नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन पर सवाल, ECI को लेकर कांग्रेस ने उठाए मुद्दे; Gen-Z को लेकर भी गरमाई सियासत

नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन पर सवाल, ECI को लेकर कांग्रेस ने उठाए मुद्दे; Gen-Z को लेकर भी गरमाई सियासत

नई दिल्ली। नए मतदाताओं के पंजीकरण और मतदाता सूची के नियमित पुनरीक्षण को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले युवाओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने की प्रक्रिया और Special Summary Revision (SSR) को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि पिछले कुछ समय से मतदाता सूचियों के नियमित पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और इसका असर नए मतदाताओं के पंजीकरण पर पड़ सकता है। पार्टी ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं, जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है, लेकिन उनके नाम मतदाता सूची में जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर सवाल बने हुए हैं।

नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन पर सवाल, ECI को लेकर कांग्रेस ने उठाए मुद्दे; Gen-Z को लेकर भी गरमाई सियासत

क्या है वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण की प्रक्रिया?

मतदाता सूची को समय-समय पर अपडेट किया जाता है। इसका उद्देश्य पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल करना, मृत या स्थान बदल चुके मतदाताओं से जुड़े रिकॉर्ड को अपडेट करना और मतदाता सूची में जरूरी सुधार करना होता है।

18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र नागरिक मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए चुनाव आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया जाता है। नए मतदाताओं के लिए यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदान करने के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज होना जरूरी है।

SSR को लेकर क्यों उठा विवाद?

Special Summary Revision यानी SSR मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया का हिस्सा है। इसी प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने और मौजूदा रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार किए जाते हैं।

हालिया विवाद में सवाल यह उठाया गया है कि नियमित पुनरीक्षण की प्रक्रिया किस तरह और कब कराई जा रही है। कांग्रेस ने इसी मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।

विपक्ष का कहना है कि नए मतदाताओं को समय पर मतदाता सूची में शामिल किया जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में देरी होने से पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि सरकार युवाओं के बीच अपनी स्थिति को लेकर चिंतित है और इसी वजह से नए युवा मतदाताओं से जुड़े मुद्दे सामने आ रहे हैं।

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी राजनीतिक आरोप लगाए हैं। पार्टी की ओर से कहा गया कि Gen-Z यानी युवा मतदाता वर्ग आने वाले वर्षों में चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और सरकार इस वर्ग को लेकर चिंतित है।

हालांकि, सरकार और चुनाव आयोग की ओर से इन राजनीतिक आरोपों को लेकर अलग पक्ष रखा गया है। ऐसे में कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

Gen-Z वोटर्स पर क्यों है इतना जोर?

18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले युवा जब पहली बार मतदान करते हैं तो उनके लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज होना बेहद महत्वपूर्ण होता है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में युवा वर्ग राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखता है।

इसी वजह से नए मतदाताओं के पंजीकरण को लेकर राजनीतिक दल भी लगातार अपनी बात रखते रहे हैं। कांग्रेस ने मौजूदा विवाद को युवाओं के मताधिकार से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं।

पार्टी का कहना है कि जिन युवाओं ने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है, उन्हें समय पर मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि वे चुनाव के दौरान अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें।

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उत्तर प्रदेश और गोवा का भी किया गया जिक्र

कांग्रेस ने अपने आरोपों के दौरान उन राज्यों का भी जिक्र किया है जहां आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी का कहना है कि ऐसे राज्यों में नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को लेकर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

कांग्रेस ने दावा किया है कि यदि पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के नाम समय पर मतदाता सूची में शामिल नहीं होते हैं तो इसका असर उनके मतदान के अधिकार पर पड़ सकता है।

हालांकि, किसी भी राज्य में किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल हुआ है या नहीं, इसकी वास्तविक स्थिति संबंधित मतदाता द्वारा आधिकारिक मतदाता सूची में अपना नाम जांचने के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

SIR और SSR को लेकर भी चर्चा

इस पूरे विवाद में SIR यानी Special Intensive Revision और SSR यानी Special Summary Revision दोनों शब्द लगातार चर्चा में हैं।

SSR के तहत मतदाता सूची को नियमित रूप से अपडेट करने और नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया की जाती है। वहीं SIR व्यापक स्तर पर मतदाता सूची के सत्यापन और पुनरीक्षण से जुड़ी प्रक्रिया है।

दोनों प्रक्रियाओं को लेकर राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। इसलिए मतदाता सूची से संबंधित किसी भी दावे को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि बात SSR की हो रही है या SIR की।

नए मतदाताओं के लिए क्या जरूरी है?

18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके पात्र युवाओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज है या नहीं। यदि नाम दर्ज नहीं है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत नए मतदाता के रूप में आवेदन किया जा सकता है।

पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए यह विशेष रूप से जरूरी है कि वे चुनाव से पहले अपने नाम की स्थिति जांच लें, ताकि मतदान के समय किसी तरह की परेशानी न हो।

फिलहाल नए मतदाताओं के पंजीकरण और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। कांग्रेस ने जहां सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं, वहीं पूरे मामले में मतदाता सूची और पंजीकरण की आधिकारिक प्रक्रिया की स्थिति को देखना महत्वपूर्ण होगा।

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