कासगंज, उत्तर प्रदेश। जिले के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान कथित लापरवाही से एक महिला की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में शव रखकर प्रदर्शन किया और जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करते हुए जांच शुरू कर दी है।

प्रसव के बाद बिगड़ी तबीयत, रास्ते में हुई मौत
मृतका की पहचान दीक्षा (20 वर्ष) पत्नी नरेंद्र, निवासी पवसरा गांव के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, दीक्षा को 30 अप्रैल को प्रसव के लिए कासगंज स्थित श्याम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां ऑपरेशन के जरिए उसने एक बच्ची को जन्म दिया। बताया जा रहा है कि प्रसव के बाद उसे 2 मई को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया था।
परिजनों का कहना है कि घर लौटने के बाद अचानक दीक्षा की तबीयत बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर उसे दोबारा उसी अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे अलीगढ़ रेफर कर दिया। लेकिन अलीगढ़ ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

परिजनों का आरोप: इलाज में बरती गई लापरवाही
दीक्षा की मौत से गुस्साए परिजन शव को वापस श्याम हॉस्पिटल ले आए और अस्पताल परिसर में रखकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन ने प्रसव के बाद उचित देखभाल नहीं की और गंभीर लक्षणों के बावजूद समय रहते सही इलाज नहीं दिया, जिससे स्थिति बिगड़ती चली गई।
परिवार का कहना है कि अगर समय पर बेहतर उपचार मिलता तो दीक्षा की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और न्याय की मांग की है।
पुलिस ने संभाला मोर्चा, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाकर स्थिति को शांत कराया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, ताकि मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि अस्पताल की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एक साल पहले हुई थी शादी
बताया जा रहा है कि दीक्षा की शादी करीब एक वर्ष पहले एटा जिले के मिरहची थाना क्षेत्र के जिन्हेरा गांव निवासी नरेंद्र से हुई थी। नरेंद्र फरीदाबाद में रेलवे में संविदा कर्मी के रूप में कार्यरत हैं। परिवार में इस घटना के बाद गहरा शोक है, वहीं नवजात बच्ची के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
इस घटना के बाद क्षेत्र में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को सख्त निगरानी और नियमित जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।
फिलहाल सभी की नजर पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किसी की लापरवाही रही या नहीं।






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