राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने मंगलवार को राष्ट्रपति Droupadi Murmu से मुलाकात कर आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए सांसदों के कथित उत्पीड़न का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी छोड़ने के बाद कई नेताओं को राज्य एजेंसियों के जरिए निशाना बनाया जा रहा है और उन पर दबाव डाला जा रहा है।

राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन
राघव चड्ढा ने अन्य सांसदों—Sandeep Pathak और Ashok Mittal—के साथ राष्ट्रपति भवन पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में उन्होंने आरोप लगाया कि Aam Aadmi Party की अगुवाई वाली Punjab Government “प्रतिशोध की राजनीति” कर रही है और हाल ही में पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सांसदों को टारगेट किया जा रहा है।
‘राज्य तंत्र का दुरुपयोग’ का आरोप
चड्ढा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार अपने प्रशासनिक और जांच तंत्र का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए कर रही है। उनका कहना था कि पार्टी से अलग होने के बाद कई नेताओं को धमकाया जा रहा है और उनके खिलाफ “राजनीतिक रूप से प्रेरित” कार्रवाई की जा रही है।

लोकतांत्रिक मूल्यों पर उठे सवाल
उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इससे राजनीतिक स्वतंत्रता पर असर पड़ता है। उन्होंने राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप करने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने की मांग की।
राजनीतिक माहौल गरमाया
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध सकते हैं, जबकि सत्ताधारी पक्ष की ओर से अभी तक इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या?
अब यह देखना अहम होगा कि इस मामले में राष्ट्रपति कार्यालय या संबंधित एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं और क्या इस विवाद पर आगे कोई जांच या कार्रवाई होती है।






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