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Opposition to e-pharmacy and online drug sales : ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में ऋषिकेश के केमिस्टों का प्रदर्शन, दवा बाजार रहा बंद

Opposition to e-pharmacy and online drug sales : ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में ऋषिकेश के केमिस्टों का प्रदर्शन, दवा बाजार रहा बंद

ऋषिकेश में ई-फार्मेसी के संचालन और बड़े कॉर्पोरेट घरानों द्वारा की जा रही प्रीडेटरी प्राइसिंग के विरोध में दवा व्यापारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर केमिस्ट एसोसिएशन ऋषिकेश से जुड़े दवा व्यापारियों ने बंद का समर्थन करते हुए अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखीं। इस दौरान शहर में करोड़ों रुपये का दवा कारोबार प्रभावित हुआ।

Opposition to e-pharmacy and online drug sales : ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में ऋषिकेश के केमिस्टों का प्रदर्शन, दवा बाजार रहा बंद

देहरादून तिराहे पर एकत्र हुए दवा व्यापारी

बंद के समर्थन में ऋषिकेश के दवा व्यापारी देहरादून तिराहे पर एकत्रित हुए, जहां उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इसके बाद केमिस्ट एसोसिएशन के नेतृत्व में शहर के मुख्य मार्गों पर पैदल रैली निकाली गई। रैली के दौरान व्यापारियों ने सरकार और कॉर्पोरेट नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी एकजुटता दिखाई।

Opposition to e-pharmacy and online drug sales : ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में ऋषिकेश के केमिस्टों का प्रदर्शन, दवा बाजार रहा बंद

ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग

केमिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि बिना डॉक्टर के पर्चे के ऑनलाइन दवाओं की बिक्री आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि देशभर के करीब 12.40 लाख केमिस्ट और उनके परिवार इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और ई-फार्मेसी के बढ़ते प्रभाव से उनकी आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है।

Opposition to e-pharmacy and online drug sales : ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में ऋषिकेश के केमिस्टों का प्रदर्शन, दवा बाजार रहा बंद

दवा व्यापारियों ने जताई चिंता

प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने कहा कि बड़े कॉर्पोरेट घराने भारी छूट और प्रीडेटरी प्राइसिंग के जरिए छोटे मेडिकल स्टोर संचालकों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो छोटे दवा कारोबारियों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

सरकार से ठोस नीति बनाने की मांग

दवा व्यापारियों ने सरकार से मांग की कि ई-फार्मेसी को लेकर स्पष्ट और सख्त नीति बनाई जाए, ताकि दवाओं की बिक्री नियमों के तहत हो सके और मरीजों की सुरक्षा के साथ-साथ छोटे व्यापारियों के हित भी सुरक्षित रह सकें।

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