मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल; मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष आमने-सामने
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026। राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई और मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल खड़े किए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड पार कर पहुंचे CJP के करीब 20 कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद प्रदर्शन स्थल को लेकर पुलिस की व्यवस्था और SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।

जंतर-मंतर पर नारेबाजी, करीब 20 कार्यकर्ता हिरासत में
समाचार एजेंसी रॉयटर्स और अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, CJP के नेताओं अशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे सहित करीब 20 कार्यकर्ता मंगलवार को जंतर-मंतर पहुंचे थे। बताया गया कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार कर वहां प्रवेश किया और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से जुड़ी है। उनका आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। प्रदर्शनकारी इस प्रक्रिया पर जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
इस घटनाक्रम के बीच प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों का मुद्दा भी सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने की घोषणा की है। इसके बजाय रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान सहित तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए गए हैं।
ऐसे में जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के पहुंचने और हिरासत में लिए जाने की घटना ने विरोध प्रदर्शन की अनुमति और निर्धारित स्थानों से जुड़े नियमों पर बहस बढ़ा दी है। किसी भी प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक निर्देशों का पालन और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जुड़े पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन स्थल से संबंधित व्यवस्था का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नाम हटाने पर सवाल
प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की समीक्षा की जाती है, ताकि मतदाताओं के विवरण का सत्यापन किया जा सके और मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से अपात्र हो चुके मतदाताओं के नामों की पहचान की जा सके।
विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से सूची से बाहर हो जाता है, तो उसे मतदान के अधिकार से वंचित होने का खतरा हो सकता है। इसी कारण वे प्रक्रिया की पारदर्शिता, नाम हटाने के आधार और शिकायतों के निपटारे को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
कुछ रिपोर्टों में पुनरीक्षण के दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का आंकड़ा बताया गया है। हालांकि, इस आंकड़े का भौगोलिक दायरा, संबंधित अवधि और आधिकारिक रिकॉर्ड से मिलान स्पष्ट होना जरूरी है। इसलिए इसे अंतिम और निर्विवाद आंकड़े के रूप में प्रस्तुत करने से पहले चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि आवश्यक है।
चुनाव आयोग ने आरोपों से किया इनकार
मतदाता सूची में बदलाव के जरिए किसी राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने के आरोपों से चुनाव आयोग ने इनकार किया है। आयोग के मुताबिक, मतदाता सूची को निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत अद्यतन किया जाता है। जिन पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल नहीं हैं या गलती से हट गए हैं, वे नियमानुसार नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने भी विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। इस तरह SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। एक ओर प्रदर्शनकारी मतदाता सूची में नाम हटाए जाने को लेकर जवाब मांग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग प्रक्रिया का बचाव कर रहा है।

मतदाता सूची की पारदर्शिता और मतदान का अधिकार अहम मुद्दा
मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें पात्र मतदाताओं के नाम शामिल होना और गलत प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया निष्पक्ष तथा पारदर्शी तरीके से पूरी होना जरूरी है। यदि किसी योग्य मतदाता का नाम सूची से हट जाता है, तो उसके पास शिकायत दर्ज कराने और नाम दोबारा शामिल कराने का स्पष्ट रास्ता होना भी महत्वपूर्ण है।
SIR को लेकर चल रहे विवाद में मुख्य सवाल यह है कि मतदाता सूची में बदलाव किस आधार पर किए जा रहे हैं, लोगों को इसकी जानकारी कैसे दी जा रही है और नाम हटाए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया कितनी सुलभ है। इन सवालों पर आधिकारिक आंकड़ों और संबंधित नियमों के आधार पर स्पष्ट जानकारी सामने आने से विवाद के विभिन्न पहलुओं को समझने में मदद मिल सकती है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। CJP के प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े सवालों पर जवाबदेही तय की जाए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने प्रक्रिया का बचाव करते हुए पात्र मतदाताओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने का विकल्प बताया है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियों के साथ प्रशासनिक और कानूनी घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण रहेंगे। फिलहाल प्रदर्शनकारियों के आरोपों, चुनाव आयोग के पक्ष और मतदाता सूची से संबंधित आधिकारिक आंकड़ों को अलग-अलग समझना जरूरी है, ताकि मतदान के अधिकार और पुनरीक्षण प्रक्रिया पर चर्चा तथ्यों के आधार पर हो सके।






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