जालौन, उत्तर प्रदेश। विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर जालौन के अकौड़ी दुबे स्थित अयोध्या प्रसाद विश्वकर्मा ITI में विशेष कार्यक्रम और धार्मिक माहौल देखने को मिला। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और विद्यार्थियों में संस्कारों के समन्वय को ध्यान में रखते हुए संस्थान में भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर संस्थान से जुड़े पदाधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भगवान विश्वकर्मा को नमन करते हुए तकनीकी ज्ञान और हुनर को लगातार बेहतर बनाने का संकल्प लिया।
भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, शिल्प, तकनीक और कारीगरी का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि तकनीकी शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों में विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व रहता है। अयोध्या प्रसाद विश्वकर्मा ITI में भी विश्वकर्मा पूजा के दौरान विद्यार्थियों को मेहनत, अनुशासन, तकनीकी ज्ञान और कौशल के महत्व के बारे में बताया गया।

विश्वकर्मा पूजा का तकनीकी शिक्षा में विशेष महत्व
विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि यह मेहनत, निर्माण, तकनीकी ज्ञान और हुनर के सम्मान का अवसर भी माना जाता है। ITI जैसे तकनीकी शिक्षण संस्थानों में इस पर्व का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है, क्योंकि यहां विद्यार्थी अपने हाथों और तकनीकी ज्ञान के माध्यम से भविष्य के रोजगार और स्वरोजगार की तैयारी करते हैं।
अयोध्या प्रसाद विश्वकर्मा ITI में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को अपने तकनीकी कौशल को लगातार विकसित करने और व्यावहारिक ज्ञान पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया गया। संस्थान से जुड़े लोगों ने कहा कि वर्तमान समय में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के पास व्यावहारिक कौशल और अपने ट्रेड की बारीकियों की समझ होना भी जरूरी है।
मेहनत और हुनर को सम्मान देने का अवसर
संस्थान के संरक्षक लल्लूराम विश्वकर्मा ने विश्वकर्मा पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व मेहनत, तकनीकी ज्ञान, हुनर और निर्माण की शक्ति को सम्मान देने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि तकनीकी संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए भगवान विश्वकर्मा की पूजा उन्हें अपने हुनर को लगातार निखारने की प्रेरणा देती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने हाथों से कुछ नया बनाने और तकनीकी क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहें।
लल्लूराम विश्वकर्मा ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए मेहनत और निरंतर सीखने की आदत महत्वपूर्ण होती है। विद्यार्थियों को अपने कौशल का विकास करते हुए भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करना चाहिए।

हुनर से भविष्य निर्माण की ओर बढ़ रहे विद्यार्थी
संस्थान के प्रबंधक डॉ. मयंक कुमार ने कहा कि अयोध्या प्रसाद विश्वकर्मा ITI में विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा देने के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ITI में विद्यार्थी विभिन्न ट्रेड के माध्यम से तकनीकी कार्यों की बुनियादी जानकारी हासिल करते हैं और उसे व्यवहार में लागू करने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने बताया कि Electrician और Fitter जैसे ट्रेड विद्यार्थियों को तकनीकी क्षेत्र की मूलभूत जानकारी और कार्यकुशलता विकसित करने में मदद करते हैं। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को उपकरणों और तकनीकी प्रक्रियाओं की जानकारी देने के साथ-साथ नियमित अभ्यास के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है।
प्रबंधक ने कहा कि आज के समय में तकनीकी कौशल रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार के अवसर भी उपलब्ध करा सकता है। ऐसे में विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपने हुनर पर भी लगातार काम करना चाहिए।
ट्रेड की बारीकियों को समझना जरूरी
संस्थान के उपप्रबंधक डॉ. प्रियंक ने विद्यार्थियों को अपने-अपने ट्रेड की बारीकियों को समझने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा में नियमित अभ्यास का विशेष महत्व है। विद्यार्थी जितना अधिक अभ्यास करेंगे, उतनी ही बेहतर तरीके से वे अपने कार्य को समझ पाएंगे।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि केवल परीक्षा पास करने के उद्देश्य से तकनीकी शिक्षा हासिल न करें, बल्कि अपने ट्रेड से जुड़े प्रत्येक कार्य को समझने और उसमें दक्षता हासिल करने का प्रयास करें।
डॉ. प्रियंक ने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में लगातार बदलाव हो रहे हैं। इसलिए विद्यार्थियों को भी नई तकनीकों और नई कार्यप्रणालियों के बारे में सीखते रहना चाहिए। इससे उन्हें भविष्य में रोजगार और व्यवसाय के क्षेत्र में बेहतर अवसर प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।

विद्यार्थियों को दिया आत्मविश्वास और लक्ष्य का संदेश
विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर विद्यार्थियों को आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की दिशा तय करने का संदेश दिया गया। संस्थान की ओर से कहा गया कि यदि किसी विद्यार्थी के हाथों में हुनर, मन में आत्मविश्वास और लक्ष्य स्पष्ट हो तो वह अपनी मेहनत के जरिए आगे बढ़ सकता है।
विद्यार्थियों को यह भी संदेश दिया गया कि सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। तकनीकी क्षेत्र में नई मशीनों, नई तकनीकों और नए तरीकों के आने के साथ लगातार अपने ज्ञान और कौशल को अपडेट करना जरूरी है।
“हाथों में हुनर हो, मन में आत्मविश्वास हो और लक्ष्य स्पष्ट हो—तो सफलता की राह मजबूत होती है।”
“सीखते रहिए, हुनर बढ़ाते रहिए और अपने भविष्य का निर्माण स्वयं कीजिए।”
तकनीकी शिक्षा के साथ संस्कार पर जोर
अयोध्या प्रसाद विश्वकर्मा ITI में विश्वकर्मा पूजा का आयोजन तकनीकी शिक्षा के साथ संस्कार और परंपरा को जोड़ने का अवसर भी बना। संस्थान की ओर से विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ अनुशासन, मेहनत, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना रहा कि किसी भी तकनीकी कार्य में सफलता के लिए केवल मशीन और उपकरणों की जानकारी ही पर्याप्त नहीं है। उसके साथ जिम्मेदारी, मेहनत, समय की पाबंदी और कार्य के प्रति समर्पण भी जरूरी है।

विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना
विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर संस्थान से जुड़े लोगों ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने हुनर को पहचानने और उसे रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसरों में बदलने के लिए प्रेरित किया गया।
अकौड़ी दुबे स्थित अयोध्या प्रसाद विश्वकर्मा ITI में आयोजित विश्वकर्मा पूजा ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के महत्व को भी सामने रखा। संस्थान की ओर से विद्यार्थियों को लगातार सीखते रहने, नियमित अभ्यास करने और अपने निर्धारित लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।







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