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फरीदपुर CHC में नवजात की मौत पर बवाल: ‘क्रिमिनल नेग्लिजेंस’ का आरोप—स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने ली मासूम की जान।

फरीदपुर CHC में नवजात की मौत पर बवाल: ‘क्रिमिनल नेग्लिजेंस’ का आरोप—स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने ली मासूम की जान।

बरेली के फरीदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अभूतपूर्व चिकित्सा लापरवाही (Gross Medical Negligence) का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां उपेक्षा के चलते एक नवजात शिशु की दर्दनाक मौत हो गई। यह मामला अब राज्य स्वास्थ्य प्रशासन से लेकर शासन तक भूकंप की तरह हलचल पैदा कर रहा है, क्योंकि पीड़ित परिवार ने अस्पताल स्टाफ और ड्यूटी डॉक्टर पर गंभीर आपराधिक लापरवाही (Criminal Negligence), प्रोफेशनल मिसकंडक्ट और ड्यूटी डेज़र्शन के आरोप लगाए हैं।

पीड़ित पति प्रशांत सिंह ने कोतवाली में दर्ज कराई तहरीर में स्पष्ट कहा है कि 1 दिसंबर की सुबह 9:30 बजे उनकी पत्नी सफलता को प्रसव पीड़ा के साथ अस्पताल लाया गया, जहां महिला डॉक्टर ने जांच के बाद भर्ती तो किया, लेकिन उसके बाद डॉक्टर अस्पताल से नदारद हो गईं।

फरीदपुर CHC में नवजात की मौत पर बवाल: ‘क्रिमिनल नेग्लिजेंस’ का आरोप—स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने ली मासूम की जान।

घंटों तड़पती रही प्रसूता, डॉक्टर का मोबाइल नंबर तक देने से मना—स्टाफ की शर्मनाक ‘Dereliction of Duty’ उजागर

परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर के जाने के बाद प्रसूता लगातार घंटों तक दर्द में तड़पती रही, लेकिन उसे न दवा दी गई, न प्राथमिक उपचार, और न ही डॉक्टर को बुलाने की कोई ईमानदार कोशिश की गई।
स्टाफ ने बार-बार पूछने पर भी डॉक्टर का नंबर देने से मना कर दिया—जो स्वास्थ्य सेवाओं में Patient Rights Violation की सीधी श्रेणी में आता है।

जब प्रशांत सिंह खुद डॉक्टर के कमरे तक पहुंचे, तो डॉक्टर ने कमरे से बाहर आने तक से इंकार कर दिया, जो किसी भी चिकित्सा अधिकारी के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों (WHO Patient Safety Protocols) के हिसाब से गंभीर कदाचार (Gross Misconduct) माना जाता है।

फरीदपुर CHC में नवजात की मौत पर बवाल: ‘क्रिमिनल नेग्लिजेंस’ का आरोप—स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने ली मासूम की जान।

शाम 6:30 बजे जबरन कराया गया प्रसव गर्भ में ही दम तोड़ चुका था मासूम

लगभग 9 घंटे की मानवीय क्रूरता के बाद शाम 6:30 बजे प्रसव कराया गया, लेकिन तब तक नवजात गर्भ में ही दम तोड़ चुका था। परिवार का कहना है कि अगर समय पर डॉक्टर मौजूद होतीं, तो बच्चा आज जीवित होता यह बयान पूरा मामला कार्यवाही की मांग से कोर्ट तक जाने लायक संवेदनशील स्तर पर पहुंचाता है।

इलाज मांगने पर स्टाफ द्वारा अभद्रता—पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने का आरोप

इलाज की गुहार लगाने पर भी स्टाफ की तरफ से अभद्रता, डराने-धमकाने और दबाव बनाने की कोशिश की गई, जिससे यह मामला मात्र लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टमेटिक फेल्योर और संस्थागत अराजकता (Institutional Collapse) का रूप लेता दिख रहा है।

केंद्र प्रभारी से संपर्क न होना, लगातार अनुपस्थित रहने के आरोप प्रबंधन की पोल खोलने वाली ‘Systemic Breakdown’ की तस्वीर

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. अनुराग गौतम से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। सूत्रों के अनुसार, प्रभारी अक्सर केंद्र पर मौजूद नहीं रहते, जिससे अस्पताल की व्यवस्थाएं लगातार अव्यवस्थित और जोखिमपूर्ण स्थिति में रहती हैं।

यह स्थिति न केवल जिला स्वास्थ्य विभाग पर, बल्कि राज्य स्वास्थ्य तंत्र पर भी गंभीर सवाल उठाती है।

अगर समय पर ध्यान दिया होता तो मेरा बच्चा जीवित होता पीड़ित पिता की दहलाने वाली पुकार

प्रशांत सिंह की यह पीड़ा स्वास्थ्य व्यवस्था की मानवता पर कलंक लगाती है:

अगर समय पर डॉक्टर आतीं, मेरा बच्चा आज जीवित होता… मेरे सामने मेरा बच्चा बिना इलाज के मर गया।

कार्रवाई की मांग तेज, स्वास्थ्य विभाग पर बढ़ा दबाव, शासन तक पहुंचा मामला

परिवार ने ड्यूटी डॉक्टर, अस्पताल स्टाफ, प्रबंधन और प्रभारी के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई, निलंबन और आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है।
मामले की गंभीरता देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

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