उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी में चले लंबे मंथन के बाद आखिरकार तस्वीर साफ हो गई है। प्रदेश स्तर पर राज्यसभा प्रत्याशी के लिए करीब 24 नामों पर विचार किया गया, जिसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और संगठन से जुड़े प्रमुख चेहरे शामिल थे। गहन चर्चा के बाद प्रदेश कोर कमेटी ने इनमें से 15 नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजा, और अंततः केंद्रीय नेतृत्व ने नैनीताल के भाजपा नेता दिनेश आर्य के नाम पर मुहर लगा दी। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 4 अक्टूबर को उन्हें उत्तराखंड से राज्यसभा प्रत्याशी के रूप में आधिकारिक रूप से घोषित किया।

कौन-कौन से नाम रहे चर्चा में?
राज्यसभा टिकट को लेकर प्रदेश में काफी दिलचस्प सियासी हलचल देखने को मिली। इस सीट के लिए पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व मंत्री, वर्तमान सांसद, प्रदेश संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी और पार्टी के कई अनुभवी नेताओं के नाम चर्चा में रहे। इनमें तीरथ सिंह रावत, रमेश पोखरियाल निशंक, नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट, कल्पना सैनी, मदन कौशिक और बलराज पासी जैसे बड़े नाम शामिल थे। हालांकि भाजपा ने 24 दावेदारों की पूरी सूची आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं की है, इसलिए इन सभी नामों को पूर्ण आधिकारिक सूची के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
कौन हैं दिनेश आर्य?
दिनेश आर्य की पहचान नैनीताल-कुमाऊं क्षेत्र के एक सक्रिय और अनुभवी भाजपा संगठनकर्ता के रूप में रही है। उनका राजनीतिक सफर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुआ था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने वर्ष 1985 में विद्यार्थी परिषद से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और इसके बाद भाजपा संगठन में समय-समय पर विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
आर्य भाजपा के नैनीताल जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी निभाई और पंजाब में भी पार्टी के संगठनात्मक दायित्व संभाले। उनका यह लंबा संगठनात्मक अनुभव ही उनके चयन के पीछे एक बड़ी वजह माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी से राज्यमंत्री दर्जे तक का सफर
वर्ष 2021 में दिनेश आर्य मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जनसंपर्क अधिकारी के रूप में कार्यरत रहे। इसके बाद दिसंबर 2023 में उन्हें उत्तराखंड राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया, जिसके साथ उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा भी प्रदान किया गया।
विधानसभा स्तर की राजनीति में भी आर्य काफी सक्रिय रहे हैं। वे वर्ष 2017 और 2022 में नैनीताल विधानसभा सीट से भाजपा टिकट के प्रमुख दावेदारों में शुमार थे। वर्ष 2026 में भी उनका नाम नैनीताल सीट के संभावित दावेदारों में चर्चा में था, लेकिन पार्टी ने अब उन्हें राज्यसभा का प्रत्याशी बनाकर राष्ट्रीय राजनीति की दिशा में आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
कुमाऊं क्षेत्र को मिला बड़ा प्रतिनिधित्व
दिनेश आर्य के चयन को क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्तमान राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। आर्य के चयन के साथ ही करीब 12 साल बाद कुमाऊं क्षेत्र से भाजपा के किसी नेता को राज्यसभा भेजे जाने की स्थिति बनी है, जिसे क्षेत्रीय संतुलन और कुमाऊं के कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
16 अक्टूबर को होगा राज्यसभा चुनाव
उत्तराखंड की इस राज्यसभा सीट के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होना है। दिनेश आर्य के प्रत्याशी घोषित होने के बाद अब पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह इस चयन को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।
निष्कर्ष
24 दावेदारों में से 15 नामों का पैनल तैयार होने के बाद कई बड़े और अनुभवी नेताओं के बीच अंततः दिनेश आर्य ने बाजी मार ली। उनका यह चयन न सिर्फ उनके दशकों के संगठनात्मक अनुभव को सम्मान देने वाला माना जा रहा है, बल्कि कुमाऊं क्षेत्र को लंबे समय बाद राज्यसभा में प्रतिनिधित्व दिलाने के लिहाज से भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम है। अब सबकी नजरें 16 अक्टूबर को होने वाले मतदान पर टिकी हैं।
(इस खबर में उल्लेखित विवरण भाजपा की आधिकारिक घोषणा और उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं।)







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