जम्मू, 22 जनवरी 2026
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में आज एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ है। भारतीय सेना का एक वाहन पहाड़ी इलाके में करीब 200 फीट गहरी खाई में गिर गया। इस हादसे में सेना के 10 जवान शहीद हो गए और 7 जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पूरी घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।

हादसा कैसे हुआ?
सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा डोडा जिले के एक दूरस्थ इलाके में हुआ। सेना का एक वाहन पहाड़ी रास्ते से गुजर रहा था, जब अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ गया और वह गहरी खाई में जा गिरा। इलाका बेहद दुर्गम है, जहां रास्ते संकरे और खतरनाक हैं। मौसम भी खराब था, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दिक्कत आई।
घटना की सूचना मिलते ही सेना की टीमों ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। घायल जवानों को हेलीकॉप्टर के जरिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। शहीद जवानों के पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम के बाद परिवारों को सौंपा जाएगा।
शहीद जवानों की पहचान
सेना ने अभी तक शहीद जवानों के नाम जारी नहीं किए हैं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक ज्यादातर जवान स्थानीय यूनिट से थे। इनमें कई युवा जवान शामिल हैं, जिनकी उम्र 22 से 30 साल के बीच थी। घायल जवानों की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें श्रीनगर के मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

सेना और सरकार की प्रतिक्रिया
भारतीय सेना ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि हादसे की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित कर दी गई है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा:
“हमारे बहादुर जवानों ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। हम उनके परिवारों के साथ हैं और हर संभव मदद करेंगे।”
केंद्र सरकार ने भी शोक व्यक्त किया है। रक्षा मंत्री ने ट्वीट कर लिखा:
“जम्मू-कश्मीर के डोडा में सेना के वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना बेहद दुखद है। शहीदों को नमन। घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना।”
परिवारों का दर्द और जनता का गुस्सा
शहीद जवानों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। कई परिवारों ने कहा कि उनके बेटे अभी-अभी छुट्टी से लौटे थे। एक शहीद जवान की मां ने रोते हुए कहा:
“मेरा बेटा देश के लिए लड़ने गया था, लेकिन सड़क की खराब हालत ने उसे छीन लिया।”
सोशल मीडिया पर #JusticeForSoldiers और #RoadSafetyForArmy ट्रेंड कर रहे हैं। लोग लिख रहे हैं कि सीमावर्ती इलाकों में सड़कों की हालत इतनी खराब क्यों है? क्या सरकार की प्राथमिकता सिर्फ भाषणों तक सीमित है?

सवाल जो उठ रहे हैं
- पहाड़ी इलाकों में सड़कें और पुलों की मरम्मत क्यों नहीं हो रही?
- सेना के वाहनों की सुरक्षा और मेंटेनेंस पर कितना ध्यान दिया जा रहा है?
- ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं?
यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि हमारे जवान न सिर्फ दुश्मन से लड़ते हैं, बल्कि खराब मौसम, खराब सड़कों और लापरवाही से भी जंग लड़ रहे हैं।
युवराज मेहता नहीं, बल्कि देश के हर जवान की यह कहानी है – जो अपने परिवार से दूर रहकर देश की रक्षा करते हैं।
हमारी तरफ से सभी शहीदों को नमन।
शहीदों अमर रहें।
शहीदों को श्रद्धांजलि।







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