अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तनाव के दौरान हालात इतने बिगड़ गए थे कि दोनों देशों के बीच परमाणु हमले की नौबत तक आ गई थी कहा कि उन्होंने ही दोनों देशों के बीच युद्ध रुकवाया
नई दिल्ली, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के एक साल पूरे होने पर एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तनाव के दौरान हालात इतने बिगड़ गए थे कि दोनों देशों के बीच परमाणु हमले की नौबत तक आ गई थी। उन्होंने इसे अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि उन्होंने ही दोनों देशों के बीच युद्ध रुकवाया। हालांकि भारत ने तीसरे देश की किसी भी मध्यस्थता से साफ इनकार किया है।

ट्रंप का दावा: परमाणु हमले की आशंका तक पहुंचा तनाव
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा, “मैंने पिछले 10 महीनों में 8 युद्ध रुकवाए। खासकर भारत और पाकिस्तान के बीच बात बहुत बिगड़ चुकी थी। दोनों ने एक-दूसरे के 8 लड़ाकू विमान मार गिराए थे। मेरे विचार से दोनों देशों के बीच परमाणु हमले की नौबत आ गई थी। मुझे हर युद्ध रुकवाने के लिए एक नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। मैंने लाखों लोगों की जान बचाई है।”
ट्रंप ने आगे कहा कि उन्होंने दोनों देशों को व्यापार बंद करने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद संघर्षविराम हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि नोबेल जीतने वाली मारिया मचाडो ने भी कहा है कि असली नोबेल के हकदार ट्रंप हैं।

ऑपरेशन सिंदूर: क्या हुआ था असल में?
यह सब बातें 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुईं। उस हमले में कई जवान शहीद हुए थे। इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की। इस दौरान कई आतंकी कैंप तबाह हुए और पाकिस्तानी सेना के कई एयरबेस को नुकसान पहुंचा। दोनों देशों के बीच करीब चार दिन तक तनाव चरम पर रहा। पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई की कोशिश की, लेकिन भारत ने मजबूत रुख अपनाया।
अंत में 26 अप्रैल 2025 को दोनों देशों ने संघर्षविराम की घोषणा की। भारत ने साफ कहा कि यह निर्णय दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत से हुआ है और किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं ली गई।
भारत का साफ इनकार: कोई तीसरा देश नहीं था मध्यस्थ
भारतीय विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि संघर्षविराम पूरी तरह भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी सहमति से हुआ। भारत ने किसी भी तीसरे देश या मध्यस्थ की भूमिका को स्वीकार नहीं किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “भारत हमेशा से अपनी समस्याओं को द्विपक्षीय स्तर पर सुलझाने में विश्वास रखता है।”

ट्रंप के दावों पर उठे सवाल
ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। कई विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं। कुछ ने इसे चुनावी रणनीति भी बताया है। वहीं अमेरिकी मीडिया में भी ट्रंप के इस दावे पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या वाकई परमाणु हमले की आशंका थी या यह महज अतिशयोक्ति है?
ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें हर युद्ध रुकवाने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। उन्होंने मारिया मचाडो के हवाले से कहा कि असली नोबेल के हकदार वे हैं।
भारत-पाक तनाव: एक नजर में
- 22 अप्रैल 2025: पहलगाम में आतंकी हमला, कई जवान शहीद
- 23-25 अप्रैल 2025: भारत का ऑपरेशन सिंदूर, पाकिस्तान में आतंकी ठिकाने तबाह
- 26 अप्रैल 2025: दोनों देशों ने संघर्षविराम की घोषणा
- भारत का रुख: कोई तीसरा देश नहीं था मध्यस्थ, द्विपक्षीय समझौता
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के मामले में कितना सख्त है। ट्रंप के दावे चाहे कितने भी बड़े क्यों न हों, भारत ने हमेशा अपनी बात साफ रखी है।







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