जालौन के डकोर विकासखंड क्षेत्र में अत्यधिक बारिश के कारण फसलों को हुए भारी नुकसान के बाद किसानों का आक्रोश सामने आया है। बारिश से खेतों में खड़ी फसलों के खराब होने से परेशान किसानों ने मुआवजे की मांग को लेकर जालौन कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव करते हुए अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखा। किसानों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी जालौन समीर को सौंपा और जल्द से जल्द फसलों का सर्वे कराकर वास्तविक नुकसान का आकलन कराने की मांग की।
किसानों का कहना है कि लगातार हुई बारिश ने उनकी महीनों की मेहनत को बर्बाद कर दिया है। खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान होने के कारण किसान आर्थिक संकट में पहुंच गए हैं। ऐसे में किसानों की मांग है कि प्रशासन राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमों को गांव-गांव भेजकर फसल क्षति का सर्वे कराए और प्रभावित किसानों को शासन की ओर से नियमानुसार उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।

लगातार बारिश ने बढ़ाई किसानों की परेशानी
डकोर विकासखंड क्षेत्र में कई दिनों से हुई बारिश का असर कृषि कार्यों पर दिखाई दे रहा है। किसानों के मुताबिक खेतों में खड़ी फसलों को अत्यधिक बारिश के कारण नुकसान पहुंचा है। कई किसानों की फसलें खराब होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर किसानों ने पैसा खर्च किया था, लेकिन फसल खराब होने के बाद उनकी पूरी लागत डूबने का खतरा पैदा हो गया है।
किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के कारण हुए इस नुकसान की भरपाई उनके लिए अकेले करना मुश्किल है। फसल बर्बाद होने का असर आगामी कृषि सीजन पर भी पड़ सकता है। यदि समय रहते किसानों को राहत नहीं मिली तो उनके सामने परिवार के भरण-पोषण के साथ-साथ अगली फसल की तैयारी के लिए भी आर्थिक समस्या खड़ी हो सकती है।

कलेक्ट्रेट पहुंचकर किसानों ने जताया विरोध
फसल नुकसान से नाराज किसान बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व मंडल अध्यक्ष डकोर एवं करमेर निवासी पुष्पेंद्र राजपूत के नेतृत्व में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। किसानों ने प्रशासन से मांग की कि फसल नुकसान का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सर्वे कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कहा कि केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय अधिकारियों को मौके पर जाकर खेतों की स्थिति का जायजा लेना चाहिए। किसानों के मुताबिक गांव-गांव जाकर फसलों का भौतिक सत्यापन किए जाने से नुकसान का सही आकलन हो सकेगा और पात्र किसानों को राहत दिलाने में भी आसानी होगी।
इसके बाद किसानों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी जालौन समीर को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने बारिश से प्रभावित क्षेत्र में जल्द सर्वे कराए जाने और शासन से मुआवजा दिलाए जाने की मांग की।

इन गांवों में फसल नुकसान का दावा
किसानों की ओर से दिए गए ज्ञापन में डकोर विकासखंड के कई गांवों और ग्राम पंचायतों को बारिश से प्रभावित बताया गया है। इनमें मिनौरा, करमेर, अजनारा, लैहकूपुरवार, रिरूआ, बरदर, बम्हौरीकला, कुइया, कुठौंदा, धरगुवां, धमनी, ऐर, टीकर, करूई, रामनगर, गोरा, खरका, ददरी, कुरौना, मुहम्मदाबाद, बन्धौली, कुसमिलिया, बरसार, जैसारी कला, गोरन, अटरिया, रगौली, औंता और जलालपुर समेत डकोर विकासखंड के कई गांव शामिल हैं।
किसानों का कहना है कि इन क्षेत्रों में बारिश के कारण कृषि भूमि और फसलों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित सभी गांवों में सर्वे टीम भेजी जाए और किसी भी किसान को सर्वे से बाहर न रखा जाए।
राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम से सर्वे की मांग
किसानों ने विशेष रूप से राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमों से सर्वे कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि फसल क्षति का आकलन विशेषज्ञ अधिकारियों की मौजूदगी में किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक नुकसान दर्ज हो सके।
किसानों ने यह भी मांग की है कि सर्वे के दौरान खेतों का मौके पर निरीक्षण किया जाए और नुकसान के आधार पर पात्र किसानों की सूची तैयार की जाए। इससे मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और प्रभावित किसानों को उनका अधिकार मिल सकेगा।
मुआवजा नहीं मिला तो बढ़ेगा आर्थिक संकट
किसानों के मुताबिक फसल खराब होने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति पहले से ज्यादा कमजोर हो गई है। किसानों की आमदनी मुख्य रूप से खेती पर निर्भर रहती है। ऐसे में फसल खराब होने का सीधा असर उनके परिवार की आर्थिक व्यवस्था पर पड़ता है।
किसानों ने प्रशासन से अपील की है कि फसल नुकसान को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द सर्वे की प्रक्रिया पूरी कराई जाए और शासन को रिपोर्ट भेजकर प्रभावित किसानों के लिए राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय पर मुआवजा नहीं मिला तो उन्हें कर्ज और घरेलू खर्चों से जुड़ी अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

किसानों को अब प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के बाद किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांग प्रशासन तक पहुंचा दी है। अब किसानों की नजर प्रशासन द्वारा कराए जाने वाले फसल क्षति सर्वे पर है। किसानों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन जल्द ही संबंधित विभागों की टीमों को प्रभावित गांवों में भेजेगा और नुकसान का आकलन कराएगा।
किसानों ने साफ किया कि उनकी मांग किसी राजनीतिक विवाद से जुड़ी नहीं, बल्कि बारिश से हुए कृषि नुकसान के बाद राहत और मुआवजे से संबंधित है। किसानों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत से फसल तैयार की थी, लेकिन प्राकृतिक आपदा के कारण फसल खराब हो गई। इसलिए शासन और प्रशासन को किसानों की स्थिति को देखते हुए जल्द राहत उपलब्ध करानी चाहिए।
फिलहाल, जालौन के डकोर क्षेत्र में बारिश से फसल नुकसान और किसानों के मुआवजे की मांग का मामला प्रशासन के सामने पहुंच चुका है। किसानों ने सर्वे और उचित मुआवजे की मांग को लेकर ज्ञापन सौंप दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन की ओर से फसल क्षति का सर्वे कब शुरू होता है और प्रभावित किसानों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
किसानों की मुख्य मांगें
- बारिश से प्रभावित फसलों का तत्काल सर्वे कराया जाए।
- राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम गांव-गांव भेजी जाए।
- प्रत्येक प्रभावित किसान की फसल क्षति दर्ज की जाए।
- वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा दिया जाए।
- किसी भी पात्र किसान को राहत से वंचित न रखा जाए।
- सर्वे के बाद जल्द शासन को रिपोर्ट भेजी जाए।
- प्रभावित किसानों को समयबद्ध तरीके से राहत उपलब्ध कराई जाए।






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