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Allegations of harassment of common people in the name of ceiling land : सीलिंग भूमि के नाम पर आमजन के उत्पीड़न का आरोप, जन संघर्ष मोर्चा ने विकासनगर तहसील में किया प्रदर्शन

Allegations of harassment of common people in the name of ceiling land : सीलिंग भूमि के नाम पर आमजन के उत्पीड़न का आरोप, जन संघर्ष मोर्चा ने विकासनगर तहसील में किया प्रदर्शन

विकासनगर: सीलिंग भूमि के नाम पर आम लोगों को कथित तौर पर परेशान किए जाने का आरोप लगाते हुए जन संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने विकासनगर तहसील में प्रदर्शन किया। मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने तहसील का घेराव करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा गया।

सीलिंग भूमि के नाम पर उत्पीड़न का आरोप

जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने आरोप लगाया कि देहरादून जिले के कई क्षेत्रों में चाय बागान और सीलिंग भूमि के नाम पर भवन स्वामियों और काश्तकारों को प्रशासन की ओर से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एनफील्ड ग्रांट, जमनीपुर, एटनबाग, ईस्ट होप टाउन, बदामावाला, अंबाड़ी, रायपुर, जीवनगढ़, कंडोली, कांवली, हरबंसवाला, मोहकमपुर खुर्द, बंजारावाला माफी, आर्केडिया ग्रांट, मलूकावाला, मिट्ठी बेरी, लाडपुर और नत्थनपुर समेत कई क्षेत्रों में लोग इस समस्या से प्रभावित बताए जा रहे हैं।

नेगी का कहना है कि प्रशासन को किसी भी जमीन को सीलिंग की श्रेणी में रखने से पहले उसके स्वामित्व, खरीद के वर्ष और दस्तावेजों की पूरी जांच करनी चाहिए। उनका आरोप है कि बिना पर्याप्त पड़ताल के कई लोगों को परेशान किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

जन संघर्ष मोर्चा ने अपने ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सिविल अपील संख्या 2697/1984 में 24 अक्टूबर 1996 को दिए गए आदेश के अनुसार 10 अक्टूबर 1975 से पहले खरीदी गई जमीनों के संबंध में उत्तर प्रदेश सीलिंग एक्ट की धारा 6(3) के प्रावधान लागू नहीं होने की बात कही गई थी।

मोर्चा का आरोप है कि इसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से वर्ष 2023 में जारी निर्देशों के चलते संबंधित भूमि के खरीद-फरोख्त और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पर रोक लगाने जैसी कार्रवाई की गई। संगठन का कहना है कि इसका असर ऐसे लोगों पर भी पड़ रहा है, जिनकी जमीनें कथित तौर पर सीलिंग कानून के दायरे में नहीं आती हैं।

Allegations of harassment of common people in the name of ceiling land : सीलिंग भूमि के नाम पर आमजन के उत्पीड़न का आरोप, जन संघर्ष मोर्चा ने विकासनगर तहसील में किया प्रदर्शन

दस्तावेजों की जांच के बाद हो कार्रवाई

रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि यदि किसी जमीन की वास्तविक स्थिति सीलिंग कानून के दायरे में आती है तो प्रशासन को कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन किसी व्यक्ति की जमीन सीलिंग के दायरे में आती है या नहीं, यह तय करने से पहले संबंधित जमीन के पुराने बैनामे, रजिस्ट्री, खरीद की तारीख और स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों की जांच जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी मूल भूस्वामी ने 10 अक्टूबर 1975 से पहले जमीन बेच दी थी और बाद में उस जमीन की खरीद-बिक्री हुई, तो प्रत्येक मामले की अलग-अलग कानूनी स्थिति की जांच की जानी चाहिए। उनका आरोप है कि दस्तावेजों की पर्याप्त जांच किए बिना सभी मामलों को एक ही नजर से देखना आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।

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अधिवक्ताओं और सरकार को भी नुकसान का दावा

जन संघर्ष मोर्चा ने यह भी आरोप लगाया कि सीलिंग भूमि के मामले में स्पष्टता नहीं होने से आम लोगों के साथ-साथ अधिवक्ताओं को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन का दावा है कि जमीनों की खरीद-फरोख्त और दाखिल-खारिज पर रोक से सरकार को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।

मोर्चा ने प्रशासन से मांग की कि प्रत्येक भूमि की वास्तविक कानूनी स्थिति की जांच कर पात्र लोगों को राहत दी जाए और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इस मामले का समाधान नहीं किया तो जन संघर्ष मोर्चा आंदोलन को और तेज करेगा। नेगी ने कहा कि संगठन आम लोगों के उत्पीड़न के खिलाफ आगे भी आवाज उठाता रहेगा।

फिलहाल मोर्चा की ओर से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले में हस्तक्षेप और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं।

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