अमेरिका और इज़राइल ने शनिवार सुबह ईरान पर बड़े पैमाने पर संयुक्त हमले शुरू किए, जिसे अमेरिकी रक्षा विभाग ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” और इज़राइल ने “ऑपरेशन रोअरिंग लायन” नाम दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “ईरान के खतरनाक शासन को खत्म करने” और परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने की कार्रवाई बताया, साथ ही ईरानी जनता से सरकार बदलने की अपील की। ईरान ने तुरंत जवाबी हमले शुरू कर दिए, जिसमें इज़राइल और खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी गईं। इस घटना ने पश्चिम एशिया में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है और दुनिया भर में प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया है।

प्रमुख देशों की प्रतिक्रियाएं: कौन किसके साथ?
हमलों और ईरान के जवाबी हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय बंट गया है। कुछ देशों ने अमेरिका-इज़राइल की कार्रवाई का समर्थन किया, तो कुछ ने इसे “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बताकर निंदा की।
ईरान के साथ खड़े देश (आलोचना और समर्थन)
- पाकिस्तान → विदेश मंत्री इशाक डार ने हमलों की कड़ी निंदा की और तुरंत तनाव रोकने की अपील की। पाकिस्तान ने ईरान के साथ अपनी “वफादारी” जताई, खासकर दोनों के ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए।
- रूस → अमेरिका-इज़राइल से तुरंत हमले रोकने की मांग की। रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे “गैर-जिम्मेदाराना” बताया और राजनीतिक-कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया। रूस ने क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा जताया।
- ओमान → विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने ट्रंप की आलोचना की और कहा, “यह आपकी लड़ाई नहीं है, इसमें और न फंसें।” ओमान ने हाल ही में अमेरिका-ईरान बातचीत में मध्यस्थता की थी, जिसे हमलों ने कमजोर कर दिया।
- क्यूबा → अमेरिका-इज़राइल की कार्रवाई को “गैर-जिम्मेदाराना” और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।
- इंडोनेशिया → वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की, सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
- स्पेन → पीएम पेड्रो सांचेज ने कार्रवाई को “एकतरफा” बताया और वैश्विक अस्थिरता बढ़ाने वाला कहा।

अमेरिका-इज़राइल के समर्थक
- कनाडा → पीएम मार्क कार्नी और विदेश मंत्री ने अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन किया, ईरान को परमाणु हथियार रोकने के लिए जरूरी बताया।
- ऑस्ट्रेलिया → पीएम एंथनी अल्बनीज ने अमेरिकी हमलों का खुला समर्थन किया, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खतरा बताया।
तटस्थ/चिंतित/कूटनीति की अपील करने वाले
- फ्रांस → राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे “युद्ध की शुरुआत” बताया और यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की आपात बैठक बुलाने की मांग की।
- नॉर्वे → विदेश मंत्री ने इज़राइल के हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं माना।
- बेल्जियम → विदेश मंत्री ने कहा कि ईरानी जनता को सरकार के फैसलों की कीमत नहीं चुकानी चाहिए।
- फिलीपींस → राष्ट्रपति ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी (क्षेत्र में लाखों फिलीपीनी कामगार हैं)।
- जापान → ऊर्जा सुरक्षा पर असर की चिंता जताई और घटनाक्रम पर नजर रखने की बात कही।
- यूरोपीय संघ (ईयू) → अधिकतम संयम बरतने, नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपील की।

क्या बदलेगा समीकरण?
- ट्रंप का रुख → हमलों को “रेजीम चेंज” की दिशा में कदम बताया, ईरानी जनता से सरकार गिराने की अपील की। ट्रंप ने ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करने का वादा किया।
- ईरान का जवाब → तेहरान ने इज़राइल और खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों (कुवैत, बहरीन, कतर, यूएई) पर मिसाइलें दागीं। ईरान ने इसे “आत्मरक्षा” बताया।
- क्षेत्रीय असर → खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकाने प्रभावित, हवाई यातायात ठप, शिपिंग प्रभावित। तेल की कीमतों में उछाल की आशंका।
- वैश्विक खतरा → कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यापक युद्ध में बदल सकता है, जिसमें रूस-चीन ईरान के पक्ष में और अमेरिका के सहयोगी इज़राइल के साथ आ सकते हैं।
यह घटनाक्रम मध्य पूर्व की राजनीति को पूरी तरह बदल सकता है। फिलहाल कूटनीति की अपीलें जारी हैं, लेकिन हमलों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।






Leave a Reply