नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय में देहरादून के वसंत विहार क्षेत्र में रह रहे एक पाकिस्तानी सिख परिवार को 24 घंटे के भीतर भारत छोड़ने के सरकारी आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट से जांच के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 अगस्त की तिथि निर्धारित की गई है। न्यायालय ने अपने पूर्व आदेश को जारी रखते हुए कहा कि यदि परिवार से देश की सुरक्षा को कोई प्रत्यक्ष खतरा नहीं है, तो उन्हें तत्काल देश छोड़ने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।

2019 से भारत में रह रहा है परिवार
मामले के अनुसार पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र के निवासी मनजीत सिंह अपने परिवार के साथ वर्ष 2019 में लॉन्ग टर्म वीजा (LTV) पर भारत आए थे। परिवार वर्तमान में देहरादून के वसंत विहार क्षेत्र में रह रहा है। याचिका में बताया गया है कि मनजीत सिंह ने समय-समय पर अपने वीजा का नवीनीकरण कराया और उसकी वैधता अभी समाप्त नहीं हुई है।
परिवार की ओर से अदालत को बताया गया कि उनकी बड़ी बेटी बीटेक की पढ़ाई कर रही है, दूसरी बेटी बीडीएस की छात्रा है, जबकि बेटा अभी नाबालिग है। ऐसे में वीजा अवधि समाप्त होने से पहले देश छोड़ने का आदेश परिवार के भविष्य और बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।

सरकार ने सुरक्षा कारणों का दिया हवाला
राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि जिस क्षेत्र में यह परिवार रह रहा है, उसके निकट भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) का मुख्यालय स्थित है। सुरक्षा एजेंसियों के दृष्टिकोण से यह एक संवेदनशील क्षेत्र है, इसलिए मामले की विस्तृत जांच आवश्यक है।
सरकार ने अदालत से जांच पूरी करने के लिए समय मांगा, जिसके बाद न्यायालय ने चार सप्ताह का समय प्रदान करते हुए अगली सुनवाई तक अंतरिम राहत जारी रखी।

परिवार को मिला था 24 घंटे में देश छोड़ने का नोटिस
याचिका के अनुसार राज्य सरकार द्वारा 31 मई को परिवार को भारत छोड़ने का आदेश जारी किया गया था। यह नोटिस परिवार को 2 जून को प्राप्त हुआ। नोटिस में 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने को कहा गया था। इसके खिलाफ मनजीत सिंह ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राहत की मांग की थी।
अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब इस मामले में राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत पक्ष रखना होगा। वहीं परिवार को फिलहाल राहत मिल गई है और अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी। मामले पर कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर निगाहें बनी हुई हैं।






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