Who is ACP Manasvi Vashishtha: दिल्ली पुलिस में इन दिनों एक ऐसा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने पुलिस विभाग के अंदर चल रहे असंतोष को सार्वजनिक कर दिया है। दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर साथी पुलिसकर्मियों के साथ प्रदर्शन की अगुवाई करने वाले सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) मनस्वी वशिष्ठ को विभाग ने निलंबित कर दिया है। शाहदरा जिले में वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच हुए विवाद के बाद शुरू हुआ यह मामला अब पुलिस विभाग के अंदरूनी विरोध और प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। आखिर कौन हैं ACP मनस्वी वशिष्ठ, किस पद पर तैनात थे और ऐसा क्या हुआ कि उन्हें सस्पेंड कर दिया गया? आइए जानते हैं इस पूरे मामले की विस्तार से जानकारी।

कौन हैं दिल्ली पुलिस के ACP मनस्वी वशिष्ठ?
मनस्वी वशिष्ठ दिल्ली पुलिस में सहायक पुलिस आयुक्त यानी असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) के पद पर कार्यरत अधिकारी हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर 2026 तक वह दिल्ली के शाहदरा जिले के गांधीनगर सब-डिवीजन में सब-डिवीजनल पुलिस ऑफिसर (SDPO) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
मनस्वी वशिष्ठ DANIPS कैडर के अधिकारी बताए जा रहे हैं। DANIPS का पूरा नाम दिल्ली, अंडमान और निकोबार आइलैंड्स, लक्षद्वीप, दमन और दीव तथा दादरा और नगर हवेली पुलिस सेवा है। यह केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस व्यवस्था से जुड़ी सेवा है, जिसके अधिकारी विभिन्न प्रशासनिक और पुलिस पदों पर अपनी सेवाएं देते हैं।
ACP के रूप में उनकी जिम्मेदारी अपने निर्धारित क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, पुलिस थानों की निगरानी करना, अपराध नियंत्रण और पुलिस प्रशासन से जुड़े कार्यों को देखना होती है। हालांकि, मनस्वी वशिष्ठ की व्यक्तिगत शैक्षणिक योग्यता, भर्ती वर्ष और पूर्व की सभी पोस्टिंग से संबंधित विस्तृत आधिकारिक जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
शाहदरा में वकील के साथ मारपीट से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे मामले की शुरुआत दिल्ली के शाहदरा इलाके में वकील ललित बंसल के साथ हुई कथित मारपीट की घटना से हुई। इस घटना के बाद वकीलों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।
वकीलों का आरोप था कि जब वे इस मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर संबंधित थाने पहुंचे, तो वहां उनकी पुलिस अधिकारियों के साथ कहासुनी हो गई। वकीलों ने ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के तत्कालीन एसएचओ अरुण कुमार पर उन्हें धमकाने के आरोप लगाए।
मामले ने धीरे-धीरे तूल पकड़ लिया और वकीलों ने विरोध जताते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया। इसके बाद पुलिस प्रशासन पर भी मामले को लेकर दबाव बढ़ने लगा। दोनों पक्षों के बीच विवाद को देखते हुए दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाया।

ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO अरुण कुमार का हुआ तबादला
वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच बढ़ते विवाद के बाद दिल्ली पुलिस विभाग ने कार्रवाई करते हुए ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के एसएचओ अरुण कुमार का तबादला कर दिया।
हालांकि, इस फैसले से पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों में नाराजगी देखने को मिली। पुलिसकर्मियों के बीच यह सवाल उठने लगा कि किसी विवाद की स्थिति में अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और उनकी बात भी सुनी जानी चाहिए।
इसी नाराजगी के बीच मामला दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गया, जहां पुलिसकर्मियों ने एकजुट होकर अपना विरोध दर्ज कराया।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन की अगुवाई करने पहुंचे ACP
सोमवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर कई पुलिसकर्मी एकत्र हुए। इस प्रदर्शन की अगुवाई ACP मनस्वी वशिष्ठ कर रहे थे। खास बात यह रही कि वह स्वयं पुलिस विभाग के अधिकारी होने के बावजूद अपने साथी पुलिसकर्मियों के साथ विरोध जताने के लिए मुख्यालय पहुंचे।
प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने ‘भारत माता की जय’ और ‘पुलिस एकता जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाए। उनकी प्रमुख मांग पुलिस कमिश्नर से मुलाकात करने और पुलिस अधिकारियों के साथ होने वाले विवादों से निपटने के लिए स्पष्ट नियम और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने की थी।
मनस्वी वशिष्ठ ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि उनकी मांगें स्पष्ट हैं और वे पुलिस कमिश्नर से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों से निपटने के लिए एक स्पष्ट SOP होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ उचित प्रक्रिया के तहत व्यवहार किया जा सके।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पुलिस अधिकारियों के साथ ही इस तरह का व्यवहार होगा, तो वे शहर के लोगों की सुरक्षा के लिए किस तरह मजबूती से काम कर पाएंगे?
प्रदर्शन के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ सस्पेंड
पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन और उसकी अगुवाई को लेकर विभाग ने ACP मनस्वी वशिष्ठ के खिलाफ सख्त कदम उठाया और उन्हें निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
एक पुलिस अधिकारी का इस तरह विभागीय फैसले के विरोध में सार्वजनिक प्रदर्शन का नेतृत्व करना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया। वहीं, निलंबन की कार्रवाई ने पुलिस विभाग में अनुशासन, अधिकारियों के अधिकार और प्रशासनिक फैसलों के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के तरीकों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, निलंबन के विस्तृत आधिकारिक आदेश, उसमें दर्ज सभी आरोपों और आगे की विभागीय प्रक्रिया की जानकारी की पुष्टि संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों से की जानी बाकी है।

पुलिस अधिकारियों के लिए SOP बनाने की उठी मांग
इस पूरे विवाद में सबसे अहम मुद्दा पुलिस अधिकारियों और वकीलों के बीच टकराव की स्थिति से निपटने के लिए स्पष्ट SOP तैयार करने की मांग बनकर सामने आया है।
प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों का कहना था कि किसी भी विवाद में दोनों पक्षों की बात सुनी जानी चाहिए और कार्रवाई तथ्यों तथा निष्पक्ष जांच के आधार पर होनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि पुलिस अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, तो उनके लिए भी एक स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
फिलहाल शाहदरा में वकील के साथ मारपीट से शुरू हुआ विवाद अब दिल्ली पुलिस के भीतर प्रशासनिक कार्रवाई और विरोध प्रदर्शन का बड़ा मुद्दा बन चुका है। ACP मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस विभाग इस पूरे मामले में आगे क्या कदम उठाता है और पुलिसकर्मियों की SOP से जुड़ी मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है।
निष्कर्ष: ACP मनस्वी वशिष्ठ का मामला केवल एक अधिकारी के तबादले और निलंबन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने पुलिस विभाग में अनुशासन, अधिकारियों के सम्मान और विवादों के समाधान के लिए स्पष्ट नियमों की आवश्यकता पर नई बहस छेड़ दी है।







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