विकासनगर। रामपुर तिराहा कांड में शहीद हुए उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सत्येंद्र चौहान की बहन अरुणा रानी चौहान का जमीन से जुड़े विवाद को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। अरुणा रानी चौहान पिछले करीब 14 दिनों से सेलाकुई स्थित शहीद सत्येंद्र चौक पर धरना-प्रदर्शन कर रही थीं। शुक्रवार को वह अन्य महिलाओं के साथ विकासनगर तहसील पहुंचीं, जहां उन्होंने कथित भू-माफिया और अधिवक्ताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने तहसील परिसर में ‘भू-माफिया गो बैक’ के नारे लगाए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और कुछ अधिवक्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनके साथ धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया गया। घटना को लेकर मौके पर कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण रहा।

जमीन को लेकर चल रहा है विवाद
अरुणा रानी चौहान का कहना है कि पूरा मामला उनकी जमीन से जुड़ा हुआ है। उनके मुताबिक, वर्ष 1978 की जमीन की रजिस्ट्री उनके पास मौजूद है, लेकिन आरोप है कि उक्त जमीन को किसी अन्य व्यक्ति के नाम कर दिया गया है। इसी मामले को लेकर वह पिछले कई दिनों से धरना-प्रदर्शन कर रही हैं।
अरुणा रानी चौहान ने आरोप लगाया कि जमीन से जुड़े मामले में एडवोकेट शायरी गैरोला और एडवोकेट इला गैरोला की भूमिका को लेकर उन्होंने सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आना बाकी है।
तहसील में प्रदर्शन के दौरान हुआ विवाद
शुक्रवार को अरुणा रानी चौहान अन्य महिलाओं के साथ विकासनगर तहसील पहुंचीं। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और जमीन के मामले में कार्रवाई की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान कुछ अधिवक्ताओं और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस हो गई। अरुणा रानी चौहान का आरोप है कि इस दौरान प्रदर्शन कर रही महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और बदसलूकी की गई। उन्होंने कहा कि लंबे समय से वह अपनी जमीन से जुड़े मामले को लेकर अधिकारियों के सामने अपनी बात रख रही हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है।

वकीलों पर उत्पीड़न का आरोप
अरुणा रानी चौहान ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें अधिवक्ताओं की ओर से लगातार परेशान किया जा रहा है। उनका कहना है कि वह अपनी जमीन से संबंधित दस्तावेजों के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच चाहती हैं।
वहीं, प्रदर्शन के दौरान हुए विवाद के बाद पीड़ित पक्ष में काफी आक्रोश देखने को मिला। महिलाओं ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जमीन से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
फिलहाल जमीन के स्वामित्व और प्रदर्शन के दौरान हुए विवाद से जुड़े आरोपों पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और दूसरे पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी






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