गाजियाबाद। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। पैन कार्ड मामले में जमानत मिलने के बाद रामपुर जेल से रिहा हुए आजम खान को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जेल के बाहर से ही गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आज उन्हें गाजियाबाद स्थित विशेष प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) कोर्ट में पेश किया गया। बताया जा रहा है कि ED ने मामले में आगे की पूछताछ के लिए उनकी कस्टडी की मांग की है। वहीं, कोर्ट की कार्रवाई के बाद उन्हें डासना जेल भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है।
दरअसल, आजम खान को पैन कार्ड से जुड़े मामले में जमानत मिलने के बाद रामपुर जेल से रिहा किया गया था। लेकिन उनकी रिहाई ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। जेल से बाहर आने के करीब 15 मिनट के भीतर ही ED की टीम ने उन्हें जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया। इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। वहीं, आजम खान की गिरफ्तारी को लेकर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी सवाल खड़े किए हैं।

गिरफ्तारी पर छलका आजम खान का दर्द
ED की गिरफ्तारी के दौरान जब मीडिया ने आजम खान से बातचीत करने की कोशिश की और उनसे पूछा कि क्या वह इस पूरे मामले पर कुछ कहना चाहेंगे, तो उनका दर्द और नाराजगी सामने आ गई। उन्होंने निराशा भरे अंदाज में कहा कि अब बोलने के लिए बचा ही क्या है और वह आखिर क्या कह सकते हैं।
आजम खान ने अपनी गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या उन्हें मुसलमान होने की सजा मिल रही है? उनका कहना था कि उन्होंने बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल और विश्वविद्यालय बनाए, लेकिन अब उसी काम को गुनाह की तरह देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम व्यक्ति ने विश्वविद्यालय बनाया और शायद यही उनकी गलती बन गई।
आजम खान के इस बयान के बाद मामला केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी तेज हो गई है। उनके समर्थकों का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को लेकर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है, जबकि जांच एजेंसी की कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच से जुड़ी है।
अखिलेश यादव ने ED की कार्रवाई पर उठाए सवाल
आजम खान की गिरफ्तारी पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए भाजपा सरकार और जांच एजेंसी पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया।
अखिलेश यादव का कहना है कि जौहर यूनिवर्सिटी की करोड़ों रुपये की संपत्तियां पहले ही ED द्वारा अटैच की जा चुकी हैं। ऐसे में आजम खान की गिरफ्तारी के पीछे जांच एजेंसी का उद्देश्य क्या है? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ED स्वतंत्र रूप से काम कर रही है या फिर भाजपा सरकार के इशारे पर कार्रवाई कर रही है।
सपा अध्यक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक कार्रवाई बताते हुए कहा कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को परेशान करने के लिए नहीं होना चाहिए। हालांकि, इन आरोपों पर भाजपा और ED का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण रहेगा।

आजम खान के वकील ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
आजम खान की गिरफ्तारी को लेकर उनके वकील नासिर सुल्तान ने भी सरकार और जांच एजेंसी की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आजम खान को काफी कानूनी संघर्ष के बाद जेल से रिहा कराया गया था, लेकिन जेल से बाहर निकलते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
वकील के मुताबिक, गिरफ्तारी के दौरान परिवार और कानूनी पक्ष को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि आजम खान को कहां ले जाया जा रहा है और किस एजेंसी की टीम उन्हें अपने साथ ले गई है, इसकी जानकारी भी स्पष्ट रूप से नहीं दी गई।
नासिर सुल्तान ने इस कार्रवाई को सरकार के तानाशाही रवैये का उदाहरण बताते हुए कहा कि तीन दिनों की कानूनी मेहनत और संघर्ष के बाद आजम खान की रिहाई संभव हो पाई थी, लेकिन जेल से बाहर आते ही उन्हें दोबारा हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर आजम खान से सरकार को किस तरह का खतरा महसूस हो रहा है?
2027 चुनाव से पहले गिरफ्तारी पर तेज हुई सियासत
आजम खान की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। ऐसे में इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी बढ़ने की संभावना है।
आजम खान के वकील ने आरोप लगाया कि आगामी चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दबाव में यह कार्रवाई की जा रही है। उनका दावा है कि सत्ता पक्ष को आजम खान की राजनीतिक सक्रियता से परेशानी हो सकती है और यही वजह है कि उन्हें जेल से बाहर नहीं आने दिया जा रहा।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ED की कार्रवाई जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का हिस्सा है।
फिलहाल आजम खान को गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत में पेश किए जाने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं। एक तरफ ED की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है, तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है। अब देखना होगा कि अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है और आजम खान को आगे कितने दिनों तक जांच एजेंसी की हिरासत या न्यायिक हिरासत में रहना पड़ता है।







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