डायबिटीज सिर्फ किडनी और हार्ट ही नहीं, शरीर के इन 5 अंगों को भी पहुंचा सकती है नुकसान; जानिए कैसे करें बचाव

डायबिटीज सिर्फ किडनी और हार्ट ही नहीं, शरीर के इन 5 अंगों को भी पहुंचा सकती है नुकसान; जानिए कैसे करें बचाव

Diabetes Effects on Body Organs: डायबिटीज को अक्सर लोग केवल ब्लड शुगर बढ़ने की बीमारी समझते हैं, लेकिन लंबे समय तक शुगर नियंत्रित न रहने पर इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है। दिल, किडनी, आंखें, मुंह और पैर इससे गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। समय पर जांच, संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज से जटिलताओं का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।

डायबिटीज के बढ़ते मामले क्यों हैं चिंता का विषय?

आज के समय में डायबिटीज दुनिया भर में एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में लगभग 83 करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। यह बीमारी केवल ब्लड शुगर बढ़ने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि लंबे समय तक रक्त में ग्लूकोज का स्तर अधिक रहने से शरीर की रक्त वाहिकाओं और नसों को नुकसान पहुंच सकता है।

यही वजह है कि डायबिटीज से पीड़ित लोगों को केवल शुगर की रीडिंग पर ही नहीं, बल्कि अपने संपूर्ण स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए। नियमित जांच और समय पर इलाज से कई गंभीर जटिलताओं को रोकने या उनके बढ़ने की गति को धीमा करने में मदद मिल सकती है।

डायबिटीज सिर्फ किडनी और हार्ट ही नहीं, शरीर के इन 5 अंगों को भी पहुंचा सकती है नुकसान; जानिए कैसे करें बचाव

आखिर क्या है डायबिटीज और कैसे होती है?

डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में ब्लड ग्लूकोज यानी रक्त में शर्करा का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। हमारा शरीर भोजन से ग्लूकोज प्राप्त करता है, जिसका इस्तेमाल ऊर्जा बनाने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में इंसुलिन नामक हार्मोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इंसुलिन अग्न्याशय (पैंक्रियाज) में बनता है और ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है।

जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या उसका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो ग्लूकोज रक्त में जमा होने लगता है। लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से शरीर के विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।

डायबिटीज के प्रमुख प्रकारों में टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज शामिल हैं। टाइप-1 में शरीर इंसुलिन बहुत कम या बिल्कुल नहीं बना पाता, जबकि टाइप-2 में शरीर इंसुलिन का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पाता और समय के साथ इंसुलिन की कमी भी हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान भी कुछ महिलाओं में डायबिटीज विकसित हो सकती है।

डायबिटीज होने का खतरा किन कारणों से बढ़ता है?

डायबिटीज का जोखिम कई कारकों पर निर्भर करता है। इनमें कुछ ऐसे हैं जिन्हें बदला जा सकता है, जबकि कुछ पर व्यक्ति का नियंत्रण नहीं होता।

  • मोटापा और पेट के आसपास अधिक चर्बी: खासकर टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है।
  • पारिवारिक इतिहास: परिवार में माता-पिता या भाई-बहन को टाइप-2 डायबिटीज होने पर जोखिम बढ़ सकता है।
  • शारीरिक गतिविधि की कमी: लंबे समय तक बैठे रहना और नियमित व्यायाम न करना जोखिम बढ़ा सकता है।
  • बढ़ती उम्र: उम्र के साथ टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है, हालांकि यह बीमारी कम उम्र के लोगों में भी हो सकती है।
  • खानपान की आदतें: अधिक कैलोरी, कम पोषण और असंतुलित आहार वजन बढ़ने तथा मेटाबॉलिक समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
  • धूम्रपान: तंबाकू का सेवन टाइप-2 डायबिटीज और हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकता है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि केवल मीठा खाने से ही डायबिटीज नहीं होती। इस बीमारी के पीछे आनुवंशिक, शारीरिक और जीवनशैली से जुड़े कई कारक काम करते हैं।

डायबिटीज सिर्फ किडनी और हार्ट ही नहीं, शरीर के इन 5 अंगों को भी पहुंचा सकती है नुकसान; जानिए कैसे करें बचाव

शरीर के इन 5 अंगों पर पड़ सकता है डायबिटीज का असर

1. दिल: हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा

लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर अधिक रहने से रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। डायबिटीज के साथ उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और धूम्रपान जैसी समस्याएं हों, तो हृदय रोग का खतरा और बढ़ सकता है।

इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और रक्त संचार से जुड़ी दूसरी गंभीर समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए ब्लड शुगर के साथ ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की निगरानी भी जरूरी है।

2. किडनी: धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है कार्यक्षमता

किडनी का काम खून से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त तरल को छानना है। लंबे समय तक अनियंत्रित डायबिटीज किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे किडनी की फिल्टर करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है।

शुरुआती चरण में किडनी की बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं भी दे सकते। गंभीर स्थिति में किडनी फेलियर तक का खतरा हो सकता है। इसी कारण डॉक्टर की सलाह पर नियमित रूप से यूरिन एल्ब्यूमिन और किडनी फंक्शन की जांच कराना महत्वपूर्ण है।

3. आंखें: नजर कमजोर होने का खतरा

डायबिटीज आंखों की रेटिना में मौजूद बारीक रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकती है। इस स्थिति को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है। समय पर इसका पता न चले और इलाज न मिले, तो देखने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।

इसके अलावा डायबिटीज से पीड़ित लोगों में मोतियाबिंद और ग्लूकोमा का जोखिम भी बढ़ सकता है। कई बार शुरुआत में नजर में कोई स्पष्ट बदलाव महसूस नहीं होता, इसलिए नियमित आंखों की जांच कराना जरूरी है।

4. मुंह और दांत: मसूड़ों में संक्रमण की आशंका

डायबिटीज का असर मुंह की सेहत पर भी पड़ सकता है। ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने से मसूड़ों में सूजन, संक्रमण और पेरियोडोंटल बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। कुछ लोगों को मुंह सूखने, मुंह में फंगल संक्रमण या घाव भरने में देरी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

मसूड़ों से खून आना, सूजन, दांतों का ढीला होना या मुंह में लगातार परेशानी बने रहना ऐसे संकेत हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नियमित ब्रशिंग, दांतों की सफाई और समय पर डेंटल चेकअप से मुंह की सेहत बेहतर रखी जा सकती है।

5. पैर: नसों और रक्त संचार को नुकसान

डायबिटीज के कारण पैरों की नसों को नुकसान पहुंच सकता है, जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। इससे पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, जलन या दर्द महसूस हो सकता है। कुछ लोगों में पैरों तक रक्त का प्रवाह भी कम हो जाता है।

सुन्नपन होने पर चोट, छाला या घाव लगने का पता देर से चल सकता है। ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने की स्थिति में घाव भरने में भी परेशानी हो सकती है और संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।

इसलिए डायबिटीज से पीड़ित लोगों को रोजाना अपने पैरों की जांच करनी चाहिए। पैरों में घाव, लालिमा, सूजन, रंग बदलने या संक्रमण के संकेत दिखाई दें, तो डॉक्टर से जल्द संपर्क करना चाहिए। पैर में गंभीर घाव या तेजी से बढ़ती सूजन को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए क्या करें?

डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए नियमित दिनचर्या और सही उपचार महत्वपूर्ण हैं। कुछ जरूरी उपाय इस प्रकार हैं:

  • संतुलित भोजन करें: सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करें। मीठे पेय और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि करें: अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार पैदल चलना या अन्य व्यायाम अपनाएं। शुरुआत करने से पहले जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।
  • दवाएं समय पर लें: डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं बंद न करें और न ही उनकी खुराक में बदलाव करें।
  • ब्लड शुगर की निगरानी करें: डॉक्टर द्वारा बताई गई समय-सारणी के अनुसार शुगर की जांच कराएं।
  • नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं: जरूरत के अनुसार ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, किडनी और आंखों की जांच कराते रहें।
  • धूम्रपान से बचें: तंबाकू का सेवन छोड़ना हृदय और रक्त वाहिकाओं की सेहत के लिए फायदेमंद है।
  • पैरों और दांतों की देखभाल करें: रोजाना पैरों की जांच करें और मुंह की स्वच्छता बनाए रखें।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

यदि बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, बिना कारण वजन कम होना, धुंधला दिखाई देना या अत्यधिक थकान जैसे लक्षण महसूस हों, तो चिकित्सकीय सलाह लें। यदि पहले से डायबिटीज है और पैरों में घाव, नजर में अचानक बदलाव या सीने में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें गंभीरता से लें। सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या अचानक बोलने और शरीर के किसी हिस्से को हिलाने में दिक्कत होने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

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