Five elderly people from Jalaun held bags : ‘पढ़ाई की कोई उम्र नहीं’ : जालौन के पांच बुजुर्गों ने थामा बस्ता, बच्चों संग बैठकर करेंगे पढ़ाई

Five elderly people from Jalaun held bags : ‘पढ़ाई की कोई उम्र नहीं’ : जालौन के पांच बुजुर्गों ने थामा बस्ता, बच्चों संग बैठकर करेंगे पढ़ाई

जालौन जनपद के ग्राम छानी से एक बेहद प्रेरणादायक और भावुक तस्वीर सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि शिक्षा पाने की कोई उम्र नहीं होती। गांव के पांच बुजुर्गों ने अब स्कूल की चौखट पर कदम रखकर नई शुरुआत की है। बस्ता और स्कूल ड्रेस पहनकर ये बुजुर्ग प्राथमिक विद्यालय पहुंचे, जहां अब वे बच्चों के साथ बैठकर पढ़ाई करेंगे।

Five elderly people from Jalaun held bags : ‘पढ़ाई की कोई उम्र नहीं’ : जालौन के पांच बुजुर्गों ने थामा बस्ता, बच्चों संग बैठकर करेंगे पढ़ाई

एसडीएम रिंकू सिंह राही की अनूठी पहल बनी मिसाल

इस सराहनीय पहल की शुरुआत एसडीएम रिंकू सिंह राही ने की है। उनका उद्देश्य उन बुजुर्गों को शिक्षा से जोड़ना है, जो बचपन में आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण कभी स्कूल नहीं जा सके। एसडीएम की इस पहल के बाद गांव के वरिष्ठ नागरिकों में पढ़ने-लिखने को लेकर नया उत्साह देखने को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा हर व्यक्ति का अधिकार है और उम्र कभी भी सीखने की राह में बाधा नहीं बननी चाहिए।

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अब अंगूठा नहीं, खुद करेंगे हस्ताक्षर

स्कूल पहुंचे बुजुर्गों ने बताया कि अब वे केवल अंगूठा लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे अपना नाम लिखना, पढ़ना और हस्ताक्षर करना सीखना चाहते हैं। यही वजह है कि उन्होंने बच्चों के साथ बैठकर पढ़ाई करने का फैसला लिया।

बुजुर्गों के चेहरे पर सीखने की ललक और उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। गांव के लोग भी इस पहल की जमकर सराहना कर रहे हैं और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बता रहे हैं।

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बच्चों में भी दिखा खास उत्साह

इस पहल का सबसे खूबसूरत पहलू यह रहा कि स्कूल के बच्चों ने भी अपने ‘दादा-दादी’ के साथ पढ़ाई करने को लेकर खास उत्साह दिखाया। बच्चे बुजुर्गों की मदद करते नजर आए और पूरा स्कूल एक परिवार जैसा माहौल बन गया।

अब इस पाठशाला में सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि बुजुर्ग भी शिक्षा की नई रोशनी की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। गांव की यह अनूठी पहल समाज को यह संदेश दे रही है कि सीखने की चाह हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती।

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