चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन आज (22 मार्च 2026, रविवार) देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा की जा रही है। इस दिन मां की आराधना से भक्तों को यश, शक्ति, दीर्घायु, स्वास्थ्य और घर-परिवार में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

मां कूष्मांडा कौन हैं?
‘कूष्मांडा’ नाम संस्कृत शब्द ‘कुम्हड़ा’ (पेठा) से लिया गया है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा को कुम्हड़े का भोग अत्यंत प्रिय है। वे अष्टभुजा देवी के रूप में जानी जाती हैं। उनके आठ हाथों में कमंडल, धनुष-बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला शोभित हैं। उनका वाहन सिंह है और निवास स्थान सूर्यमंडल के भीतर माना जाता है। अपनी दिव्य मुस्कान से उन्होंने ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए उन्हें सृष्टि की आदि शक्ति कहा जाता है।
मां कूष्मांडा पूजा का महत्व
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इससे भक्तों के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, रोग दूर होते हैं और जीवन में सफलता के नए द्वार खुलते हैं।
मुख्य मंत्र:
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
इस मंत्र का कम से कम 21 या 108 बार जप अवश्य करें। साथ ही सरल मंत्र ॐ कूष्माण्डायै नमः का भी जाप किया जा सकता है।

मां कूष्मांडा को चढ़ाएं प्रिय वस्तुएं
- फूल: लाल या पीले रंग के फूल (विशेष रूप से गुलाब, हिबिस्कस या गेंदे के फूल)। लाल फूल मां को अत्यंत प्रिय हैं।
- भोग: मुख्य भोग पेठा (कुम्हड़ा) अवश्य लगाएं। इसके अलावा मालपुआ, हलवा या मीठी चीजें अर्पित करें। मालपुआ चढ़ाने से जीवन में मिठास और सुख बना रहता है।
शुभ रंग और वस्त्र
चौथे दिन नारंगी या पीला रंग शुभ माना जाता है। इस दिन इन रंगों के कपड़े पहनकर पूजा करें। पूजा में पीले वस्त्र, पीला सिंदूर, पीली चूड़ियां, बिंदी और पीले फल भी अर्पित कर सकते हैं। कुछ परंपराओं में हरा रंग भी शुभ बताया जाता है।

पूजा की सरल विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- मां की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
- फूल, अक्षत, रोली, चंदन अर्पित करें।
- पेठा या मालपुआ का भोग लगाएं।
- मंत्र जप करें और आरती करें।
- सच्चे मन से प्रार्थना करें।
जय मां कूष्मांडा!
इस पावन दिन मां कूष्मांडा सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करें, स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि प्रदान करें।







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