सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में नगर निगम द्वारा जारी एक हाउस टैक्स नोटिस इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। शहर के वार्ड नंबर-2 स्थित रामनगर, मल्हीपुर रोड निवासी एक परिवार को ऐसा नोटिस मिला है, जिसमें उनके मकान पर करीब 22 करोड़ रुपये से अधिक का गृहकर (हाउस टैक्स) निर्धारित किया गया है। नोटिस में दर्ज राशि देखकर परिवार के लोग हैरान रह गए और अब पूरे मामले में न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं।
परिवार का कहना है कि जिस मकान को बनाने में वर्षों की मेहनत और जीवनभर की कमाई लगी, उसकी अनुमानित कीमत करीब 4 करोड़ रुपये है। ऐसे में मकान की कीमत से कई गुना अधिक हाउस टैक्स का नोटिस मिलना उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

जीआईएस सर्वे के आधार पर जारी हुआ नोटिस
जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने शहर में संपत्तियों के पुनर्मूल्यांकन और कर निर्धारण के लिए जीआईएस (Geographic Information System) सर्वे कराया है। इसी सर्वे के आधार पर संबंधित परिवार को हाउस टैक्स का नोटिस जारी किया गया।
नोटिस में गृहकर के साथ जलकर की भी बड़ी राशि दर्ज की गई है। परिवार का दावा है कि नोटिस के अनुसार उनके घर में रहने वाले करीब 12 सदस्य एक वर्ष में करीब 2 करोड़ 16 लाख रुपये मूल्य का पानी उपयोग कर चुके हैं। इसके आधार पर बकाया समेत लगभग 12 करोड़ रुपये का जलकर भी निर्धारित किया गया है।

नोटिस देखकर परिवार के उड़े होश
परिवार के मुखिया का कहना है कि जब उन्होंने नगर निगम का नोटिस देखा तो पूरा परिवार स्तब्ध रह गया। उनके अनुसार, किसी को समझ नहीं आ रहा कि आखिर इतनी बड़ी कर राशि कैसे तय कर दी गई।
परिवार का कहना है कि यदि यह नोटिस सही माना जाए तो यह सामान्य कर निर्धारण की सीमा से कहीं अधिक है। उनका आरोप है कि नगर निगम की कर निर्धारण प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि हुई है, जिससे उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निगम ने बताई टाइपिंग मिस्टेक
मामला सामने आने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने इसे टाइपिंग मिस्टेक (टंकण त्रुटि) बताया है। अधिकारियों का कहना है कि नोटिस में तकनीकी या डेटा एंट्री संबंधी गलती हुई हो सकती है, जिसकी जांच कर आवश्यक सुधार किया जाएगा।
हालांकि, परिवार का कहना है कि इतनी बड़ी राशि का नोटिस जारी होना नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि यदि समय रहते उन्होंने नोटिस नहीं देखा होता तो भविष्य में उन्हें और अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता था।

कोर्ट जाने की तैयारी में परिवार
परिवार ने कहा है कि यदि नगर निगम की ओर से जल्द उचित समाधान नहीं किया गया तो वे न्याय के लिए अदालत का रुख करेंगे। उनका कहना है कि वे अपनी बात कानूनी तरीके से रखेंगे और गलत कर निर्धारण को चुनौती देंगे।
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यदि जीआईएस सर्वे या कर निर्धारण में इस प्रकार की त्रुटियां सामने आ रही हैं तो नगर निगम को पूरे सिस्टम की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि भविष्य में अन्य नागरिकों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
जीआईएस सर्वे की विश्वसनीयता पर उठे सवाल
इस घटना के बाद सहारनपुर में जीआईएस सर्वे और नगर निगम की कर निर्धारण प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि डेटा एंट्री या सर्वे में छोटी सी गलती भी करोड़ों रुपये के नोटिस का कारण बन सकती है, तो ऐसी व्यवस्था में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
फिलहाल नगर निगम मामले की जांच की बात कह रहा है, जबकि प्रभावित परिवार संशोधित नोटिस का इंतजार कर रहा है। यदि समय पर समाधान नहीं हुआ तो मामला अदालत तक पहुंच सकता है।
मुख्य बिंदु
- सहारनपुर के रामनगर निवासी परिवार को 22 करोड़ रुपये से अधिक का हाउस टैक्स नोटिस मिला।
- नोटिस में लगभग 12 करोड़ रुपये जलकर भी दर्ज किया गया।
- परिवार का दावा है कि उनके मकान की अनुमानित कीमत करीब 4 करोड़ रुपये है।
- नगर निगम ने प्रारंभिक तौर पर इसे टाइपिंग या डेटा एंट्री की गलती बताया है।
- परिवार ने समाधान न होने पर कोर्ट जाने की बात कही है।






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