Green Crackers Benefits: दिवाली और त्योहारों का मौसम आते ही पटाखों को लेकर चर्चा तेज हो जाती है। खासकर दिल्ली-एनसीआर जैसे इलाकों में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच ग्रीन पटाखों को एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 7 और 8 नवंबर को प्रमाणित ग्रीन पटाखे फोड़ने की सीमित समय के लिए अनुमति दी है। इसके तहत सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक ही पटाखे चलाए जा सकेंगे। हालांकि, इस अनुमति के साथ कई सख्त शर्तें भी लागू की गई हैं। बेरियम आधारित पटाखों पर प्रतिबंध रहेगा और केवल CSIR-NEERI से प्रमाणित तथा QR कोड वाले ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति होगी।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ग्रीन पटाखे क्या होते हैं? क्या ये सामान्य पटाखों की तुलना में वाकई कम प्रदूषण फैलाते हैं? क्या इनके इस्तेमाल से दिल्ली की जहरीली हवा में सुधार हो सकता है? आइए जानते हैं ग्रीन क्रैकर्स से जुड़ी हर जरूरी जानकारी।

क्या होते हैं ग्रीन क्रैकर्स? कैसे करते हैं काम?
ग्रीन क्रैकर्स ऐसे पटाखे होते हैं, जिन्हें सामान्य पटाखों की तुलना में कम हानिकारक उत्सर्जन करने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है। इनका निर्माण विशेष रासायनिक संरचना और संशोधित सामग्री के इस्तेमाल से किया जाता है, जिससे पटाखे जलने पर निकलने वाले धुएं और हानिकारक कणों की मात्रा को कम किया जा सके।
इन पटाखों को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) तथा राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI) के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। इनका मुख्य उद्देश्य त्योहारों के दौरान पटाखों से होने वाले प्रदूषण को कम करना है।
हालांकि, ग्रीन पटाखों का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इनसे प्रदूषण नहीं होता। इन्हें केवल पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाने वाला विकल्प माना जाता है।
सामान्य पटाखों और ग्रीन पटाखों में क्या अंतर है?
सामान्य पटाखों में कई ऐसे रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनके जलने से हवा में धुआं, धूल और हानिकारक गैसें फैलती हैं। इनसे निकलने वाले सूक्ष्म कण वायु गुणवत्ता को खराब करने के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल सकते हैं।
वहीं, ग्रीन पटाखों में रासायनिक संरचना को संशोधित किया जाता है, ताकि प्रदूषणकारी तत्वों के उत्सर्जन को कम किया जा सके।
दोनों के बीच प्रमुख अंतर इस प्रकार हैं:
- धुआं: ग्रीन पटाखों से सामान्य पटाखों की तुलना में कम धुआं निकलने का लक्ष्य रखा जाता है।
- हानिकारक कण: इनके निर्माण में ऐसी तकनीक और सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे कणों का उत्सर्जन कम हो।
- रासायनिक संरचना: सामान्य पटाखों की तुलना में ग्रीन पटाखों में कुछ हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल कम या संशोधित किया जाता है।
- प्रमाणीकरण: प्रमाणित ग्रीन पटाखों को CSIR-NEERI के निर्धारित मानकों को पूरा करना होता है।
- पर्यावरण पर प्रभाव: इनसे प्रदूषण पूरी तरह खत्म नहीं होता, लेकिन सामान्य पटाखों के मुकाबले उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है।

ग्रीन पटाखे कैसे बनाए जाते हैं?
ग्रीन पटाखों को तैयार करने के लिए सामान्य पटाखों में इस्तेमाल होने वाली रासायनिक सामग्री और निर्माण प्रक्रिया में बदलाव किया जाता है। इसका उद्देश्य जलने के दौरान पैदा होने वाले प्रदूषणकारी तत्वों को कम करना होता है।
कुछ ग्रीन पटाखों में जियोलाइट और आयरन ऑक्साइड जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। इनका उपयोग उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए विकसित विशेष फॉर्मूलेशन में किया जा सकता है।
इसके अलावा पटाखों के खोल के आकार, रासायनिक मिश्रण और जलने की प्रक्रिया में भी बदलाव किए जाते हैं। इन तकनीकों की मदद से धूल और धुएं के उत्सर्जन को कम करने का प्रयास किया जाता है।
ग्रीन पटाखों के लिए कितने प्रतिशत कम प्रदूषण का मानक है?
किसी भी पटाखे को केवल पैकेट पर ग्रीन लिख देने से पर्यावरण के अनुकूल नहीं माना जा सकता। इसके लिए निर्धारित वैज्ञानिक मानकों को पूरा करना जरूरी है।
दिए गए मानकों के अनुसार, ग्रीन पटाखों को सामान्य पटाखों की तुलना में कम से कम 30 प्रतिशत कण उत्सर्जन में कमी का मानक पूरा करना होता है। वैकल्पिक मानदंड के तहत कण उत्सर्जन में कम से कम 20 प्रतिशत और गैसीय उत्सर्जन में कम से कम 10 प्रतिशत की कमी निर्धारित की गई है।
यहां कण उत्सर्जन का मतलब हवा में मौजूद उन बेहद छोटे धूल और धुएं के कणों से है, जिन्हें सांस के जरिए शरीर के अंदर पहुंचने का खतरा रहता है।
इन सूक्ष्म कणों में PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषक शामिल होते हैं, जो सांस संबंधी समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ा सकते हैं।
क्या ग्रीन पटाखे पूरी तरह प्रदूषण मुक्त होते हैं?
इस सवाल का जवाब है- नहीं। ग्रीन पटाखे पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं होते हैं। इनके इस्तेमाल से भी हवा में धुआं, सूक्ष्म कण और अन्य उत्सर्जन फैल सकते हैं।
हालांकि, सामान्य पटाखों की तुलना में इनसे प्रदूषण कम करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इन्हें जितनी मर्जी उतनी संख्या में जलाया जा सकता है।
अगर बड़ी संख्या में लोग एक साथ ग्रीन पटाखे जलाते हैं, तो उनसे निकलने वाला कुल धुआं भी वातावरण को प्रदूषित कर सकता है। इसलिए इनका इस्तेमाल सीमित मात्रा में और निर्धारित नियमों के अनुसार करना जरूरी है।

क्या ग्रीन पटाखों से दिल्ली का वायु प्रदूषण कम हो सकता है?
दिल्ली में सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन जाता है। दिवाली के आसपास पटाखों का इस्तेमाल इस समस्या को और बढ़ा सकता है। ऐसे में ग्रीन पटाखों को प्रदूषण कम करने की दिशा में एक विकल्प माना जा रहा है।
लेकिन दिल्ली के प्रदूषण के पीछे केवल पटाखे जिम्मेदार नहीं हैं। इसके कई अन्य कारण भी हैं, जिनमें शामिल हैं:
- वाहनों का धुआं: दिल्ली में बड़ी संख्या में चलने वाले वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है।
- औद्योगिक प्रदूषण: फैक्ट्रियों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले धुएं और गैसों का भी हवा की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।
- पराली जलाना: सर्दियों के दौरान आसपास के राज्यों में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं भी दिल्ली-एनसीआर की हवा को प्रभावित कर सकता है।
- निर्माण कार्यों की धूल: सड़कों, इमारतों और अन्य निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल प्रदूषण बढ़ाती है।
- मौसम की स्थिति: सर्दियों में हवा की गति कम होने और वातावरण में प्रदूषकों के फैलाव की स्थिति अनुकूल न होने से प्रदूषण जमीन के आसपास जमा हो सकता है।
ऐसे में ग्रीन पटाखे पटाखों से होने वाले प्रदूषण को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन दिल्ली की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए वाहनों, उद्योगों, निर्माण कार्यों और अन्य प्रदूषण स्रोतों पर भी नियंत्रण जरूरी है।
असली ग्रीन पटाखों की पहचान कैसे करें?
बाजार में ग्रीन पटाखों के नाम पर नकली उत्पाद बेचे जाने की आशंका को देखते हुए खरीदारों को सावधानी बरतनी चाहिए। केवल हरे रंग की पैकेजिंग या ग्रीन क्रैकर्स लिखे होने से किसी उत्पाद को प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
असली और प्रमाणित ग्रीन पटाखों की पहचान के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- पटाखों के पैकेट पर आधिकारिक CSIR-NEERI लोगो की जांच करें।
- पैकेजिंग पर दिया गया QR कोड जरूर देखें।
- QR कोड स्कैन करके उत्पाद के प्रमाणन और निर्माता से जुड़ी जानकारी जांचें।
- निर्माता का नाम और प्रमाणन संबंधी विवरण देखें।
- केवल अधिकृत और प्रमाणित विक्रेताओं से ही पटाखे खरीदें।
- बिना प्रमाणन वाले या संदिग्ध उत्पादों से बचें।
CSIR-NEERI की ओर से प्रमाणित उत्पादों और अधिकृत निर्माताओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती है। इसलिए खरीदारी से पहले उत्पाद की प्रमाणिकता की जांच करना जरूरी है।
दिल्ली में कब और कितनी देर तक चला सकेंगे ग्रीन पटाखे?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, दिल्ली में 7 और 8 नवंबर को प्रमाणित ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति सीमित समय के लिए दी गई है।
निर्धारित समय इस प्रकार है:
- सुबह: 6 बजे से 7 बजे तक।
- रात: 8 बजे से 10 बजे तक।
इस दौरान केवल निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले प्रमाणित ग्रीन पटाखों का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। बेरियम आधारित पटाखों पर प्रतिबंध लागू रहेगा। इसके अलावा QR कोड और CSIR-NEERI प्रमाणन जैसी शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।
ग्रीन पटाखे बेहतर विकल्प, लेकिन प्रदूषण का स्थायी समाधान नहीं
ग्रीन पटाखों को पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाने वाले विकल्प के रूप में विकसित किया गया है। इनसे उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन इन्हें पूरी तरह सुरक्षित या प्रदूषण मुक्त मानना सही नहीं होगा।
दिल्ली जैसे शहरों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केवल ग्रीन पटाखों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसके लिए सालभर प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों की भागीदारी जरूरी है।
त्योहारों की खुशियां मनाते समय पर्यावरण और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए पटाखों का इस्तेमाल सीमित मात्रा में करें और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन जरूर करें।






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