Uproar in Lok Sabha over Speaker Om Birla लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश: 10 घंटे की बहस तय, विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप

Uproar in Lok Sabha over Speaker Om Birla लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश: 10 घंटे की बहस तय, विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप

लोकसभा में आज (10 मार्च 2026) इतिहास का एक नया मोड़ देखने को मिला। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव पर कुल 10 घंटे की बहस तय हुई है। बहस के दौरान सदन में जोरदार हंगामा हुआ, जिसमें मुख्य मुद्दा बना – जब स्पीकर खुद पर अविश्वास प्रस्ताव चल रहा हो, तो सदन की अध्यक्षता कौन करेगा? और डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति क्यों नहीं हुई?

Uproar in Lok Sabha over Speaker Om Birla लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश: 10 घंटे की बहस तय, विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप

प्रस्ताव पेश करने का पूरा विवरण

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने औपचारिक रूप से यह प्रस्ताव पेश किया। इसमें 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर हैं। विपक्ष का मुख्य आरोप है कि स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। खास तौर पर:

  • लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई।
  • कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा को दबाया गया।
  • सदन की गरिमा और निष्पक्षता का हनन हुआ।

प्रस्ताव पेश होते ही सदन में हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच संसदीय नियमों और प्रक्रिया को लेकर तीखी बहस हुई।

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अध्यक्षता को लेकर बड़ा विवाद

प्रस्ताव पेश होने के बाद सबसे बड़ा सवाल उठा – स्पीकर पर अविश्वास प्रस्ताव चल रहा है, तो सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा? उस समय सदन की कार्यवाही जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में चल रही थी।

  • एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी और तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया।
    ओवैसी ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव हो, तो स्पीकर या उनके द्वारा नामित व्यक्ति को कार्यवाही नहीं चलानी चाहिए। उन्होंने ये भी बताया कि लोकसभा में डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति अभी तक नहीं हुई है। इसलिए चेयर पर बैठे सदस्य को स्पीकर की स्वीकृति से ही नामित किया गया है, और इस प्रस्ताव पर बहस कराना नियमों के खिलाफ है।
  • भाजपा ने इसका कड़ा जवाब दिया।
    भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संसदीय नियमों के अनुसार चेयर पर बैठा कोई भी सदस्य स्पीकर के समान अधिकारों से कार्यवाही चला सकता है।
  • कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधा और कहा कि डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति न होना गंभीर मुद्दा है।
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जगदंबिका पाल का फैसला

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद जगदंबिका पाल ने फैसला सुनाया कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए चेयर को कार्यवाही चलाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने ये भी बताया कि स्पीकर ओम बिरला ने खुद इस बहस की अध्यक्षता नहीं करने का फैसला लिया है। साथ ही स्पीकर ने प्रस्ताव में मौजूद कुछ तकनीकी गलतियों को ठीक करने में उदारता दिखाई।

अंत में कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने औपचारिक रूप से प्रस्ताव सदन में रखा और तय हुआ कि इस पर कुल 10 घंटे की बहस होगी।

क्या है आगे का कार्यक्रम?

  • बहस में विपक्ष और सत्ता पक्ष के प्रमुख नेता हिस्सा लेंगे।
  • स्पीकर ओम बिरला को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिलेगा।
  • बहस के बाद प्रस्ताव पर मतदान होगा, लेकिन चूंकि भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए प्रस्ताव पास होने की संभावना बहुत कम है।
  • यह बहस लोकसभा की कार्यवाही, निष्पक्षता और संसदीय मर्यादा पर एक बड़ा बहस का मुद्दा बन गई है।

यह घटना भारतीय संसद के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जहां स्पीकर पर पहली बार इतने बड़े स्तर पर अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है।

क्या आपको लगता है कि स्पीकर पर ये आरोप सही हैं या राजनीतिक बदले की कार्रवाई है? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं।

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