शाहजहांपुर। बिहार के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के खिलाफ उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में संत समाज का आक्रोश देखने को मिला। खिरनीबाग स्थित श्री रामलीला मैदान में संत समाज के लोगों ने पप्पू यादव के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए उनका पुतला फूंका और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे संत समाज के लोगों ने पप्पू यादव पर सनातन धर्म और संत समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।
संत समाज का कहना है कि हाल ही में पप्पू यादव द्वारा संसद के बाहर भगवा वस्त्र पहनकर श्री राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे की कथित चोरी के मामले पर टिप्पणी की गई थी। संत समाज ने आरोप लगाया कि भगवा वस्त्र पहनकर इस तरह की टिप्पणी करने से पूरे संत समाज और सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है। इसी के विरोध में शाहजहांपुर में संत समाज ने सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया।

खिरनीबाग श्री रामलीला मैदान में हुआ विरोध प्रदर्शन
शाहजहांपुर के खिरनीबाग स्थित श्री रामलीला मैदान में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में संत समाज के लोग मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने पप्पू यादव के खिलाफ नारे लगाए और उनका पुतला फूंका।
संत समाज के लोगों ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को सनातन धर्म, संत समाज या भगवा वस्त्र को लेकर ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हों। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि किसी मामले में अनियमितता या चोरी की घटना हुई है तो उसके लिए दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन किसी घटना के लिए पूरे संत समाज को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
‘दान चोरी के मामले में कोई संत शामिल नहीं था’
प्रदर्शन के दौरान संत प्रमोद पांडे ने कहा कि वह पप्पू यादव से सवाल करना चाहते हैं कि यदि श्री राम मंदिर में दान चोरी का मामला सामने आया था, तो क्या इसमें कोई भगवाधारी संत शामिल था?
उन्होंने दावा किया कि दान चोरी के मामले में संत समाज का कोई व्यक्ति शामिल नहीं था। संत प्रमोद पांडे के अनुसार, जिन लोगों पर चोरी के आरोप लगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई और संबंधित लोगों की गिरफ्तारी भी हुई।
उन्होंने कहा कि किसी एक घटना को लेकर पूरे संत समाज पर सवाल उठाना उचित नहीं है। संत समाज का कहना है कि भगवा वस्त्र सनातन परंपरा और साधु-संतों की पहचान का प्रतीक है, इसलिए इसका सम्मान किया जाना चाहिए।

संत समाज ने की सख्त कार्रवाई की मांग
प्रदर्शन के दौरान संत समाज के अन्य लोगों ने भी पप्पू यादव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई। संत पवन गिरी ने कहा कि ऐसे व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने पप्पू यादव की संसद सदस्यता समाप्त किए जाने की भी मांग की।
संत समाज के प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति सनातन धर्म या संत समाज के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने से पहले कानून और धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखे।
‘सांसद की सदस्यता रद्द होने तक जारी रहेगा विरोध’
संत समाज ने कहा कि वह अपने विरोध प्रदर्शन को आगे भी जारी रखेगा। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, जब तक पप्पू यादव की संसद सदस्यता रद्द नहीं की जाती, तब तक संत समाज अपना विरोध जारी रखेगा।
संत समाज के लोगों ने कहा कि उनका विरोध किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि कथित तौर पर सनातन धर्म और संत समाज के अपमान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी भी समुदाय या धार्मिक परंपरा को लेकर टिप्पणी करते समय जिम्मेदारी बरती जानी चाहिए।
संत समाज ने प्रशासन से भी कार्रवाई की मांग की
विरोध प्रदर्शन के दौरान संत समाज ने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले को गंभीरता से लिया जाए और यदि किसी बयान या टिप्पणी से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि भारत में सभी धर्मों और धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा धार्मिक प्रतीकों या परंपराओं का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल, शाहजहांपुर में संत समाज द्वारा किए गए इस विरोध प्रदर्शन के बाद मामला चर्चा में है। प्रदर्शनकारियों ने पप्पू यादव के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर करते हुए उनका पुतला फूंका और नारेबाजी की। संत समाज ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी मांगों को लेकर आगे भी आंदोलन जारी रखने की बात कह रहा है।
हालांकि, पप्पू यादव की ओर से संत समाज द्वारा लगाए गए आरोपों और विरोध प्रदर्शन को लेकर उनका पक्ष इस रिपोर्ट के समय तक सामने नहीं आया है। उनका पक्ष सामने आने के बाद खबर में उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।







Leave a Reply