Health Screening Campaign: देश में गैर-संचारी रोगों यानी Non-Communicable Diseases (NCDs) की बढ़ती चुनौती के बीच केंद्र सरकार ने बीमारी की समय रहते पहचान और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर अपना फोकस बढ़ाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि देशभर में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से अब तक करोड़ों लोगों की हाइपरटेंशन और डायबिटीज समेत विभिन्न बीमारियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
स्वास्थ्य मंत्री ने विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कांग्रेस-2026 के दौरान देश में चल रहे स्वास्थ्य स्क्रीनिंग अभियान और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सरकार का जोर अब केवल बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों में बीमारी की शुरुआती पहचान, रोकथाम और समय पर उपचार शुरू करने पर भी है।

42 करोड़ से ज्यादा लोगों की डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की जांच
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के नेटवर्क के जरिए अब तक 42 करोड़ से अधिक लोगों की हाइपरटेंशन और डायबिटीज के लिए स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को ऐसी बीमारियों में गिना जाता है, जिनका लंबे समय तक पता नहीं चल पाने पर शरीर के दूसरे अंगों पर भी असर पड़ सकता है। नियमित जांच के जरिए जोखिम वाले लोगों की पहचान शुरुआती स्तर पर की जा सकती है।
सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से इन जांच सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है, ताकि लोगों को बीमारी की जांच के लिए बड़े अस्पतालों पर पूरी तरह निर्भर न रहना पड़े।
कैंसर की स्क्रीनिंग में भी करोड़ों लोगों की जांच
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से विभिन्न प्रकार के कैंसर की भी बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग की गई है।
आंकड़ों के अनुसार अब तक करीब:
- 36 करोड़ लोगों की ओरल कैंसर स्क्रीनिंग
- 17 करोड़ लोगों की ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग
- 9 करोड़ लोगों की सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग
की जा चुकी है।
कैंसर की समय पर पहचान को उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। कई मामलों में शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने पर मरीज को आगे की जांच और उपचार के लिए समय पर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया जा सकता है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को बनाया जा रहा प्राथमिक स्वास्थ्य का केंद्र
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को देश में प्राथमिक और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों पर गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग के अलावा लोगों को विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
इस मॉडल का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घर के करीब पहुंचाना और बीमारी गंभीर होने से पहले उसकी पहचान करना है।
सरकार की स्वास्थ्य नीति में अब Preventive Healthcare यानी बीमारी से पहले बचाव और Early Detection यानी बीमारी की शुरुआती पहचान को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।
क्यों जरूरी है डायबिटीज और बीपी की नियमित जांच?
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां कई बार शुरुआती दौर में स्पष्ट लक्षण नहीं देतीं। ऐसे में व्यक्ति को बीमारी की जानकारी काफी देर से हो सकती है।
नियमित स्क्रीनिंग से ऐसे लोगों की पहचान की जा सकती है, जिनमें बीमारी का जोखिम मौजूद है। जांच के बाद जरूरत के अनुसार डॉक्टर की सलाह, जीवनशैली में बदलाव और उपचार की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
इसी वजह से स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से नियमित स्वास्थ्य जांच और संतुलित जीवनशैली पर जोर देते रहे हैं।
कैंसर स्क्रीनिंग से समय पर पहचान की कोशिश
भारत में कैंसर के मामलों को लेकर भी स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में प्राथमिक स्तर पर स्क्रीनिंग के जरिए संभावित मामलों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
विशेष रूप से मुंह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर की स्क्रीनिंग को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
हालांकि स्क्रीनिंग किसी व्यक्ति में कैंसर की अंतिम पुष्टि नहीं होती। स्क्रीनिंग में किसी तरह की असामान्यता मिलने पर डॉक्टर आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं।

इलाज के साथ रोकथाम पर भी जोर
देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में गैर-संचारी बीमारियों को लेकर अब उपचार के साथ-साथ रोकथाम और शुरुआती पहचान पर भी ध्यान दिया जा रहा है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के जरिए बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान इसी दिशा में उठाया गया कदम है।
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कैंसर जैसी बीमारियों की समय पर पहचान से मरीजों को आगे की चिकित्सा सेवाओं से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
सरकार की कोशिश है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर ही लोगों की नियमित जांच हो और जिन लोगों में बीमारी या जोखिम के संकेत मिलें, उन्हें जरूरत के मुताबिक आगे के उपचार के लिए रेफर किया जा सके।
स्वास्थ्य जांच को लेकर क्या है संदेश?
देश में करोड़ों लोगों की स्क्रीनिंग का यह अभियान प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को दर्शाता है। हालांकि स्क्रीनिंग के आंकड़े बड़े हैं, लेकिन इनका वास्तविक स्वास्थ्य प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेगा कि जांच के बाद चिन्हित लोगों को समय पर उपचार, दवा और फॉलो-अप की सुविधा कितनी प्रभावी ढंग से मिलती है।
ऐसे में आम लोगों के लिए भी नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित खान-पान, शारीरिक गतिविधि और डॉक्टर की सलाह को नजरअंदाज न करना महत्वपूर्ण है।






Leave a Reply