उत्तराखंड में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी दो बड़ी खबरें एक साथ सामने आई हैं, जो राज्य में मेडिकल प्रवेश व्यवस्था की दो बिल्कुल अलग तस्वीरें पेश करती हैं। एक तरफ NEET-UG दाखिलों में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के कथित फर्जी प्रमाणपत्र मामले में तीसरी FIR दर्ज हुई है, तो दूसरी तरफ हरिद्वार में ESIC मेडिकल कॉलेज की स्थापना को मंजूरी मिलने से राज्य में MBBS की पढ़ाई के नए दरवाजे खुलने जा रहे हैं।

NEET फर्जी प्रमाणपत्र मामले में तीसरी FIR दर्ज
देहरादून के बसंत विहार थाने में एक छात्र के खिलाफ कथित तौर पर फर्जी स्थायी निवास प्रमाणपत्र और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र का इस्तेमाल करने के मामले में नई प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक प्रशासनिक सत्यापन के दौरान यह बात सामने आई कि प्रमाणपत्र में दर्ज पते पर संबंधित छात्र कभी रहा ही नहीं। इस विसंगति के उजागर होने के बाद राजस्व विभाग की शिकायत पर संबंधित छात्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस के अनुसार इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत कार्रवाई की गई है। गौरतलब है कि इससे पहले 18 सितंबर को भी रायपुर और क्लेमेंटटाउन थानों में इसी जांच से जुड़े दो अलग-अलग मामले दर्ज किए जा चुके थे, जिसके बाद अब यह तीसरी FIR सामने आई है।
19 संदिग्ध दाखिले भी जांच के घेरे में
इस पूरे प्रकरण के समानांतर मेडिकल कॉलेजों में NEET-UG दाखिलों के दस्तावेज सत्यापन के दौरान भी कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार हल्द्वानी, श्रीनगर और हरिद्वार के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में गहन जांच के बाद कुल 19 संदिग्ध दाखिले निरस्त कर दिए गए हैं।
इस पूरे मामले में अब जांच का दायरा केवल दाखिले तक सीमित न रहकर प्रमाणपत्रों के जारी होने की प्रक्रिया, उनके सत्यापन के तरीके और मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की पूरी व्यवस्था तक फैल गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह मामला किसी एक छात्र या कॉलेज तक सीमित नहीं बल्कि एक व्यापक नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

हरिद्वार में बनेगा उत्तराखंड का पहला ESIC मेडिकल कॉलेज
इन सभी नकारात्मक खबरों के बीच राज्य के लिए एक सकारात्मक खबर भी सामने आई है। हरिद्वार में उत्तराखंड का पहला ESIC (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) मेडिकल कॉलेज स्थापित करने को आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम के निर्णय के अनुसार इस कॉलेज की शुरुआत मौजूदा ESIC अस्पताल के बुनियादी ढांचे और वहां पहले से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके की जाएगी, जिससे निर्माण और स्थापना में लगने वाला समय और लागत दोनों कम होंगे।
नए कॉलेज में प्रत्येक बैच में 50 MBBS सीटें उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे राज्य के छात्रों को मेडिकल शिक्षा के अतिरिक्त अवसर मिल सकेंगे।
ESIC की बैठक में मिली थी सैद्धांतिक मंजूरी
जानकारी के मुताबिक ESIC की 30 जून 2026 को आयोजित हुई 198वीं बैठक में हरिद्वार में मेडिकल कॉलेज की स्थापना को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई थी। भारत सरकार की प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार इस कॉलेज को शैक्षणिक सत्र 2027-28 से शुरू करने की योजना बनाई गई है, और इसके लिए मौजूदा ESIC अस्पताल के बुनियादी ढांचे का ही उपयोग किया जाएगा।

मेडिकल शिक्षा के लिए बड़ा बदलाव, लेकिन जांच भी जारी
हरिद्वार में बनने वाले इस नए मेडिकल कॉलेज से राज्य में MBBS शिक्षा के अवसर बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। मौजूदा अस्पताल के संसाधनों का उपयोग होने से मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय स्थापित होने का भी लक्ष्य रखा गया है।
वहीं दूसरी ओर NEET दाखिला प्रकरण में लगातार सामने आ रही शिकायतें और दर्ज हो रही नई FIR यह स्पष्ट संकेत देती हैं कि मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर जांच अभी जारी रहेगी और आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर देखा जाए तो उत्तराखंड की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था इस समय दो अलग-अलग दिशाओं में आगे बढ़ रही है। एक तरफ राज्य को हरिद्वार में नया ESIC मेडिकल कॉलेज मिलने जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में सैकड़ों छात्रों के लिए MBBS शिक्षा का रास्ता खोलेगा। वहीं दूसरी तरफ NEET दाखिलों में फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए हुई धांधली की परतें लगातार खुल रही हैं, जिससे मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर प्रशासन सख्त कदम उठा रहा है। दोनों ही घटनाक्रम आने वाले समय में राज्य की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
(इस खबर में उल्लेखित विवरण पुलिस की जांच रिपोर्ट, राजस्व विभाग की शिकायत और PIB द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित हैं।)






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