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20 साल से जमीन की जंग: रामबहादुर की हाजिरी ने अधिकारियों को किया हैरान, संपूर्ण समाधान दिवस में फिर लगी गुहार

20 साल से जमीन की जंग: रामबहादुर की हाजिरी ने अधिकारियों को किया हैरान, संपूर्ण समाधान दिवस में फिर लगी गुहार

बरेली के फरीदपुर तहसील में आज आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में एक बार फिर जनता की समस्याओं का अंबार लग गया। अवैध कब्जे, राशन कार्ड, पेंशन और राजस्व से जुड़ी शिकायतें सबसे ऊपर रहीं। मुख्य विकास अधिकारी देवयानी की अध्यक्षता में चले इस कार्यक्रम में कुल 75 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 10 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया, जबकि बाकी को संबंधित अधिकारियों को सौंपते हुए गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निपटारे के सख्त निर्देश दिए गए।

लेकिन इस पूरे आयोजन की सबसे चर्चित घटना रही ग्राम मनकापुर निवासी रामबहादुर की उपस्थिति। उनकी हाजिरी ने न सिर्फ अधिकारियों को हैरान किया, बल्कि वहां मौजूद हर शख्स को सोचने पर मजबूर कर दिया।

20 साल से जमीन की जंग: रामबहादुर की हाजिरी ने अधिकारियों को किया हैरान, संपूर्ण समाधान दिवस में फिर लगी गुहार

20 साल, एक जमीन, अनगिनत आवेदन

रामबहादुर कोई आम शिकायतकर्ता नहीं हैं। वे वर्ष 2000 में खरीदी गई अपनी जमीन पर पिछले 20 वर्षों से हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।

“दाखिल-खारिज पूरा है, कागजात मेरे पास हैं, फिर भी दबंगों ने जबरन कब्जा कर रखा है।”
रामबहादुर

उनके अनुसार:

  • फरीदपुर तहसील में बार-बार शिकायत की।
  • संपूर्ण समाधान दिवस में कई बार आवेदन दिए।
  • राजस्व टीम मौके पर कई बार गई, लेकिन बिना कोई कार्रवाई लौट आई।
  • पुलिस-प्रशासन से लेकर तहसील तक चक्कर काटते-काटते 20 साल बीत गए।

आज फिर वे संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंचे। हाथ में लिखित शिकायत पत्र थामे, सीधे सीडीओ देवयानी के सामने अपनी बात रखी।
गुहार लगाई — “मेरी जमीन दबंगों के कब्जे से मुक्त कराइए।”

20 साल से जमीन की जंग: रामबहादुर की हाजिरी ने अधिकारियों को किया हैरान, संपूर्ण समाधान दिवस में फिर लगी गुहार

कार्यक्रम में मौजूद रहे ये अधिकारी

  • उपजिला अधिकारी: मल्लिका नयन
  • सीओ: संदीप सिंह
  • राजस्व, पुलिस, विकास, पंचायत, विद्युत, सिंचाई सहित सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारी

सवाल अब भी बरकरार

  • क्या रामबहादुर को इस बार न्याय मिलेगा?
  • 20 साल पुरानी शिकायत पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • राजस्व टीम की रिपोर्ट्स कहां गायब हो जाती हैं?
  • संपूर्ण समाधान दिवस वाकई समाधान दे पाता है या सिर्फ कागजी खानापूर्ति है?

आखिरी उम्मीद

रामबहादुर की आंखों में अब भी उम्मीद है। वे कहते हैं,

“जब तक सांस है, लड़ाई जारी रहेगी। मेरी जमीन मेरे बच्चों का हक है।”

प्रशासन ने उनकी शिकायत को प्राथमिकता में लिया है। लेकिन सवाल वही है —
क्या इस बार कुछ बदलेगा?

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