नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। 10 अक्टूबर को राजधानी में हुए इस प्रदर्शन के सिलसिले में पुलिस ने 20 से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं। प्रदर्शनकारियों और पार्टी से जुड़े नेताओं पर शांति भंग करने, सरकारी कामकाज में बाधा डालने, कानून-व्यवस्था प्रभावित करने और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने अलग-अलग घटनाओं और स्थानों के आधार पर विभिन्न थानों में मामले दर्ज किए हैं।
प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की। इस दौरान बड़ी संख्या में समर्थकों को रास्ते में ही हिरासत में लिया गया और उन्हें निर्धारित डिटेंशन सेंटरों में ले जाया गया। हालांकि, दर्ज मामलों में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

CJP नेताओं को हिरासत में लेकर अदालत में किया पेश
इस मामले में CJP नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ भी पुलिस ने कार्रवाई की। खबर के मुताबिक, तीनों नेताओं को पहले हिरासत में लिया गया था। बाद में पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 107/151 के तहत शांति भंग की आशंका से जुड़ी निवारक कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी और उन्हें दिल्ली कैंट की एसीएम अदालत में पेश किया।
अदालत ने तीनों नेताओं को एक वर्ष तक शांति बनाए रखने और निर्धारित बॉन्ड भरने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया। यह कार्रवाई निवारक प्रक्रिया के तहत बताई गई है। इसका उद्देश्य संभावित रूप से शांति व्यवस्था बिगड़ने से रोकना होता है। अदालत से रिहाई का आदेश मिलने के बाद भी प्रदर्शन से जुड़े अन्य मामलों की जांच और कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग जारी रह सकती है।
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाया गया था प्रदर्शन
कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी के समर्थकों का उद्देश्य अपनी मांगों को लेकर राजधानी में प्रदर्शन करना था। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में समर्थकों के दिल्ली पहुंचने की बात सामने आई।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था प्रभावित होने और हिंसा की आशंका का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद समर्थकों के जंतर-मंतर की ओर बढ़ने पर पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कार्रवाई की। कई प्रदर्शनकारियों को रास्ते में ही हिरासत में ले लिया गया, जिससे प्रदर्शन को लेकर तनाव बढ़ गया।

मुंबई से दिल्ली पहुंचे नेताओं को भी लिया गया हिरासत में
प्रदर्शन का नेतृत्व करने के लिए मुंबई से दिल्ली पहुंचे CJP नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीनों को विमान के भीतर से ही हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा और शांति भंग की आशंका से जुड़ी निवारक प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया गया।
पुलिस की कार्रवाई के बाद प्रदर्शन और उससे जुड़े मामलों ने राजनीतिक एवं सार्वजनिक चर्चा को तेज कर दिया है। एक ओर पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाए गए, वहीं प्रदर्शन का आयोजन CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था। पूरे मामले में अब दर्ज एफआईआर, पुलिस के आरोपों और अदालत के आदेशों पर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।
20 से ज्यादा FIR के बाद जांच पर नजर
दिल्ली पुलिस की ओर से 20 से अधिक एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि किन घटनाओं में किसकी क्या भूमिका रही। सरकारी काम में बाधा, शांति भंग करने और पुलिसकर्मियों पर हमले जैसे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, लेकिन एफआईआर में दर्ज आरोप अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं होते। संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी का निर्धारण जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।
फिलहाल, CJP के प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और नेताओं की अदालत में पेशी इस घटनाक्रम के प्रमुख पहलू बने हुए हैं। मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर बनी रहेगी।






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