही अपनी गंभीरता और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के कारण सुर्खियों में रहा है। अब ट्रायल जज पर लगे आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख ने इस मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिलने वाली कार्रवाई रिपोर्ट और यूपी सरकार की ओर से नियुक्त होने वाले नए सरकारी वकील के बाद अगली सुनवाई में इस मामले में आगे की दिशा साफ होने की उम्मीद है।
(इस खबर में उल्लेखित विवरण सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित हैं।)






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