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Questions raised on the government of the people, the door camp of the people : बाजपुर: ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ शिविर फेल, अधिकारियों की गैरमौजूदगी से नाराज दिखे लोग

Questions raised on the government of the people, the door camp of the people : बाजपुर: ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ शिविर फेल, अधिकारियों की गैरमौजूदगी से नाराज दिखे लोग

बाजपुर में सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” के तहत आयोजित जनसमस्या समाधान शिविर लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। सरकार का दावा था कि शिविर में जनता की शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया जाएगा, लेकिन कई विभागों के अधिकारी शिविर से नदारद रहे। दूर-दराज़ से अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा, लेकिन अधिकांश मामलों में उन्हें केवल आश्वासन देकर वापस भेज दिया गया। इससे लोगों में नाराजगी और प्रशासन के प्रति असंतोष देखने को मिला।

Questions raised on the government of the people, the door camp of the people : बाजपुर: 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' शिविर फेल, अधिकारियों की गैरमौजूदगी से नाराज दिखे लोग

कई विभागों के अधिकारी नहीं पहुंचे शिविर

शिविर में पहुंचे लोगों का कहना है कि वे अपनी शिकायतों के समाधान की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन संबंधित विभागों के कई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद ही नहीं थे। जिन विभागों के अधिकारी पहुंचे भी, वे अधिकांश शिकायतों का तत्काल निस्तारण करने में असमर्थ दिखाई दिए। कई मामलों में शिकायतें दर्ज कर आगे कार्रवाई का भरोसा दिया गया, जिससे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा।

लोगों ने लगाया खानापूर्ति का आरोप

शिविर में मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि पूरा आयोजन केवल औपचारिकता बनकर रह गया। उनका कहना है कि शिकायतें तो सुनी गईं, लेकिन उनका समाधान नहीं किया गया। लोगों का सवाल है कि जब संबंधित विभागों के अधिकारी ही शिविर में मौजूद नहीं थे, तो ऐसे शिविर आयोजित करने का उद्देश्य क्या है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की मंशा भले ही जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की हो, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।

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सरकारी दावों पर खड़े हुए सवाल

इस पूरे मामले के बाद सरकार की जनसमस्या समाधान व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। सरकार लगातार दावा कर रही है कि जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा रहा है, लेकिन बाजपुर का यह शिविर इन दावों के विपरीत नजर आया। लोगों का कहना है कि यदि भविष्य में भी इसी तरह अधिकारी अनुपस्थित रहे और शिकायतों का समाधान नहीं हुआ, तो ऐसे शिविरों की उपयोगिता पर सवाल उठते रहेंगे।

जिम्मेदारी तय करने की उठी मांग

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि शिविर से अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में आयोजित होने वाले शिविरों में सभी संबंधित विभागों के अधिकारी अनिवार्य रूप से मौजूद रहें। उनका कहना है कि तभी सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंच सकेगा।

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