नमस्कार माता-पिता, शिक्षकगण और छात्रों के अभिभावकों! आजकल घर-मोहल्ले से लेकर स्कूल तक आग लगने की घटनाएं आम हो गई हैं। छोटी-सी लापरवाही कभी-कभी बड़े हादसे का कारण बन जाती है। ऐसे में स्कूली स्तर पर आग से बचाव प्रशिक्षण और आपदा प्रबंधन की जागरूकता बेहद जरूरी है।
इसी दिशा में एक सराहनीय कदम उठाया गया है आवास विकास स्थित श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल में। हाल ही में यहां छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए एक विशेष आग से बचाव प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। स्थानीय फायर स्टेशन के अधिकारियों ने इस कार्यक्रम का नेतृत्व किया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस प्रशिक्षण शिविर का मुख्य लक्ष्य था – आपातकालीन स्थितियों में जान-माल की सुरक्षा करना। फायर ब्रिगेड की टीम ने स्कूल परिसर में वास्तविक परिस्थितियों का सजीव चित्रण (Mock Drill) किया। छात्रों को बताया गया कि आग लगने पर घबराने की बजाय शांतिपूर्वक और सही तरीके से कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
फायर ब्रिगेड अधिकारियों ने व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया, जिसमें शामिल थे:
- आग लगने पर सुरक्षित तरीके से स्कूल से बाहर निकलने का अभ्यास
- विभिन्न प्रकार के अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher) का सही उपयोग
- आग की विभिन्न श्रेणियों (Class A, B, C, D, K) के अनुसार कौन-सा रसायन या गैस इस्तेमाल करना चाहिए

गैस सिलेंडर आग पर आसान घरेलू उपाय
कार्यक्रम में सबसे ज्यादा ध्यान गैस सिलेंडर में आग लगने की स्थिति पर दिया गया। फायर अफसर सुनील दत्त तिवारी ने छात्रों को बताया कि घर में अक्सर LPG सिलेंडर से जुड़ी छोटी-मोटी आग लग जाती है। ऐसे में क्या करें?
- गीले बोरे, गीली चादर या कंबल से आग को ढककर ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दें
- कभी भी पानी का इस्तेमाल न करें (क्योंकि पानी तेल या गैस की आग को और फैला सकता है)
- सिलेंडर का रेगुलेटर बंद करने की कोशिश करें, लेकिन अगर आग बहुत ज्यादा हो तो तुरंत बाहर निकलें और फायर ब्रिगेड को कॉल करें
बच्चों को सिखाई गई महत्वपूर्ण तकनीक – Stop, Drop and Roll
बच्चों को भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भगदड़ से बचने की ट्रेनिंग भी दी गई। सबसे लोकप्रिय और प्रभावी तकनीक “Stop, Drop and Roll” को विस्तार से समझाया गया:
- Stop – अगर आपके कपड़ों में आग लग जाए तो भागने की बजाय रुक जाएं
- Drop – जमीन पर लेट जाएं
- Roll – जमीन पर लुढ़ककर आग को बुझाएं
यह तकनीक बच्चों के लिए बहुत आसान और याद रखने लायक है। फायर ब्रिगेड टीम ने इसे लाइव डेमो के जरिए दिखाया, जिससे छात्र उत्साहित होकर खुद अभ्यास करने लगे।

फायर अफसर सुनील दत्त तिवारी का महत्वपूर्ण संदेश
फायर अफसर सुनील दत्त तिवारी ने कहा, “अधिकांश अग्निकांड केवल घबराहट और जानकारी के अभाव में बड़े हो जाते हैं। अगर स्कूली स्तर पर ही बच्चों को सही प्रशिक्षण मिल जाए, तो वे न सिर्फ खुद सुरक्षित रहेंगे बल्कि अपने घर, मोहल्ले और समाज में भी सुरक्षा दूत की भूमिका निभा सकते हैं।”
उन्होंने यह भी जोर दिया कि हर स्कूल को साल में कम से कम दो बार फायर मॉक ड्रिल करानी चाहिए। स्कूल प्रबंधन को फायर अलार्म सिस्टम, फायर एक्सटिंग्विशर, पानी के हाइड्रेंट और स्पष्ट इवैक्यूएशन प्लान की नियमित जांच करनी चाहिए।
स्कूल फायर सेफ्टी क्यों जरूरी है?
भारत में हर साल हजारों आग की घटनाएं होती हैं, जिनमें स्कूल, घर और बाजार शामिल हैं। बच्चों को छोटी उम्र से ही फायर सेफ्टी एजुकेशन मिलना चाहिए क्योंकि:
- बच्चे जल्दी घबरा जाते हैं
- वे आग की गंभीरता को समझ नहीं पाते
- सही जानकारी होने पर वे न सिर्फ खुद बचते हैं बल्कि दूसरों की मदद भी कर सकते हैं
श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल, आवास विकास ने इस जिम्मेदारी को अच्छे से निभाया है। ऐसे कार्यक्रम अन्य स्कूलों के लिए भी उदाहरण बन सकते हैं।
अभिभावकों और शिक्षकों के लिए सलाह
- घर में भी बच्चों के साथ फायर सेफ्टी पर चर्चा करें
- LPG सिलेंडर, बिजली के तारों और किचन की सुरक्षा पर नजर रखें
- स्कूल से पूछें कि वे कितनी बार मॉक ड्रिल करते हैं
- बच्चों को फायर इमरजेंसी नंबर (101 या 112) याद करवाएं






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