,

हरिद्वार में ऋषि क्षेत्र का भव्य अनावरण: युग-परिवर्तन की महायात्रा में नया अध्याय, गायत्री परिवार की साधना को सलाम

हरिद्वार में ऋषि क्षेत्र का भव्य अनावरण: युग-परिवर्तन की महायात्रा में नया अध्याय, गायत्री परिवार की साधना को सलाम

हरिद्वार, 2 जनवरी 2026 – देवभूमि हरिद्वार के वैरागी कैंप में भारतीय संस्कृति और ऋषि परंपरा का एक स्वर्णिम अध्याय रचा गया। अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा वंदनीया माताजी एवं अखंड दीपक के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर ऋषि क्षेत्र का भव्य अनावरण किया गया। यह ऐतिहासिक आयोजन न केवल हरिद्वार को आध्यात्मिक ऊर्जा से आप्लावित करता है, बल्कि आधुनिक युग में प्राचीन ऋषि-ज्ञान की प्रासंगिकता को सशक्त रूप से रेखांकित करता है।

विशिष्ट विभूतियों के सान्निध्य में हुआ यह समारोह युग-परिवर्तन की महायात्रा का एक नवीन अध्याय साबित हुआ, जहां साधना, सेवा और संस्कार के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण की भावना को मजबूत किया गया। हजारों स्वयंसेवकों की उपस्थिति ने इसे एक सामूहिक उत्सव का रूप दे दिया, जो उत्तराखंड की आध्यात्मिक धरोहर को नई ऊंचाइयों पर ले गया।

हरिद्वार, जो गंगा की गोद में बसी तपोभूमि है, हमेशा से आध्यात्मिक जागरण का केंद्र रहा है। गायत्री परिवार का यह प्रयास प्राचीन ऋषि परंपरा को जीवंत करने का एक प्रयास है, जो आज के युवाओं को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है। अनावरण समारोह में मंचासीन अतिथियों के विचारों ने न केवल आध्यात्मिक संदेश दिए, बल्कि सामाजिक सद्भाव और विकास के विजन को भी प्रस्तुत किया। यह आयोजन शताब्दी वर्ष के उत्सव का हिस्सा है, जो पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की विरासत को स्मरण कराता है।

पूज्य गुरुदेव का विराट वटवृक्ष: सांसद अजय भट्ट का भावपूर्ण संबोधन

अनावरण समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री एवं सांसद श्री अजय भट्ट ने कहा कि पूज्य गुरुदेव द्वारा बोया गया बीज आज एक विराट वटवृक्ष के रूप में विकसित हो चुका है। उन्होंने गुरुदेव की कठिन साधना और तपश्चर्या का जिक्र करते हुए कहा कि स्वयं को तपाकर उन्होंने मानवता को जो अमर संदेश दिया, वह विश्व के कोने-कोने में अखंड दीप की भांति प्रकाश फैलाता रहेगा। भट्ट ने गायत्री परिवार के प्रत्येक परिजन की मुस्कान और सेवा भाव को कर्मयोग का प्रमाण बताया, जो कठिन परिस्थितियों में भी अटल रहता है।

उनका संदेश युवाओं के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक था। उन्होंने कहा कि आज का समय चुनौतियों से भरा है, लेकिन गुरुदेव की शिक्षाएं हमें दिशा प्रदान करती हैं। यह अनावरण न केवल सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता का भी। सांसद भट्ट ने उत्तराखंड को तपोभूमि बताते हुए कहा कि यहां की पवित्र नदियां और पर्वत हमें जीवन का संतुलन सिखाते हैं। उनका संबोधन श्रोताओं को भावुक कर गया, और तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंज उठा।

हरिद्वार में ऋषि क्षेत्र का भव्य अनावरण: युग-परिवर्तन की महायात्रा में नया अध्याय, गायत्री परिवार की साधना को सलाम

आध्यात्मिकता जीवन का संतुलन: मुख्य सचिव आनंद वर्धन का आह्वान

मुख्य सचिव श्री आनंद वर्धन ने अपने संबोधन में आध्यात्मिकता को जीवन को संतुलन देने की विधि करार दिया। उन्होंने कहा कि वही विद्या सार्थक है जो चरित्र निर्माण और लोक कल्याण की भावना विकसित करे। हमारे ऋषियों ने समाज के बीच रहकर जीवन को ऊंचा उठाने की शिक्षा दी, और गायत्री परिवार के अधिष्ठाता आचार्यश्री ने धर्म को चरित्र और कर्तव्य से जोड़कर प्रस्तुत किया। वर्धन ने जोर देकर कहा, “युग बदलता नहीं, युग बदला जाता है।”

उन्होंने उत्तराखंड को तपोभूमि के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना की भूमि बताया। “हमारे पर्वत हमें स्थिरता सिखाते हैं, वहीं नदियां प्रवाह।” राज्य सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट है – विकास प्रकृति के साथ सामंजस्य में हो और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने युवाओं का विशेष आह्वान किया कि आज का युवा नौकरी के साथ-साथ अर्थ और उद्देश्य भी ढूंढ रहा है। आध्यात्मिकता ही वह पुल है जो व्यक्तिगत और सामाजिक विकास को जोड़ता है। वर्धन का संदेश व्यावहारिक और प्रेरणादायी था, जो सरकारी नीतियों को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ता है।

युग-ऋषि गुरुदेव का संदेश: डॉ. चिन्मय पंड्या की प्रेरणा

अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि युगऋषि पूज्य गुरुदेव ने हम सभी को एक सूत्रबद्ध भाव-धारा से जोड़ा है। आज का समय आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत मूल्यवान है। वंदनीया माताजी के दिव्य संदेश का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि भारत को सर्वसमर्थ बनाने के लिए भारतीय संस्कृति को सुदृढ़ करना होगा। प्राचीन ऋषि परंपरा के पुनर्जीवन पर विशेष बल देते हुए पंड्या ने युवाओं को साधना और सेवा का आह्वान किया।

उनका संदेश आधुनिक चुनौतियों – जैसे पर्यावरण संकट और सामाजिक विभाजन – से निपटने का था। गायत्री परिवार का कार्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक उत्थान का माध्यम है। पंड्या ने कहा कि ऋषि क्षेत्र का अनावरण युग-परिवर्तन की दिशा में एक मील का पत्थर है, जो ज्ञान, कर्म और भक्ति को एकीकृत करता है।

हरिद्वार में ऋषि क्षेत्र का भव्य अनावरण: युग-परिवर्तन की महायात्रा में नया अध्याय, गायत्री परिवार की साधना को सलाम

एकता का प्रतीक: विश्व हिंदू परिषद और अन्य वक्ताओं के विचार

विश्व हिंदू परिषद के मिलिंद परांडे ने कहा कि गायत्री परिवार ने सभी जाति और धर्मों को एक सूत्र में पिरोने का भगीरथ प्रयास किया है। इससे पूर्व मेयर श्रीमती किरण जैसल सहित अन्य अतिथियों ने साधना, सेवा, संस्कार और राष्ट्र-निर्माण के क्षेत्र में गायत्री परिवार के कार्यों को प्रेरणास्पद बताया। सभी वक्ताओं ने एकजुटता का संदेश दिया, जो आज के विभाजित समाज के लिए आवश्यक है।

सम्मान और समापन: हजारों स्वयंसेवकों का उत्साह

कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों सहित नितिन गौतम, तरुण वशिष्ठ आदि को देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतीक चिह्न, युगसाहित्य, गंगाजली एवं गायत्री महामंत्र अंकित उपवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह, एचआरडीए सचिव मनीष कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान सहित प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक, शांतिकुंज व्यवस्थापक श्री योगेंद्र गिरि और देश के कोने-कोने से आए हजारों स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

समापन पारंपरिक आरती और भजन के साथ हुआ, जो आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर था। यह आयोजन गायत्री परिवार की सतत साधना को दर्शाता है, जो शताब्दी वर्ष को यादगार बनाने का प्रयास है।

हरिद्वार का यह अनावरण उत्तराखंड को आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में एक कदम है। क्या आपको लगता है कि ऋषि परंपरा आज के युवाओं के लिए प्रासंगिक है? कमेंट्स में अपनी राय साझा करें। हमारे ब्लॉग को फॉलो करें आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अपडेट्स के लिए – जय गायत्री माता!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About Author

https://m7.media9news.com/media9/hls/jnnews.m3u8

Latest Posts