नई दिल्ली/मुंबई, 23 मार्च 2026 | सोमवार को भारतीय वस्तु बाजार (MCX) में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ऊंची ब्याज दरों की उम्मीद और महंगाई की चिंता ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश से दूर कर दिया, जिससे कीमती धातुओं में भारी बिकवाली देखी गई।

आज के भाव (MCX)
- सोना (2 अप्रैल 2026 अनुबंध): 7,619 रुपये (5.27%) की गिरावट के साथ 1,36,873 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद।
कारोबार के दौरान न्यूनतम स्तर: 1,36,403 रुपये
अधिकतम स्तर: 1,40,158 रुपये - चांदी (5 मई 2026 अनुबंध): 14,495 रुपये (6.39%) की भारी गिरावट के साथ 2,12,277 रुपये प्रति किलो पर आ गई।
कारोबार के दौरान न्यूनतम स्तर: 2,11,086 रुपये
अधिकतम स्तर: 2,17,702 रुपये
इससे पहले सोना 1.37 लाख रुपये और चांदी 2.13 लाख रुपये के स्तर से नीचे फिसल चुकी थी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कमजोरी
COMEX पर सोना 5.50% टूटकर 4,359 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया, जबकि चांदी 6.65% गिरकर 65.08 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं में भारी दबाव दिख रहा है।

गिरावट की मुख्य वजहें
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी ने बताया कि गिरावट के पीछे दो बड़े कारक हैं:
- वैश्विक तनाव और ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष:
संघर्ष अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो ईरान की महत्वपूर्ण ऊर्जा संरचनाओं (पावर प्लांट्स) को निशाना बनाया जाएगा।
ईरान ने जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने और क्षेत्रीय संपत्तियों पर हमले की धमकी दी है।
इस तनाव से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और महंगाई का डर गहरा रहा है। - उच्च ब्याज दरों की उम्मीद:
बढ़ती महंगाई के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रखने की संभावना मजबूत हो गई है। उच्च ब्याज दरें सोने-चांदी जैसे बिना ब्याज वाले निवेशों को कम आकर्षक बनाती हैं।
मानव मोदी ने कहा, “सामान्यतः भू-राजनीतिक तनाव से सोना-चांदी में तेजी आती है, लेकिन इस बार तनाव महंगाई बढ़ा रहा है और ब्याज दर कटौती की उम्मीदें खत्म कर रहा है, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव बन रहा है।”
निवेशकों की प्रतिक्रिया
निवेशकों में चिंता का माहौल है। कई छोटे निवेशक और आभूषण कारोबारी इस गिरावट को खरीदारी का मौका मान रहे हैं, जबकि बड़े संस्थागत निवेशक सतर्क होकर पोजीशन कम कर रहे हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अगर ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ा तो अल्पावधि में फिर से उछाल आ सकता है, लेकिन फिलहाल दबाव बना हुआ है।
क्या करें निवेशक?
- अल्पकालिक व्यापारियों को सतर्क रहना चाहिए।
- लंबी अवधि के निवेशक गिरावट के स्तर पर खरीदारी पर विचार कर सकते हैं, लेकिन बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखें।
- विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पोर्टफोलियो में सोने-चांदी का 10-15% हिस्सा रखना अभी भी सुरक्षित रणनीति हो सकती है।
यह गिरावट पिछले कुछ सत्रों की तेजी के बाद आई है और बाजार अब अगले कुछ दिनों में वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति, तेल की कीमतें और अमेरिकी फेड की नीतियां सोने-चांदी के भाव तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।







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