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Message given of ‘Save the daughter, respect the daughter’ : हरिद्वार कांवड़ यात्रा में बेटियों को समर्पित कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र, ‘बेटी बचाओ-बेटी सम्मान’ का दिया संदेश

Message given of ‘Save the daughter, respect the daughter’ : हरिद्वार कांवड़ यात्रा में बेटियों को समर्पित कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र, ‘बेटी बचाओ-बेटी सम्मान’ का दिया संदेश

हरिद्वार में जारी कांवड़ यात्रा के दौरान जहां कांवड़ पटरी पर चारों तरफ ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष गूंज रहे हैं, वहीं एक अनोखी कांवड़ लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। दिल्ली के रोहिणी सेक्टर से हरिद्वार पहुंचे एक शिवभक्त ने अपनी 23वीं कांवड़ यात्रा देश की सभी बेटियों को समर्पित की है। रंग-बिरंगी और आकर्षक कांवड़ों के बीच यह कांवड़ अपनी भव्य सजावट के साथ-साथ बेटियों के सम्मान और उनके अधिकारों को लेकर दिए जा रहे सामाजिक संदेश के कारण लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।

Message given of 'Save the daughter, respect the daughter' : हरिद्वार कांवड़ यात्रा में बेटियों को समर्पित कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र, 'बेटी बचाओ-बेटी सम्मान' का दिया संदेश

बेटियों को समर्पित की 23वीं कांवड़ यात्रा

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु अलग-अलग तरह की कांवड़ लेकर हरिद्वार पहुंचते हैं। कोई कांवड़ को धार्मिक प्रतीकों से सजाता है तो कोई इसे भव्य और आकर्षक रूप देता है। लेकिन दिल्ली के रोहिणी सेक्टर से आए इस शिवभक्त की कांवड़ का उद्देश्य कुछ अलग है। उन्होंने अपनी 23वीं कांवड़ यात्रा को देश की सभी बेटियों के नाम समर्पित किया है।

उनकी कांवड़ पर ‘बेटी बचाओ, बेटी सम्मान’ का संदेश लोगों को बेटियों के प्रति अपनी सोच बदलने और उन्हें समान अधिकार देने के लिए प्रेरित कर रहा है। कांवड़ पटरी से गुजर रहे श्रद्धालु भी इस अनोखी पहल को देखकर रुक रहे हैं और शिवभक्त की इस सोच की सराहना कर रहे हैं।

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पांच साल की बेटी से मिली प्रेरणा

शिवभक्त कांवड़िया ने बताया कि उन्हें इस पहल की प्रेरणा अपनी पांच साल की बेटी से मिली। उन्होंने कहा कि बेटी के मासूम प्यार और परिवार में उसकी अहमियत ने उन्हें इस बार अपनी कांवड़ यात्रा को बेटियों के सम्मान के लिए समर्पित करने का विचार दिया।

उनका कहना है कि बेटी केवल परिवार का हिस्सा नहीं, बल्कि परिवार की खुशियों और भविष्य की मजबूत नींव होती है। हर घर में बेटी का होना सौभाग्य की बात है और बेटियों को समाज में बेटों के समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए।

भक्ति के साथ समाज को दिया मजबूत संदेश

शिवभक्त का कहना है कि कांवड़ यात्रा केवल भगवान शिव की भक्ति और आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश भी दिया जा सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी कांवड़ को बेटियों के सम्मान और उनके अधिकारों से जोड़ने का प्रयास किया है।

उन्होंने कहा कि समाज में आज भी कई जगह बेटियों को लेकर भेदभाव देखने को मिलता है। ऐसे में जरूरी है कि हर व्यक्ति बेटियों के प्रति अपनी सोच बदले और उन्हें शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान करे।

उन्होंने लोगों से अपील की कि बेटियों को बोझ समझने के बजाय उन्हें परिवार और समाज की ताकत मानें। बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा तो वे देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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कांवड़ यात्रा में अनोखी पहल बनी चर्चा का विषय

हरिद्वार में चल रही कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हो रहे हैं। इस बीच बेटियों को समर्पित यह कांवड़ श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

कांवड़ यात्रा में शामिल शिवभक्त का यह प्रयास धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी संदेश दे रहा है। उनकी इस पहल के जरिए ‘बेटी बचाओ, बेटी सम्मान’ का संदेश कांवड़ यात्रा में शामिल होने वाले हजारों श्रद्धालुओं तक पहुंच रहा है।

शिवभक्त ने कहा कि उनकी इच्छा है कि समाज में हर बेटी को सम्मान मिले और उसे अपने सपनों को पूरा करने का पूरा अधिकार मिले। उन्होंने कहा कि बेटियों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

बाइट: शिवभक्त कांवड़िया

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