उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर चल रहे विरोध और उपभोक्ताओं की लगातार शिकायतों के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। ऊर्जा मंत्री A. K. Sharma ने घोषणा की है कि अब प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर प्रीपेड नहीं, बल्कि सामान्य पोस्ट-पेड मीटर की तरह कार्य करेंगे। सरकार के इस फैसले को उपभोक्ताओं को राहत देने वाला कदम माना जा रहा है, वहीं इसे बढ़ते जनविरोध के बीच सरकार के बैकफुट पर आने के रूप में भी देखा जा रहा है।

क्या है नया फैसला?
ऊर्जा मंत्री ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि अब उपभोक्ताओं को पहले की तरह हर महीने बिजली का बिल मिलेगा। यानी महीने की 1 तारीख से 30 तारीख तक की खपत का बिल अगले 10 दिनों के भीतर उपभोक्ताओं को एसएमएस या व्हाट्सएप के माध्यम से भेजा जाएगा। इसके बाद उपभोक्ता को निर्धारित समय सीमा में बिल का भुगतान करना होगा।
इस फैसले के साथ ही प्रीपेड मीटर व्यवस्था को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया गया है। यानी अब उपभोक्ताओं को पहले से रिचार्ज कराने की बाध्यता नहीं होगी, जो कि सबसे बड़ी शिकायतों में से एक थी।

उपभोक्ताओं को मिली बड़ी राहत
सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्थिति में महीने के भीतर बिजली आपूर्ति नहीं काटी जाएगी। इसके अलावा जिन उपभोक्ताओं पर पहले से बिजली बिल का बकाया है, उन्हें राहत देते हुए 10 किस्तों में भुगतान करने की सुविधा दी गई है।
ऊर्जा मंत्री ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने मोबाइल नंबर बिजली विभाग में अपडेट कराएं ताकि उन्हें समय पर बिल और अन्य जरूरी सूचनाएं मिल सकें।
स्मार्ट मीटर पर क्यों हुआ विरोध?
प्रदेश के कई जिलों में स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों ने खुलकर विरोध जताया था। उपभोक्ताओं का आरोप था कि ये मीटर तेजी से रीडिंग बढ़ाते हैं, जिससे बिल अधिक आ रहा है। साथ ही प्रीपेड सिस्टम के कारण समय पर रिचार्ज न होने पर तुरंत बिजली कटने की समस्या भी सामने आई।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इसको लेकर असंतोष बढ़ता गया और कई जगहों पर प्रदर्शन भी हुए। इसी बढ़ते दबाव के चलते सरकार को अपने फैसले में बदलाव करना पड़ा।

नए स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक
ऊर्जा विभाग ने फिलहाल पुराने मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मीटर से बदलने की प्रक्रिया को भी स्थगित कर दिया है। यानी अब नए मीटर लगाने की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया गया है। हालांकि, जहां पहले से स्मार्ट मीटर लगे हुए हैं, वहां उनकी तकनीकी समस्याओं के समाधान पर प्राथमिकता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
तकनीकी खामियों पर अब भी सवाल
हालांकि सरकार के इस फैसले से उपभोक्ताओं को राहत जरूर मिली है, लेकिन स्मार्ट मीटर की तकनीकी खामियों को लेकर सवाल अब भी बने हुए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि “तेज रीडिंग” और गलत बिलिंग की शिकायतों का समाधान अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीकी खामियों को दूर नहीं किया गया, तो भविष्य में यह समस्या फिर से सामने आ सकती है। ऐसे में केवल भुगतान प्रणाली बदलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि मीटर की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
सरकार का पक्ष
ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने अपने बयान में कहा कि सरकार “उपभोक्ता देवो भव:” के सिद्धांत पर काम कर रही है और आम लोगों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि गर्मी के मौसम को देखते हुए बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।

राजनीतिक मायने भी अहम
स्मार्ट मीटर को लेकर सरकार के इस फैसले के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। विपक्ष लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला कर रहा था। ऐसे में सरकार का यह कदम जनता के बीच नाराजगी कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार स्मार्ट मीटर योजना को पूरी तरह से कैसे लागू करती है और तकनीकी समस्याओं का समाधान किस तरह करती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा है। पोस्ट-पेड प्रणाली की वापसी से लोगों को आर्थिक और मानसिक दबाव से कुछ हद तक छुटकारा मिलेगा। लेकिन स्मार्ट मीटर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का समाधान करना अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
यदि सरकार इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने में सफल रहती है, तभी यह योजना वास्तव में उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी साबित हो पाएगी।






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