मसूरी (देहरादून), 18 मार्च 2026 – मसूरी में बुधवार को उत्तराखंड गढ़वाल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अमित कुमार के साथ कथित अभद्र व्यवहार को लेकर तनावपूर्ण माहौल रहा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मंडल अध्यक्ष रजत अग्रवाल पर अपशब्दों और हाथापाई के प्रयास के आरोप लगे। जल संस्थान कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया और सख्त कार्रवाई की मांग की। हालांकि, देर शाम रजत अग्रवाल द्वारा माफी मांगने के बाद मामला शांत हो गया।

घटना की शुरुआत: कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बैठक
सूत्रों के अनुसार, 17 मार्च को गांधी चौक परिसर में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की अध्यक्षता में मसूरी की विभिन्न समस्याओं (खासकर पेयजल और जल निकासी) पर बैठक हुई थी। बैठक में जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अमित कुमार सहित कई विभागीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
बैठक के दौरान पेयजल से जुड़े मुद्दों पर चर्चा चल रही थी, तभी भाजपा मंडल अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने हस्तक्षेप किया और अधिशासी अभियंता के साथ कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया। आरोप है कि हाथापाई का भी प्रयास हुआ, जिसे मौके पर मौजूद लोगों ने रोक दिया।
कर्मचारियों में रोष, प्रदर्शन और शिकायत
घटना के बाद उत्तराखंड जल संस्थान कर्मचारी संघ (मसूरी) में भारी रोष फैल गया। कर्मचारियों का कहना था कि ऐसे व्यवहार से अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल गिरता है और कार्यस्थल पर भय का माहौल बनता है।
संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष रामचंद्र सेमवाल के नेतृत्व में कर्मचारियों ने मसूरी एसडीएम और कोतवाली कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की। उन्होंने रजत अग्रवाल के खिलाफ लिखित शिकायत सौंपी और 2 दिनों के भीतर कार्रवाई न होने पर 23 मार्च 2026 से पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी। कर्मचारियों ने शासनादेश का हवाला देते हुए कहा कि ड्यूटी के दौरान अभद्रता या मारपीट पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।

माफी और मामला शांत
दिनभर चले विरोध और बढ़ते दबाव के बीच देर शाम रजत अग्रवाल जल संस्थान कार्यालय पहुंचे। उन्होंने अधिशासी अभियंता अमित कुमार और अन्य कर्मचारियों से अपने व्यवहार के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।
माफी स्वीकार करने के बाद कर्मचारी संघ ने आपसी सहमति से शिकायत वापस ले ली और मामले को समाप्त करने का फैसला किया। इसके बाद शहर में स्थिति सामान्य हो गई।
रामचंद्र सेमवाल (कार्यवाहक अध्यक्ष, उत्तराखंड जल संस्थान कर्मचारी संघ, मसूरी)
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“हमने सिर्फ सम्मान और नियमों की रक्षा के लिए आवाज उठाई थी। माफी मिलने के बाद हम संतुष्ट हैं और कार्य बहिष्कार की चेतावनी वापस लेते हैं। लेकिन भविष्य में ऐसे किसी भी घटना पर सख्त रुख अपनाएंगे।”
निष्कर्ष: मर्यादित व्यवहार की जरूरत
यह घटना एक बार फिर जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच समन्वय व मर्यादित व्यवहार की आवश्यकता को उजागर करती है। मसूरी जैसे पर्यटन स्थल में ऐसी घटनाएं प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित कर सकती हैं।






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