नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को इंडिया गठबंधन की ओर से आयोजित मॉक संसद में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पद से हटाने संबंधी महाभियोग प्रस्ताव पेश किया। इस दौरान उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर छह गंभीर आरोप लगाए और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।
मॉक संसद में खरगे ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने संसद की अनुमति के बिना फॉर्म-6 में बदलाव किए। उन्होंने इसे कानून के खिलाफ बताते हुए चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। इसके अलावा उन्होंने वोट चोरी और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का आरोप भी लगाया।

SIR के जरिए 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन में दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया के माध्यम से कथित तौर पर 13.2 करोड़ मतदाताओं को वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए।
खरगे ने कहा कि चुनाव में वोट चोरी और मतदाता सूची में बदलाव जैसे मुद्दों को गंभीरता से देखने की जरूरत है। उनके मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना चुनाव आयोग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
ज्ञानेश कुमार को मिली कानूनी सुरक्षा पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने दिसंबर 2023 में मुख्य चुनाव आयुक्त को दी गई कानूनी सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने ज्ञानेश कुमार को आजीवन कानूनी सुरक्षा देकर उन्हें कथित गलत कार्यों के लिए जवाबदेही से बचाने का रास्ता तैयार किया।
खरगे ने अपने संबोधन में कहा कि इस कानूनी सुरक्षा के पीछे क्या उद्देश्य था, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल पद से हटाने की मांग करते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात भी कही।

संविधान के तहत कार्रवाई की मांग
मॉक संसद में खरगे ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग की निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच सवाल खड़े हो रहे हैं। उनके अनुसार, इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संविधान और कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इंडिया गठबंधन के सांसदों और 31 अक्टूबर को नई दिल्ली में जुटे नागरिकों ने इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाने का संकल्प लिया है। खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ देशद्रोह के मुकदमे की मांग भी रखी।
राजनीतिक बहस के केंद्र में चुनाव आयोग
मॉक संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगाए गए आरोपों के बाद चुनाव आयोग की भूमिका, SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। हालांकि, मॉक संसद में पेश किया गया यह प्रस्ताव प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्रवाई है। इसे संसद में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पेश किए गए वास्तविक महाभियोग या पद से हटाने के प्रस्ताव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की एक निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया है। ऐसे में खरगे की ओर से लगाए गए आरोप और की गई मांगें राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।






Leave a Reply