हरिद्वार। किशोर न्याय, बाल अधिकारों और बच्चों के संरक्षण को लेकर हरिद्वार में राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उत्तराखंड उच्च न्यायालय और उत्तराखंड सरकार की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में जुवेनाइल जस्टिस, केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन एक्ट, 2015 के लागू होने के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पिछले एक दशक में कानून के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।
कार्यक्रम में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीश, जिला न्यायालयों के न्यायाधीश, प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

किशोर न्याय कानून के 10 साल पूरे होने पर हुआ मंथन
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पिछले दस वर्षों के दौरान किशोर न्याय कानून के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा करना और बच्चों के अधिकारों एवं संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आगे की रणनीति पर चर्चा करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, विशेषज्ञों और बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न हितधारकों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए। चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि कानून का लाभ बच्चों तक जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से पहुंचे और बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो।
बच्चों के पुनर्वास और संरक्षण पर विशेष जोर
सम्मेलन में बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों और हितधारकों ने कहा कि किशोर न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और जरूरत पड़ने पर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने तथा बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ काम करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। साथ ही कानून के प्रावधानों को जमीनी स्तर पर बेहतर ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक कदमों पर चर्चा हुई।

न्यायपालिका, प्रशासन और एनजीओ के बीच समन्वय पर चर्चा
राज्य स्तरीय सम्मेलन में न्यायपालिका, प्रशासन और गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और विशेषज्ञों ने किशोर न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी और बाल-केंद्रित बनाने को लेकर अपने सुझाव साझा किए। साथ ही बच्चों से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई, संरक्षण और पुनर्वास की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर भी चर्चा हुई।
भविष्य की रणनीति को लेकर दिए गए सुझाव
सम्मेलन में पिछले एक दशक के अनुभवों के आधार पर भविष्य की चुनौतियों और संभावित समाधानों पर भी विचार किया गया। बाल अधिकारों की सुरक्षा और किशोर न्याय कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करने, संबंधित अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने और जमीनी स्तर पर निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित न्यायिक अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों के हितों से जुड़े मामलों में कानून के साथ-साथ मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण भी जरूरी है।
इस अवसर पर उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल और जिला जज हरिद्वार नरेंद्र दत्त ने भी अपने विचार रखे।
बाइट:
- न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता, चीफ जस्टिस, हाई कोर्ट उत्तराखंड
- न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल, न्यायाधीश, उत्तराखंड हाई कोर्ट
- नरेंद्र दत्त, जिला जज, हरिद्वार






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