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Villagers submitted a memorandum to the SDM : जालौन में तीन विभागों के विवाद में फंसी 7 किमी सड़क, 6 गांवों के 15 हजार लोग परेशान; ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

Villagers submitted a memorandum to the SDM : जालौन में तीन विभागों के विवाद में फंसी 7 किमी सड़क, 6 गांवों के 15 हजार लोग परेशान; ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कोंच तहसील क्षेत्र में करीब 7 किलोमीटर लंबी जर्जर सड़क को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सड़क के निर्माण और चौड़ीकरण की मांग को लेकर छह गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) अभिनव कुमार को ज्ञापन सौंपकर सड़क निर्माण की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि जुझारपुरा (बम्बा) से कुँड़ा नहर पुल तक करीब 7 किलोमीटर लंबी सड़क लंबे समय से खराब स्थिति में है। सड़क के रखरखाव और निर्माण की जिम्मेदारी को लेकर तीन विभागों के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण सड़क का नवीनीकरण और चौड़ीकरण नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क की जिम्मेदारी किसी एक विभाग को सौंपी जाए और जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराया जाए।

Villagers submitted a memorandum to the SDM : जालौन में तीन विभागों के विवाद में फंसी 7 किमी सड़क, 6 गांवों के 15 हजार लोग परेशान; ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

तीन विभागों के बीच फंसी सड़क की जिम्मेदारी

ग्रामीणों के मुताबिक, जुझारपुरा (बम्बा) से कुँड़ा नहर पुल तक जाने वाली सड़क नहर विभाग, मंडी समिति परिषद और लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़ी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों के बीच होने के कारण कोई भी विभाग पूरी तरह से निर्माण कार्य की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।

ग्रामीणों का कहना है कि इसी वजह से वर्षों से सड़क की मरम्मत, नवीनीकरण और चौड़ीकरण का काम अधर में लटका हुआ है। सड़क की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है और अब कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए सड़क को किसी एक विभाग के अधीन किया जाए, ताकि निर्माण कार्य में किसी तरह की बाधा न आए।

Villagers submitted a memorandum to the SDM : जालौन में तीन विभागों के विवाद में फंसी 7 किमी सड़क, 6 गांवों के 15 हजार लोग परेशान; ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

हिंगुटा से जुझारपुरा तक सड़क की हालत बेहद खराब

ग्रामीणों ने बताया कि हिंगुटा से जुझारपुरा तक करीब साढ़े चार किलोमीटर सड़क पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। सड़क की ऊपरी परत कई जगह से उखड़ चुकी है और जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं। इन गड्ढों के कारण इस मार्ग पर वाहन चलाना बेहद मुश्किल और जोखिम भरा हो गया है।

बरसात के मौसम में सड़क की स्थिति और खराब हो जाती है। गड्ढों में पानी भरने के कारण वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं हो पाता, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सड़क खराब होने के कारण उन्हें रोजाना कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के लिए यह सड़क कोंच तहसील और बाजार तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग है।

6 गांवों के करीब 15 हजार लोग प्रभावित

जर्जर सड़क के कारण हिंगुटा, कुँड़ा, चमरउवा, वरहल, खुटैला और मवासा सहित छह गांवों के करीब 15 हजार लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, इन गांवों के लोग रोजाना इसी मार्ग से कोंच आते-जाते हैं।

इस सड़क का इस्तेमाल स्कूली बच्चों, किसानों, मरीजों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों द्वारा किया जाता है। सड़क खराब होने के कारण बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है। वहीं, किसी मरीज को अस्पताल ले जाने की स्थिति में भी परिवार के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क के कारण रिक्शा और छोटे वाहन चालक भी गांवों तक जाने से कतराते हैं। इससे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी होती है।

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किसानों के लिए भी बड़ी समस्या बनी जर्जर सड़क

ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण इस मार्ग का उपयोग बड़ी संख्या में किसान भी करते हैं। किसानों का कहना है कि सड़क खराब होने के कारण उन्हें खेतों तक पहुंचने और कृषि कार्य के लिए खाद-बीज लाने में परेशानी होती है।

इसके अलावा किसान अपनी कृषि उपज को कोंच मंडी तक पहुंचाने के लिए भी इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। सड़क की खराब स्थिति के कारण ट्रैक्टर, छोटे मालवाहक वाहन और अन्य वाहनों को आवागमन में परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे किसानों का समय और परिवहन खर्च दोनों बढ़ रहे हैं।

व्यापारियों का भी कहना है कि सड़क खराब होने का असर स्थानीय व्यापार पर पड़ रहा है। गांवों से बाजार तक आने-जाने में अधिक समय लगने के कारण लोगों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है।

ऑनलाइन शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क की समस्या को लेकर कई बार ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों के समक्ष कई बार समस्या उठाने के बावजूद सड़क निर्माण को लेकर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

ग्रामीणों ने कहा कि अब वे सड़क निर्माण की मांग को लेकर एकजुट होकर प्रशासन के सामने अपनी बात रख रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द सड़क निर्माण की दिशा में कदम नहीं उठाया गया तो ग्रामीण आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।

प्रदर्शन कर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

सड़क की समस्या से परेशान छह गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की। इसके बाद ग्रामीणों ने कोंच तहसील पहुंचकर एसडीएम अभिनव कुमार को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने मांग की कि जुझारपुरा (बम्बा) से कुँड़ा नहर पुल तक सड़क निर्माण की जिम्मेदारी किसी एक विभाग को सौंपी जाए। इसके साथ ही सड़क का नवीनीकरण और चौड़ीकरण जल्द से जल्द कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को वर्षों पुरानी समस्या से राहत मिल सके।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण होने से छह गांवों के करीब 15 हजार लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और व्यापारियों का आवागमन आसान होगा और क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी।

अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी मांग पर जल्द निर्णय लिया जाएगा और जर्जर सड़क के निर्माण का रास्ता साफ होगा।

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