खटीमा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को खटीमा में आयोजित थारू जनजाति संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने थारू समाज के लोगों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं, सुझावों और अपेक्षाओं को सुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संवाद महज एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि सरकार और थारू समाज के बीच विश्वास और विकास की साझेदारी को और मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बीएसएफ के एवरेस्ट विजेता मोहन सिंह राणा और आईटीबीपी की एवरेस्ट विजेता टीला सेन को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन पर्वतारोहियों ने अपनी उपलब्धियों से न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने युवाओं से ऐसे प्रेरणादायी व्यक्तित्वों से सीख लेकर अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

धर्मांतरण और नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में धर्मांतरण की रोकथाम के लिए सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार धर्मांतरण कराने वालों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई कर रही है।
नशे की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर नशे के खिलाफ अभियान चला रही हैं। उन्होंने कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित नहीं करता, बल्कि इससे पूरा परिवार बर्बाद हो सकता है। इसलिए नशे के खिलाफ लड़ाई में समाज और प्रशासन को मिलकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने में अपनी भूमिका निभाने की अपील की।
थारू समाज के साथ वर्षों पुराना आत्मीय संबंध: सीएम धामी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका थारू समाज से जुड़ाव आज का नहीं, बल्कि वर्षों पुराना है। खटीमा से उनका आत्मीय संबंध हमेशा बना रहेगा। उन्होंने कहा कि वह थारू समाज के बीच उनकी समस्याओं को सुनने, सुझाव जानने और उनकी अपेक्षाओं को समझने के लिए आए हैं, ताकि सरकार की योजनाओं को और अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका वास्तविक लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे। जनजातीय समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बेहतर आधारभूत सुविधाओं से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है।
जनजातीय समाज के सशक्तिकरण पर सरकार का विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आजादी के बाद पहली बार जनजातीय समाज के सशक्तिकरण के लिए बड़े स्तर पर कार्य किए गए हैं। उन्होंने कहा कि देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जनजातीय समाज से होना इस बदलाव का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन की सरकार जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि जनजातीय समुदाय के परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिले और वे विकास की मुख्यधारा से मजबूती से जुड़ सकें।
आवास योजनाओं से जनजातीय परिवारों को मिल रहा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। अटल आवास योजना में आय सीमा को व्यावहारिक बनाया गया है और घर निर्माण की लागत में भी बढ़ोतरी की गई है, ताकि अधिक से अधिक पात्र परिवारों को इसका लाभ मिल सके।
उन्होंने बताया कि ऊधम सिंह नगर जिले में इस योजना के तहत लगभग 3 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के माध्यम से भी बड़ी संख्या में जनजातीय परिवार लाभान्वित हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत जिले में पहले चरण में 824 और दूसरे चरण में 101 घरों का निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि जनजातीय समुदाय के प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को सुरक्षित और पक्का आवास उपलब्ध कराया जा सके।
शिक्षा के क्षेत्र में भी किए जा रहे हैं कई महत्वपूर्ण कार्य
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जनजातीय समाज के बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। जनजाति कल्याण विभाग के माध्यम से आश्रम पद्धति विद्यालयों, छात्रावासों और आईटीआई संस्थानों के विकास के लिए करोड़ों रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है।
उन्होंने कहा कि आश्रम पद्धति विद्यालयों को कक्षा 12 तक अपग्रेड करने का कार्य भी गतिमान है। इसके अलावा एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय बच्चों को बेहतर शिक्षा और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि खटीमा में बालिका छात्रावास के लिए 4 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं बाजपुर में 16 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विद्यालय और छात्रावास का निर्माण कराया जा रहा है। गदरपुर में भी 100 बेड के बालक छात्रावास का निर्माण किया जा रहा है।

थारू इंटर कॉलेज में विकास कार्य जारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि थारू राजकीय इंटर कॉलेज में 2 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से खेल मैदान के सौंदर्यीकरण, ऑडिटोरियम के आधुनिकीकरण और भवन की मरम्मत का कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ खेल और अन्य गतिविधियों के लिए भी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी प्रतिभा को बेहतर तरीके से विकसित कर सकें।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनजातीय समाज की माताओं और बहनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इसके साथ ही वन धन केंद्रों के माध्यम से जनजातीय समुदाय द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पादों को बाजार से जोड़ने का काम किया जा रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ाने और महिलाओं की आय में वृद्धि करने में मदद मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज की महिलाओं को 1 करोड़ रुपये से अधिक की चक्रीय निधि और 8 करोड़ रुपये से अधिक की निवेश सहायता उपलब्ध कराई गई है, जिससे उनके छोटे-छोटे रोजगार और व्यवसायों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सके।
पेयजल, बिजली और गैस जैसी सुविधाओं पर भी सरकार का ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत और जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत वर्ष 2020 से 2025 तक 10 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न योजनाएं पूरी की गई हैं।
उन्होंने कहा कि हजारों परिवारों को पेयजल, बिजली और गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा विधानसभा सितारगंज में थारू विकास भवन का निर्माण भी किया जा रहा है, जिससे समाज के लोगों को अपनी गतिविधियों के संचालन के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए 2 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि स्वीकृत की गई है। जनजातीय परिवारों को बेटी की शादी के लिए 50 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

चार जिलों में अलग-अलग जनजाति कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के विकास को और अधिक गति देने के लिए ऊधम सिंह नगर, देहरादून, पिथौरागढ़ और चमोली में अलग-अलग जनजाति कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केवल योजनाओं की घोषणा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि योजनाओं को धरातल पर उतारकर वास्तविक बदलाव लाने की दिशा में काम कर रही है। सरकार की कोशिश है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और जनजातीय समाज के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
जनजातीय गौरव दिवस से समाज को मिली राष्ट्रीय पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय समाज के गौरव को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य शुरू किए। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया, जिससे देशभर में जनजातीय समाज के साहस, संघर्ष और बलिदान की गाथा को नई पहचान मिली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार का संकल्प है कि थारू समाज का प्रत्येक परिवार विकास की मुख्यधारा से जुड़े, हर युवा आत्मनिर्भर बने और हर बेटी शिक्षित एवं सशक्त बने। उन्होंने कहा कि थारू समाज की हर समस्या, हर सुझाव और हर अपेक्षा सरकार की प्राथमिकता है। राज्य सरकार समाज के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ आगे भी काम करती रहेगी।
थारू समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार
संवाद कार्यक्रम के दौरान थारू समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधियों ने कहा कि मुख्यमंत्री हमेशा समाज के सुख-दुख से जुड़े रहे हैं। उन्होंने थारू संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों को महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बताया।
कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा, अध्यक्ष थारू राणा परिषद दान सिंह राणा, सांसद प्रतिनिधि रविंद्र राणा, वरिष्ठ समाजसेवी रमेश राणा, ग्राम प्रधान संघ अध्यक्ष मंजीत सिंह राणा, सभासद दौलत राणा, ग्राम प्रधान शोभा देवी, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और समाज के लोग मौजूद रहे।







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