नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2026। मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) और नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। एक ओर विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सड़कों पर उतर आए हैं, वहीं दूसरी ओर Form-6 में कथित बदलाव का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने Form-6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने चुनाव आयोग से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने को कहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फॉर्म में बदलाव किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत किया गया। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है।

Form-6 में बदलाव को लेकर क्या है विवाद?
Form-6 नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वैधानिक आवेदन है। विवाद उस अतिरिक्त घोषणा से जुड़ा है, जो SIR के दौरान ऑनलाइन Form-6 के साथ दिखाई दी थी।
इस अतिरिक्त जानकारी में आवेदक के माता-पिता या दादा-दादी के पिछले SIR से जुड़े मतदाता रिकॉर्ड की जानकारी मांगे जाने का मुद्दा सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस तरह के बदलाव के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी संशोधित Form-6 को अदालत ने मंजूरी नहीं दी है। CJI सूर्यकांत ने रिकॉर्ड सामने आने के बाद यह देखने की बात कही कि आखिर फॉर्म में बदलाव किसने किया और उसके पीछे क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा रिकॉर्ड
अदालत ने मामले में चुनाव आयोग से संबंधित रिकॉर्ड तलब किया है। अब आयोग को यह स्पष्ट करना होगा कि Form-6 में दिखाई देने वाले बदलाव या अतिरिक्त घोषणा किस आदेश और किस अधिकार के आधार पर लागू की गई।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से यह सवाल उठाया गया है कि क्या चुनाव आयोग के स्तर पर फॉर्म में इस तरह के बदलाव के लिए अलग से वैधानिक प्रक्रिया जरूरी थी।
वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि Form-6 में मूल रूप से संशोधन नहीं किया गया था, बल्कि SIR से संबंधित घोषणा को अलग से जोड़ा गया था। आयोग ने यह भी कहा है कि SIR अवधि समाप्त होने के बाद नियमों के अनुसार मूल Form-6 का इस्तेमाल किया जाएगा।

विपक्ष ने दिल्ली में किया बड़ा प्रदर्शन
Form-6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध और तेज कर दिया है। मंगलवार को INDIA ब्लॉक के कई सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने की कोशिश की।
मार्च में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव, सुप्रिया सुले समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया वापस लेने और मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए नामों को बहाल करने की मांग उठाई।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड लगाकर रोक दिया। इसके बाद कई नेता सड़क पर धरने पर बैठ गए। पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को हिरासत में लिया।
विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल हैं। विपक्ष ने चुनाव आयोग से मतदाता सूची में हुए बदलावों का विस्तृत रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और कथित रूप से हटाए गए योग्य मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद CEC ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। विपक्ष का कहना है कि Form-6 को लेकर अदालत की टिप्पणी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए जा रहे उनके सवालों को और मजबूती दी है।
हालांकि, ये विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप हैं और मामले में अभी अदालत ने किसी तरह का अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

चुनाव आयोग का क्या कहना है?
चुनाव आयोग ने Form-6 को लेकर उठे विवाद पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि Form-6 को औपचारिक रूप से बदला नहीं गया है। आयोग के अनुसार, SIR से संबंधित घोषणा को प्रक्रिया के संदर्भ में जोड़ा गया था और SIR के बाद सामान्य अवधि में नियमों के मुताबिक Form-6 का इस्तेमाल किया जाएगा।
आयोग ने यह भी कहा है कि SIR से संबंधित प्रक्रिया पहले से निर्धारित कानूनी व्यवस्था और संबंधित न्यायिक आदेशों के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है।
अब रिकॉर्ड से खुलेगा पूरा राज
फिलहाल इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड होंगे। अदालत यह देखना चाहती है कि Form-6 में दिखाई देने वाला बदलाव वास्तव में किस स्तर पर हुआ, उसे किसने अधिकृत किया और इसके लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई।
ऐसे में आने वाली सुनवाई में चुनाव आयोग की ओर से पेश किए जाने वाले दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे। कोर्ट के सामने रिकॉर्ड आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि Form-6 में अतिरिक्त प्रावधान किस आधार पर जोड़ा गया था।
SIR और Form-6 को लेकर अब सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई पहुंच चुकी है। विपक्ष जहां इसे चुनावी पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जोड़ रहा है, वहीं चुनाव आयोग अपने कदमों को कानूनी प्रक्रिया के तहत बता रहा है। फिलहाल मामले में अंतिम फैसला आना बाकी है और अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।






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