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Villagers from 8 villages yearn for a road in Gadarpur : गदरपुर में सड़क के लिए तरस रहे 8 गांवों के ग्रामीण, 15 साल से समस्या बरकरार; बरसात में कट जाता है संपर्क

Villagers from 8 villages yearn for a road in Gadarpur : गदरपुर में सड़क के लिए तरस रहे 8 गांवों के ग्रामीण, 15 साल से समस्या बरकरार; बरसात में कट जाता है संपर्क

गदरपुर। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के गदरपुर विधानसभा क्षेत्र में विकास के दावों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो ग्रामीण इलाकों की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। गुलरभोज बोर जलाशय से कठपुलिया गांव तक सड़क नहीं होने के कारण करीब आठ गांवों के ग्रामीण लंबे समय से परेशानी का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर वे वर्षों से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीणों को बरसात के मौसम में होती है। बारिश के दौरान कच्चा और दुर्गम रास्ता बेहद खराब हो जाता है और कई बार ग्रामीणों का आसपास के क्षेत्रों से संपर्क तक टूट जाता है। ऐसे में स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

Villagers from 8 villages yearn for a road in Gadarpur : गदरपुर में सड़क के लिए तरस रहे 8 गांवों के ग्रामीण, 15 साल से समस्या बरकरार; बरसात में कट जाता है संपर्क

सड़क नहीं होने से करीब 2 किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर ग्रामीण

ग्रामीणों के मुताबिक, गुलरभोज बोर जलाशय से कठपुलिया गांव तक सड़क नहीं होने के कारण करीब आठ गांवों के लोगों को रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए पैदल रास्ते का सहारा लेना पड़ता है। ग्रामीणों को खेतों, स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंचने के लिए लगभग दो किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण क्षेत्र में रहने वाले लोगों की जिंदगी काफी मुश्किल हो गई है। खासतौर पर आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। वहीं, स्कूली बच्चों को भी खराब रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि क्षेत्र में पक्की सड़क का निर्माण हो जाए तो आठ गांवों के हजारों लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है और उनका संपर्क मुख्य मार्ग से बेहतर तरीके से जुड़ सकेगा।

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बरसात में पूरी तरह बंद हो जाता है रास्ता

ग्रामीणों के अनुसार, गर्मियों में किसी तरह यह रास्ता आवागमन के लिए इस्तेमाल हो जाता है, लेकिन बारिश शुरू होते ही स्थिति बेहद खराब हो जाती है। बरसात के दौरान रास्ते में कीचड़ और पानी भर जाने से पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि कई बार भारी बारिश के बाद यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है, जिससे ग्रामीणों का संपर्क आसपास के इलाकों से कट जाता है। ऐसे में जरूरी सामान लाने से लेकर बच्चों के स्कूल जाने और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने तक में परेशानी होती है।

ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए, ताकि बरसात के दिनों में उन्हें इस समस्या से दो-चार न होना पड़े।

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15 साल से समस्या का समाधान नहीं होने का आरोप

ग्रामीणों ने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों पर भी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि पिछले करीब 15 वर्षों से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले जनप्रतिनिधियों के सामने सड़क निर्माण की मांग रखी जाती रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया।

ग्रामीणों का दावा है कि वर्ष 2013 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान सड़क निर्माण को मंजूरी मिलने की बात कही गई थी, लेकिन इसके बावजूद आज तक सड़क का निर्माण शुरू नहीं हो सका है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की मंजूरी और निर्माण के बीच इतने वर्षों का समय बीत जाने के बावजूद काम शुरू नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। ग्रामीण अब यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उनकी सड़क का निर्माण कब होगा और उन्हें इस समस्या से कब तक जूझना पड़ेगा।

जनप्रतिनिधियों से शिकायत के बाद भी नहीं मिला समाधान

ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में क्षेत्र के सांसद, विधायक और ब्लॉक प्रमुख भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद सड़क की समस्या का समाधान नहीं होने पर लोगों में नाराजगी है।

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से सड़क निर्माण की मांग की। अपनी समस्या को लेकर कई बार शिकायतें और ज्ञापन भी दिए गए, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन ही मिला। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क का निर्माण चाहते हैं।

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सड़क निर्माण की मांग को लेकर चुनाव बहिष्कार का दावा

ग्रामीणों ने दावा किया कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर उन्होंने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान का बहिष्कार भी किया था। उनका कहना है कि चुनाव बहिष्कार के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी नाराजगी दर्ज कराने के बाद भी यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं होता है तो यह उनके लिए बेहद निराशाजनक है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे बड़े जनआंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

हालांकि, चुनाव बहिष्कार और सड़क निर्माण की मंजूरी से जुड़े ग्रामीणों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के समय तक नहीं हो सकी है।

ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई सड़क की जमीनी हकीकत

ग्रामीणों की समस्या को समझने के लिए मीडिया टीम ने मौके पर पहुंचकर करीब दो किलोमीटर तक पैदल सफर किया। इस दौरान रास्ते की स्थिति और ग्रामीणों की परेशानियों को करीब से देखा गया।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में उन्हें रोजमर्रा के छोटे-बड़े कामों के लिए भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है। उनका कहना है कि सड़क बनने से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

अब सवाल यह है कि जब क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं और उनके अनुसार सड़क को मंजूरी मिलने की बात भी सामने आ चुकी है, तो आखिर निर्माण कार्य अब तक शुरू क्यों नहीं हुआ? क्या संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि इस समस्या का स्थायी समाधान निकालेंगे?

ग्रामीणों की मांग है कि सरकार और प्रशासन जल्द से जल्द मौके का निरीक्षण कर सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू करें, ताकि आठ गांवों के हजारों लोगों को वर्षों पुरानी परेशानी से राहत मिल सके।

फिलहाल, सड़क निर्माण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है और ग्रामीणों की नजरें अब सरकार एवं स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही उनकी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज करने का निर्णय ले सकते हैं।

रिपोर्टर: जसप्रीत सिंह पन्नू
लोकेशन: गदरपुर/गुलरभोज, ऊधम सिंह नगर

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