नई दिल्ली।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में उठ रहे विरोध और आशंकाओं के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इन नियमों का दुरुपयोग किसी के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा और किसी भी वर्ग, समुदाय या व्यक्ति के साथ भेदभाव या अत्याचार नहीं होगा।
“किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा”
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि वह पूरी विनम्रता के साथ सभी को आश्वस्त करना चाहते हैं कि यह व्यवस्था संविधान के दायरे में है और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में लागू की गई है। उन्होंने दोहराया कि सरकार का उद्देश्य उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और जवाबदेह बनाना है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा,
“यूजीसी हो, केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार—सभी की जिम्मेदारी तय है। कोई भी इन प्रावधानों का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।”

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में लागू व्यवस्था
शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यूजीसी के नए नियम कोई मनमाना फैसला नहीं हैं, बल्कि यह पूरी व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि भेदभाव के नाम पर किसी को भी नियमों का अनुचित इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं दिया जाएगा।
क्या हैं UGC के नए नियम?
गौरतलब है कि 13 जनवरी 2026 को यूजीसी ने
‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulation, 2026’ लागू किया है।
इन नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों—विश्वविद्यालयों और कॉलेजों—में:
- इक्विटी कमेटी का गठन अनिवार्य
- भेदभाव विरोधी नीति लागू करना
- जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान, विकलांगता आदि के आधार पर भेदभाव खत्म करने के निर्देश
यूजीसी का कहना है कि इन नियमों का मुख्य उद्देश्य कैंपस में समानता सुनिश्चित करना और छात्रों व शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा करना है।

क्यों हो रहा है विरोध?
इन नियमों को लेकर कई राजनीतिक दलों और संगठनों ने आपत्ति जताई है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि:
- नियम सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण हैं
- केवल पिछड़े वर्गों की शिकायतों पर कार्रवाई का प्रावधान
- गलत शिकायत करने पर दंड का स्पष्ट प्रावधान नहीं
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि इससे सामान्य वर्ग के छात्रों की शिकायतों की अनदेखी हो सकती है।
संवाद से सुलझेगा विवाद: सरकार
यूजीसी अधिकारियों और शिक्षा मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि
छात्रों, शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के हित सर्वोपरि रहेंगे।
सरकार ने कहा है कि सभी आशंकाओं को दूर करने के लिए संवाद का रास्ता खुला रहेगा और जरूरत पड़ी तो नियमों की समीक्षा भी की जा सकती है।
निष्कर्ष
यूजीसी के नए नियमों को लेकर भले ही विवाद जारी हो, लेकिन केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री का स्पष्ट संदेश है कि किसी भी स्तर पर भेदभाव या उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।







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