मुंबई से राजस्थान तक चला पुलिस का ऑपरेशन, करीब 20 विशेष टीमों ने संभाली जांच की कमान; तकनीकी सुरागों और खुफिया जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंची क्राइम ब्रांच
मुंबई/कोटा। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग की घटना के बाद मुंबई पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए तीन संदिग्धों को करीब 24 घंटे के भीतर राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से हिरासत में ले लिया। घटना के तुरंत बाद मुंबई क्राइम ब्रांच ने आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगभग 20 विशेष टीमें गठित कीं। जांच में मोटरसाइकिल, तकनीकी सुरागों और खुफिया जानकारी की अहम भूमिका रही। मुंबई पुलिस और राजस्थान पुलिस के बीच समन्वय के बाद आरोपियों को उस समय पकड़ा गया, जब वे ट्रेन से दिल्ली की ओर जा रहे थे।

रविवार शाम फुटबॉल क्लब के बाहर हुई फायरिंग
रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार शाम करीब सात बजे टाइगर श्रॉफ मुंबई के एक फुटबॉल क्लब से निकल रहे थे। इसी दौरान हमलावरों ने उनकी कार को निशाना बनाकर गोलियां चला दीं। वारदात के बाद आरोपी मोटरसाइकिल से मौके से फरार हो गए। घटना से इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस ने तत्काल जांच शुरू कर दी।
बताया गया कि अभिनेता उस समय कार की बंद खिड़कियों के भीतर थे और प्रशंसकों की ओर हाथ हिला रहे थे। इसी दौरान हमलावरों ने फायरिंग की। सामने आए वीडियो में एक व्यक्ति दोनों हाथों से हथियार पकड़कर कार की ओर गोली चलाता दिखाई दिया, जबकि एक अन्य व्यक्ति भी फायरिंग करता नजर आया। इसके बाद आरोपी मोटरसाइकिल पर सवार होकर भाग निकले।
पुलिस के अनुसार, इस घटना में टाइगर श्रॉफ सुरक्षित बच गए, जबकि उनके ड्राइवर और एक ऑटो रिक्शा चालक के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
करीब 20 विशेष टीमों ने शुरू की तलाश
फायरिंग की सूचना मिलते ही मुंबई क्राइम ब्रांच ने आरोपियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए करीब 20 विशेष टीमें गठित कीं। जांचकर्ताओं ने घटनास्थल के आसपास मिले सुरागों के साथ-साथ संदिग्धों के भागने के रास्ते का पता लगाने पर ध्यान केंद्रित किया।
जांच के दौरान पुलिस को अंधेरी पश्चिम रेलवे स्टेशन के पास वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल लावारिस हालत में मिली। मोटरसाइकिल मिलने के बाद जांच को आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी साक्ष्यों और अन्य सुरागों का विश्लेषण किया गया। पुलिस को इससे संदिग्धों की गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की बात कही गई है।
जांचकर्ताओं ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि वारदात के बाद आरोपी किस रास्ते से मुंबई से बाहर निकले और उन्होंने आगे की यात्रा के लिए किस साधन का इस्तेमाल किया।

सूरत से कोटा तक आरोपियों का पीछा
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि संदिग्ध ट्रेन से राजस्थान की ओर जा रहे हैं। इसके बाद मुंबई क्राइम ब्रांच ने संबंधित जानकारी राजस्थान पुलिस के साथ साझा की। दोनों राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय के बाद कोटा रेलवे स्टेशन पर निगरानी बढ़ाई गई।
पुलिस के अनुसार, तीनों संदिग्धों को पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस के सामान्य डिब्बे में यात्रा करते समय रोका गया। ट्रेन सोमवार सुबह करीब 10:17 बजे कोटा स्टेशन पहुंची, जहां उन्हें हिरासत में लिया गया। बताया गया कि आरोपी दिल्ली की ओर जा रहे थे और नेपाल भागने की योजना बना रहे थे। हालांकि, उनके कथित भागने के इरादे की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से होनी बाकी है।
पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, पकड़े गए तीनों संदिग्ध बिहार और हरियाणा के रहने वाले हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने आगे की जांच के लिए उन्हें अपने कब्जे में लिया।
सिग्नल और टेलीग्राम के जरिए संपर्क की आशंका
पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि संदिग्धों के बीच संदेश और लोकेशन साझा करने के लिए सिग्नल तथा टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि घटना से पहले और बाद में आरोपियों के बीच किस तरह संपर्क हुआ और क्या इस वारदात में अन्य लोग भी शामिल थे।
सूत्रों के अनुसार, आरोपियों को कथित तौर पर फायरिंग को अंजाम देने के लिए कुल 50 हजार रुपये अग्रिम राशि के रूप में दिए गए थे। पुलिस अब इस रकम के स्रोत, भुगतान से जुड़े लोगों और हमले के पीछे संभावित मकसद की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि तीनों संदिग्धों में से किसकी क्या भूमिका थी और क्या सभी सीधे तौर पर फायरिंग में शामिल थे।

हथियार बरामद नहीं, कई सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस
पुलिस के मुताबिक, संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने के समय तक फायरिंग में इस्तेमाल हथियार बरामद नहीं हुआ था। ऐसे में जांचकर्ताओं के सामने हथियार का पता लगाना भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है। इसके साथ ही पुलिस वारदात की पूरी कड़ी जोड़ने, आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करने और संभावित सहयोगियों की पहचान करने में जुटी है।
मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन स्क्वाड कर रही है। जांच एजेंसियां कथित मकसद, आरोपियों के संपर्कों और घटना में अन्य व्यक्तियों की संभावित भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। फिलहाल, पुलिस जांच के निष्कर्षों और आगे की कानूनी कार्रवाई का इंतजार है।
कैसे मिली पुलिस को कामयाबी?
इस मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई के तीन प्रमुख पहलू सामने आए हैं—वारदात के बाद विशेष टीमों का गठन, घटनास्थल के पास मिली मोटरसाइकिल और तकनीकी सुरागों की जांच, तथा मुंबई से राजस्थान तक पुलिस के बीच सूचना साझा करना। इन्हीं कड़ियों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया और कोटा रेलवे स्टेशन पर तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया।
हालांकि, हमले के पीछे की पूरी साजिश, हथियार की बरामदगी और प्रत्येक संदिग्ध की भूमिका का खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा। पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि फायरिंग की योजना किसने बनाई, इसके लिए धन किसने उपलब्ध कराया और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।







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