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यूपी स्वास्थ्य विभाग का दोहरा एक्शन: रिटायर्ड विशेषज्ञ डॉक्टरों को 70 साल तक मौका, लापरवाही पर 26 चिकित्सकों की सेवाएं खत्म

यूपी स्वास्थ्य विभाग का दोहरा एक्शन: रिटायर्ड विशेषज्ञ डॉक्टरों को 70 साल तक मौका, लापरवाही पर 26 चिकित्सकों की सेवाएं खत्म

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में डॉक्टरों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सितंबर 2026 में दो अलग-अलग स्तर पर महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। एक ओर प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए सेवानिवृत्त डॉक्टरों की पुनर्नियुक्ति की अधिकतम आयु सीमा 65 से बढ़ाकर 70 वर्ष करने की व्यवस्था शुरू की गई है। वहीं दूसरी ओर लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और चिकित्सीय जिम्मेदारियों में लापरवाही के मामलों में 26 सरकारी डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई की गई है। इसके अलावा अन्य डॉक्टरों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

यूपी स्वास्थ्य विभाग का दोहरा एक्शन: रिटायर्ड विशेषज्ञ डॉक्टरों को 70 साल तक मौका, लापरवाही पर 26 चिकित्सकों की सेवाएं खत्म

रिटायरमेंट के बाद 70 साल तक सेवाएं दे सकेंगे विशेषज्ञ डॉक्टर

उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को देखते हुए सेवानिवृत्त डॉक्टरों की पुनर्नियुक्ति की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहले सेवानिवृत्त विशेषज्ञ डॉक्टरों को 65 वर्ष की उम्र तक पुनर्नियुक्ति के जरिए सेवाएं लेने की व्यवस्था थी। अब इसे बढ़ाकर 70 वर्ष किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इस कदम का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में अनुभवी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बनाए रखना है। खासकर ऐसे अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता है, वहां इस व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

500 निःसंवर्गीय पदों पर होगी विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति

रिपोर्टों के अनुसार, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 500 निःसंवर्गीय पदों पर सेवानिवृत्त विशेषज्ञ डॉक्टरों के पुनर्नियोजन की व्यवस्था की गई है। इन पदों पर नियुक्ति अनुबंध के आधार पर किए जाने और वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से योग्य डॉक्टरों का चयन किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पुनर्नियुक्त डॉक्टरों को मुख्य रूप से मरीजों के उपचार और परामर्श से जुड़े कार्यों में लगाया जाएगा। रिपोर्टों के मुताबिक ये चिकित्सक कंसल्टेंट के तौर पर सेवाएं देंगे और उन पर निजी प्रैक्टिस को लेकर भी शर्तें लागू होंगी।

इस व्यवस्था के पीछे एक प्रमुख उद्देश्य यह भी बताया गया है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में लंबे अनुभव वाले डॉक्टरों की विशेषज्ञता का लाभ मरीजों को मिल सके। इससे विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी वाले क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

सरकारी डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति और पुनर्नियुक्ति व्यवस्था

यहां यह समझना जरूरी है कि 70 वर्ष तक सेवा देने का मतलब सभी डॉक्टरों की नियमित सेवानिवृत्ति आयु को सीधे 70 वर्ष करना नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सेवानिवृत्ति के बाद योग्य चिकित्सकों को पुनर्नियुक्ति के जरिए सेवाएं जारी रखने का प्रावधान किया जा रहा है।

यानी पात्रता और विभागीय शर्तों के तहत डॉक्टरों की सेवाएं पुनर्नियुक्ति के माध्यम से आगे बढ़ाई जा सकती हैं। इसका मुख्य फोकस अनुभवी और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं का उपयोग करना है।

दूसरी ओर 26 डॉक्टरों पर बड़ी कार्रवाई

जहां एक तरफ स्वास्थ्य विभाग अनुभवी डॉक्टरों की सेवाओं को आगे बढ़ाने की व्यवस्था कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ड्यूटी में लापरवाही और लंबे समय तक अनुपस्थित रहने वाले डॉक्टरों पर सख्ती भी की गई है।

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के बाद 26 सरकारी डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई की गई। रिपोर्टों के मुताबिक इन डॉक्टरों पर लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और मरीजों के उपचार से जुड़े दायित्वों में लापरवाही के आरोप थे।

विभाग की ओर से यह कार्रवाई संबंधित मामलों की समीक्षा और विभागीय प्रक्रिया के बाद की गई है। स्वास्थ्य विभाग का जोर इस बात पर है कि सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टर नियमित रूप से अपनी ड्यूटी पर मौजूद रहें और मरीजों को निर्धारित समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएं।

यूपी स्वास्थ्य विभाग का दोहरा एक्शन: रिटायर्ड विशेषज्ञ डॉक्टरों को 70 साल तक मौका, लापरवाही पर 26 चिकित्सकों की सेवाएं खत्म

9 अन्य डॉक्टरों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई

26 डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त करने के साथ ही 9 अन्य डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार इन मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और चिकित्सीय कार्यों में लापरवाही जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है।

इस कार्रवाई के जरिए विभाग ने यह संदेश दिया है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में डॉक्टरों की उपलब्धता और जवाबदेही दोनों महत्वपूर्ण हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति का सीधा असर मरीजों और उनके इलाज पर पड़ सकता है।

स्वास्थ्य सेवाओं में अनुभव और जवाबदेही दोनों पर जोर

उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के इन दोनों फैसलों को एक साथ देखा जाए तो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में दो अलग-अलग जरूरतों पर ध्यान दिया गया है। पहली जरूरत विशेषज्ञ और अनुभवी डॉक्टरों की उपलब्धता है, जबकि दूसरी जरूरत ड्यूटी और चिकित्सीय जिम्मेदारियों में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

एक ओर सेवानिवृत्त विशेषज्ञ डॉक्टरों को 70 वर्ष तक पुनर्नियुक्ति का अवसर देकर उनके अनुभव का इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर ऐसे डॉक्टरों पर कार्रवाई की गई है जिनके खिलाफ लंबे समय तक अनुपस्थित रहने या जिम्मेदारियों के निर्वहन में लापरवाही के मामले सामने आए।

मरीजों को मिल सकती है विशेषज्ञ सेवाओं की सुविधा

सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता कम होने पर मरीजों को कई बार बड़े अस्पतालों या दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है।

ऐसे में सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों को पुनर्नियुक्त करने की व्यवस्था से सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ परामर्श और उपचार की उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। 500 निःसंवर्गीय पदों पर नियुक्ति की व्यवस्था इसी दिशा में एक कदम है।

हालांकि, इस व्यवस्था का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने विशेषज्ञ डॉक्टर पुनर्नियुक्त होते हैं और उन्हें किन अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात किया जाता है।

सरकारी अस्पतालों में अनुशासन पर भी नजर

स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई कार्रवाई का दूसरा पहलू सरकारी अस्पतालों में अनुशासन से जुड़ा है। डॉक्टरों की अनुपस्थिति या मरीजों के इलाज में लापरवाही का असर सीधे स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। ऐसे में विभाग द्वारा मामलों की समीक्षा और कार्रवाई को डॉक्टरों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा सकता है।

विभाग के सामने चुनौती यह भी है कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में डॉक्टरों की उपलब्धता बनी रहे। इसके लिए एक तरफ अनुभवी चिकित्सकों की सेवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

यूपी स्वास्थ्य विभाग का दोहरा एक्शन: रिटायर्ड विशेषज्ञ डॉक्टरों को 70 साल तक मौका, लापरवाही पर 26 चिकित्सकों की सेवाएं खत्म

यूपी स्वास्थ्य विभाग के फैसलों पर आगे रहेगी नजर

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के इन फैसलों के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि 70 वर्ष तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की पुनर्नियुक्ति से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता कितनी बढ़ती है और 500 पदों पर होने वाली नियुक्तियों का मरीजों को कितना लाभ मिलता है।

साथ ही 26 डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त किए जाने और 9 अन्य डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था किस तरह आगे बढ़ती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की नीति में एक तरफ अनुभवी डॉक्टरों की विशेषज्ञता का लाभ लेने और दूसरी तरफ ड्यूटी में लापरवाही पर जवाबदेही तय करने पर जोर दिखाई दे रहा है। इन दोनों कदमों का अंतिम असर सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता और मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सेवाओं पर आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

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