पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर खतरे के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक और मानवीय सक्रियता से दुनिया को चौंकाया है। ईरान में फंसे सैकड़ों भारतीय नागरिकों को सड़क मार्ग से सुरक्षित निकालने का अभियान तेजी से चल रहा है – और यह वो रास्ते हैं जो सामान्य परिस्थितियों में भी चुनौतीपूर्ण हैं।

ईरान से 640 भारतीय सुरक्षित निकाले गए
भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय की टीम ने पिछले दो दिनों में ईरान से 640 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाला है। इनमें:
- 550 भारतीय अर्मेनिया पहुंचाए गए
- 90 भारतीय अजरबेजान पहुंचाए गए
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बताया कि इनमें से 284 धार्मिक यात्री (श्रद्धालु) शामिल हैं। ईरान में करीब 9,000 भारतीय रहते हैं, जिनमें ज्यादातर छात्र, कुछ कारोबारी, धार्मिक यात्री और जहाजों पर काम करने वाले लोग हैं। प्राथमिकता छात्रों और संवेदनशील समूहों को दी जा रही है।
दुश्मन देशों के रास्ते से निकासी – भारत की कूटनीति का कमाल
- अर्मेनिया और अजरबेजान एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हैं।
- आपरेशन सिंदूर के दौरान अजरबेजान ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया था और भारत के साथ संबंध खराब रहे हैं।
- इसके बावजूद भारत ने दोनों देशों से समन्वय कर भारतीयों को सुरक्षित निकाला।
सूत्रों के अनुसार, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी अत्यंत जोखिम भरे माहौल में काम कर रहे हैं। संचार व्यवस्था लगभग ठप है, कई क्षेत्रों में केवल सरकारी अनुमति से ही संपर्क संभव है। दूतावास पहले भारतीयों को ईरान के भीतर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाता है, फिर सड़क मार्ग से पड़ोसी देशों तक निकालने की व्यवस्था करता है। परिवारों को भी लगातार अपडेट दिया जा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर भारत का जवाब: ट्रंप से कोई बात नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा था कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य को “सुरक्षित और खुला” रखने के लिए युद्धपोत भेजने चाहिए। ट्रंप ने इसे “कृत्रिम अवरोध” करार दिया था।
इस पर भारत का स्पष्ट जवाब आया:
विदेश मंत्रालय ने कहा – “भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका के साथ कोई द्विपक्षीय चर्चा नहीं की है।”
भारत ने हमेशा क्षेत्र में शांति और संवाद पर जोर दिया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर लगातार खाड़ी देशों के मंत्रियों से बात कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई शीर्ष नेताओं से बातचीत की है ताकि संकट का कूटनीतिक समाधान निकले और क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे।
ईरान में फंसे भारतीयों की स्थिति
- ज्यादातर छात्र प्रभावित हैं।
- कुछ धार्मिक यात्री और कारोबारी भी फंसे हैं।
- जहाजों पर काम करने वाले भारतीयों को भी निकाला जा रहा है।
भारतीय मिशन ने संकट के बावजूद अपना राजनयिक संचालन जारी रखा है, जबकि कई देशों ने तेहरान से अपना संचालन सीमित या बंद कर दिया है।
यह ऑपरेशन भारत की कूटनीतिक कुशलता और मानवीय संवेदनशीलता का शानदार उदाहरण है।
क्या आपको लगता है कि भारत का यह संतुलित रुख सही है? या और सख्त कदम उठाने चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं।
JN न्यूज़ – संकट में भी भारत पहले! 🇮🇳🛳️🛡️






Leave a Reply