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गणपति विसर्जन को लेकर संत का बड़ा बयान, बोले- उत्तर भारत में विसर्जन शास्त्रीय परंपरा नहीं

गणपति विसर्जन को लेकर संत का बड़ा बयान, बोले- उत्तर भारत में विसर्जन शास्त्रीय परंपरा नहीं

मंगलौर के श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में गणेश चतुर्थी के अवसर पर धार्मिक आयोजन किया गया। मंदिर परिसर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ भगवान गणेश का गुणगान किया और गणेश चतुर्थी के महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरा मंदिर परिसर गणपति के जयकारों से भक्तिमय नजर आया।

इसी धार्मिक आयोजन के दौरान श्री श्री 1008 मैत्री यति गिरी जी महाराज, महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा ने गणपति उत्सव और प्रतिमा विसर्जन की परंपरा को लेकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर भारत में भगवान गणेश के स्वागत और उत्सव की परंपरा है, जबकि उनके अनुसार गणपति प्रतिमा का विसर्जन यहां की शास्त्रीय परंपरा नहीं है।

गणपति विसर्जन को लेकर संत का बड़ा बयान, बोले- उत्तर भारत में विसर्जन शास्त्रीय परंपरा नहीं

मंगलौर के सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में हुआ गणेश चतुर्थी आयोजन

गणेश चतुर्थी के अवसर पर श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा की। इसके बाद भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भगवान गणेश की आराधना की गई और श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की कामना की। धार्मिक आयोजन के चलते मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहा।

गणपति विसर्जन पर संत ने रखी अपनी बात

कार्यक्रम के दौरान महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 मैत्री यति गिरी जी महाराज ने गणपति विसर्जन को लेकर महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर भारत में गणपति भगवान के स्वागत और उत्सव की परंपरा रही है। उनके अनुसार यहां गणपति विसर्जन को शास्त्रीय परंपरा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

संत ने श्रद्धालुओं से भगवान गणेश के उत्सव को आस्था, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों में अपनी परंपराओं और मान्यताओं को समझना भी आवश्यक है।

गणपति विसर्जन को लेकर संत का बड़ा बयान, बोले- उत्तर भारत में विसर्जन शास्त्रीय परंपरा नहीं

गणेश चतुर्थी पर पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन

मंगलौर के श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में गणेश चतुर्थी के मौके पर श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। मंदिर में प्रतिमा स्थापना के बाद धार्मिक अनुष्ठान किए गए। भजन-कीर्तन के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश के भजनों का गुणगान किया।

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है और देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे विभिन्न स्थानीय परंपराओं के साथ मनाया जाता है। उपलब्ध पंचांग विवरणों में गणेश चतुर्थी के बाद अलग-अलग दिनों में गणेश विसर्जन की परंपराओं का भी उल्लेख मिलता है, जिसमें चतुर्थी के दिन से लेकर डेढ़ दिन, तीसरे, पांचवें, सातवें और अनंत चतुर्दशी के दिन तक विसर्जन के विकल्प बताए गए हैं।

उत्तर भारत की परंपरा को लेकर चर्चा

महामंडलेश्वर के बयान के बाद गणपति विसर्जन की परंपरा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उनका कहना है कि उत्तराखंड और उत्तर भारत में गणेश उत्सव के दौरान भगवान गणेश का स्वागत और पूजा-अर्चना प्रमुख रूप से की जाती रही है। उन्होंने इसी संदर्भ में विसर्जन की परंपरा को लेकर अपनी धार्मिक व्याख्या सामने रखी।

वहीं, देश के अन्य हिस्सों में गणेशोत्सव के समापन पर प्रतिमा विसर्जन लंबे समय से धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा रहा है। उपलब्ध धार्मिक कैलेंडर स्रोत भी उत्तराखंड के विभिन्न शहरों के लिए गणेश विसर्जन की तिथियां और मुहूर्त प्रकाशित करते हैं। इसलिए इस मामले में संत का बयान उनकी धार्मिक व्याख्या और मत के रूप में देखा जा रहा है।

गणपति विसर्जन को लेकर संत का बड़ा बयान, बोले- उत्तर भारत में विसर्जन शास्त्रीय परंपरा नहीं

श्रद्धालुओं ने भी लिया धार्मिक आयोजन में हिस्सा

कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के दौरान भगवान गणेश के जयकारे लगाए और धार्मिक आयोजन में अपनी सहभागिता निभाई।

श्रद्धालु मयंक शर्मा ने भी गणेश चतुर्थी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने भगवान गणेश की आराधना और धार्मिक आयोजन को श्रद्धा से जुड़ा अवसर बताया।

धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद

श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित गणेश चतुर्थी कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों के कारण मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्तिमय वातावरण बना रहा।

कार्यक्रम के अंत में संत और श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। वहीं, गणपति विसर्जन को लेकर महामंडलेश्वर के बयान ने धार्मिक परंपराओं और क्षेत्रीय मान्यताओं को लेकर एक नई चर्चा को जन्म दिया है।

फिलहाल संत की ओर से गणपति विसर्जन को लेकर दिया गया बयान उनके धार्मिक मत के रूप में सामने आया है। अलग-अलग क्षेत्रों में गणेशोत्सव और विसर्जन से जुड़ी परंपराएं अलग हो सकती हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए स्थानीय धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार आयोजन करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

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