Ayodhya Deepotsav 2026: 7 नवंबर को अयोध्या में दीपोत्सव का दसवां संस्करण आयोजित करने की तैयारी है। इस बार रामनगरी में 30 लाख मिट्टी के दीये जलाने, 2,100 स्वदेशी ड्रोन के जरिए रामायण के प्रसंगों का एरियल शो दिखाने और सरयू तट पर भव्य आरती आयोजित करने की योजना है। आयोजन को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, साफ-सफाई और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
अयोध्या, उत्तर प्रदेश। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या एक बार फिर दीपों की रोशनी से जगमगाने की तैयारी में है। दीपोत्सव 2026 को भव्य और आकर्षक स्वरूप देने के लिए धार्मिक अनुष्ठानों के साथ आधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी शामिल किया जा रहा है। इस बार आयोजन का प्रमुख आकर्षण 2,100 स्वदेशी ड्रोन से होने वाला एरियल शो होगा, जिसमें आसमान में रामायण से जुड़े प्रसंगों को प्रदर्शित करने की योजना है। इसके साथ राम की पैड़ी और सरयू तट पर दीप प्रज्ज्वलन, सामूहिक आरती, लेजर शो और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी प्रस्तावित हैं।

2,100 ड्रोन से आसमान में दिखेंगे रामायण के प्रसंग
दीपोत्सव के दौरान होने वाला ड्रोन शो दर्शकों के लिए प्रमुख आकर्षण बनने की उम्मीद है। योजना के अनुसार, 2,100 स्वदेशी ड्रोन की मदद से आसमान में रामायण के विभिन्न प्रसंगों की आकृतियां और दृश्य प्रदर्शित किए जाएंगे। तकनीक और धार्मिक परंपरा के इस संगम के जरिए भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को नए अंदाज में प्रस्तुत करने की तैयारी है।
ड्रोन शो के साथ लेजर लाइटिंग, 3डी प्रोजेक्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने प्रस्तावित हैं। इसके अलावा पर्यावरण के अनुकूल आतिशबाजी की योजना भी बनाई गई है। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से दीपोत्सव को देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यादगार बनाने का प्रयास किया जाएगा।
30 लाख दीयों से रोशन होगी रामनगरी
इस वर्ष दीपोत्सव के लिए लगभग 30 लाख मिट्टी के दीये जलाने का लक्ष्य रखा गया है। राम की पैड़ी सहित अयोध्या के प्रमुख घाटों और धार्मिक स्थलों को दीपों से सजाने की तैयारी है। शाम होते ही दीयों की रोशनी से सरयू तट और आसपास के क्षेत्र जगमगाने का दृश्य आयोजन का खास आकर्षण रहेगा।
दीपोत्सव में मिट्टी के दीयों का इस्तेमाल पारंपरिक दीपावली की भावना को भी दर्शाता है। इससे स्थानीय कुम्हारों और मिट्टी के दीये तैयार करने वाले कारीगरों को भी काम मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप दीयों का प्रज्ज्वलन और आयोजन की व्यवस्थाएं अंतिम तैयारियों पर निर्भर करेंगी।

सरयू आरती में शामिल हो सकते हैं 2,147 प्रतिभागी
दीपोत्सव के दौरान सरयू तट पर सामूहिक आरती का आयोजन भी प्रस्तावित है। इसकी तैयारियों के तहत 2,147 प्रतिभागियों के शामिल होने की योजना बनाई गई है। सरयू आरती के दौरान धार्मिक मंत्रोच्चार, दीपों की रोशनी और श्रद्धालुओं की भागीदारी से घाटों पर विशेष आध्यात्मिक वातावरण बनने की उम्मीद है।
आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के इंतजामों पर भी ध्यान दिया जा रहा है, ताकि बड़ी संख्या में पहुंचने वाले लोगों को कार्यक्रम देखने में अनावश्यक परेशानी न हो।
तीन चरणों में होंगे दीपोत्सव के कार्यक्रम
दीपोत्सव के कार्यक्रमों को तीन प्रमुख चरणों में आयोजित करने की योजना है।
पहला चरण: शोभायात्रा और रामायण की झांकियां
कार्यक्रम की शुरुआत साकेत महाविद्यालय से निकलने वाली शोभायात्रा से होगी। इसमें रामायण के प्रसंगों पर आधारित झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल होंगी। कलाकार पारंपरिक वेशभूषा और लोक कलाओं के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को प्रस्तुत करेंगे।
दूसरा चरण: रामकथा पार्क में धार्मिक आयोजन
दूसरे चरण में रामकथा पार्क में भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रतीकात्मक आगमन, भरत मिलाप तथा श्रीराम के राज्याभिषेक से जुड़े कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इन आयोजनों के जरिए रामायण की परंपरा और अयोध्या के धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व को प्रदर्शित किया जाएगा।
तीसरा चरण: दीप प्रज्ज्वलन और सरयू आरती
तीसरे चरण में राम की पैड़ी पर दीप प्रज्ज्वलन, सरयू आरती, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, ड्रोन शो और लेजर डिस्प्ले जैसे कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। यही चरण दीपोत्सव के सबसे आकर्षक दृश्यों में शामिल हो सकता है।

35 हजार स्वयंसेवक संभालेंगे व्यवस्थाओं में सहयोग
दीपोत्सव जैसे बड़े आयोजन में व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए लगभग 35 हजार स्वयंसेवकों की भागीदारी प्रस्तावित है। स्वयंसेवक विभिन्न स्थानों पर भीड़ को दिशा देने, श्रद्धालुओं की सहायता करने और आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं में सहयोग कर सकते हैं।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश समेत देश के 13 राज्यों के करीब एक हजार कलाकारों के शामिल होने की तैयारी है। ये कलाकार अपने-अपने राज्यों की लोक कलाओं, पारंपरिक नृत्यों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम में विविधता जोड़ेंगे। आयोजन में 12 देशों के सांस्कृतिक प्रतिनिधियों की भागीदारी भी प्रस्तावित बताई गई है।
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तैयारियों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दीपोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किसी तरह की असुविधा न हो। इसके लिए साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, संकेतक, आवागमन, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रमुख मार्गों, घाटों और कार्यक्रम स्थलों पर भीड़ को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण रहेगा। प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती होगी कि श्रद्धालुओं को धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने के साथ सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से आने-जाने की सुविधा मिले।
पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी मिलेगा बढ़ावा
अयोध्या का दीपोत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे आयोजनों के दौरान होटल, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और स्थानीय बाजारों से जुड़े कारोबारियों को पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से लाभ मिलने की संभावना रहती है।
इस वर्ष प्रस्तावित ड्रोन शो, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और दीप प्रज्ज्वलन समारोह अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने का माध्यम बन सकते हैं। देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से आने वाले प्रतिनिधियों की संभावित भागीदारी से आयोजन को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने की कोशिश भी की जा रही है।
7 नवंबर को होने वाले दीपोत्सव 2026 को लेकर तैयारियां जारी हैं। अब श्रद्धालुओं और पर्यटकों की नजर इस बात पर रहेगी कि निर्धारित योजनाओं को किस तरह अंतिम रूप दिया जाता है और दीपों, रामायण की झांकियों तथा आधुनिक तकनीक से सजी रामनगरी का दृश्य किस रूप में सामने आता है।






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